विकास धाकड़/ {मुंबई}। युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री कुलदीप कुमार जी एवं मुनि श्री मुकुल कुमार जी के पावन सानिध्य में गुजराती परंपरा के अनुसार (बेसता) वर्ष पर वृद्ध मंगल पाठ का सुंदर आयोजन किया गया। मुनि श्री कुलदीप कुमार जी ने कहा – नव वर्ष का अर्थ है एक नए समय का आरंभ नव वर्ष हमें नई दिशा और नई सोच देता है।
हमें इसे केवल एक पर्व के रूप में नहीं बल्कि आत्म विकास और सकारात्मक परिवर्तन के अवसर के रूप में मनाना चाहिए। यदि हम अच्छे कर्म सच्ची निष्ठा और परिश्रम के साथ आगे बड़े तो हर वर्ष हमारे जीवन में खुशियां और सफलता लेकर आएगा। मुनि श्री मुकुल कुमार जी ने कहा – भारत में नव वर्ष अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 1 जनवरी को नया वर्ष मनाया जाता है परंतु भारतीय परंपरा में विभिन्न धर्मो और प्रांतों में अलग-अलग तिथियों पर नव वर्ष का उत्सव होता है।
जैसे चैत्र नवरात्रि के पहले दिन हिंदू नव वर्ष, गुड़ी पड़वा (महाराष्ट्र) उगादि (दक्षिण भारत) बैसाखी (पंजाब) बेसता वर्ष (गुजरात) आदि। नव वर्ष का महत्व केवल उत्सव तक सीमित नहीं है यह हमें प्रेरणा देता है कि हम अपनी गलतियों से सीख कर बेहतर व्यक्ति बने। यह हमें अवसर देता है कि हम अपने लक्ष्य की समीक्षा करें और नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़े। कार्यक्रम का कुशल संचालन तेरापंथ युवक परिषद कांदिवली के अध्यक्ष राजेंद्र दूगड़ ने किया। पुरे धर्म परिवार की सराहनीय उपस्थिति रही.!
नव वर्ष आत्मावलोकन का अवसर बने: श्री कुलदीप कुमार जी

