लाडनूं। वैशाख महीने का शुक्ल पक्ष वर्तमान में तेरापंथ धर्मसंघ के लिए किसी विभिन्न उत्सवों का सौगात लेकर आता है। इस दौरान जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ का प्रत्येक व्यक्ति उत्साह, उमंग व उल्लास से ओतप्रोत नजर आता है। जी हां! और यह अवसर वर्तमान समय में तेरापंथ धर्मसंघ की राजधानी लाडनूं को प्राप्त हो रहा है। जी हां! वैशाख शुक्ला नवमी को तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी का जन्मदिवस की तिथि है तो वैशाख शुक्ला दशमी तेरापंथ के ग्यारहवें अनुशास्ता के पट्टोत्सव की तिथि है।
ऐसे में एक दिवस पूर्व ही सम्पूर्ण धर्मसंघ जहां अपने वर्तमान आराध्य के जन्मदिवस के हर्षोल्लास में डुबा हुआ था तो वहीं आज अर्थात् वैशाख शुक्ला दशमी को चतुर्विध धर्मसंघ अपने वर्तमान अधिशास्ता के 17वें पदाभिषेक (पट्टोत्सव) के उमंग में सराबोर नजर आ रहा था। पूरा जैन विश्व भारती परिसर में जय-जय ज्योतिचरण- जय-जय महाश्रमण के बुलंद जयघोष से गुंजायमान हो रहा था। चतुर्विध धर्मसंघ अपने अनुशास्ता के स्वस्थ, दीर्घायु होने के साथ-साथ सुदीर्घकाल तक अपनी छत्रछाया प्रदान करने की कामना कर रहा था।
जैन विश्व भारती का सम्पूर्ण परिसर वर्तमान अनुशास्ता की अभिवंदना में अटापटा-सा नजर आ रहा था। जैन विश्व भारती संस्थान, जैन विश्व भारती, मान्य विश्वविद्यालय, महाप्रज्ञ प्रोग्रेसिव स्कूल, आचार्यश्री महाश्रमण योगक्षेम वर्ष प्रवास व्यवस्था समिति आदि-आदि संस्थाओं द्वारा आचार्यश्री की अभिवंदना में लगाए गए बैनर, होर्डिंग्स, और परिसर में स्थान-स्थान पर बनी रंगोलियों के माध्यम से अपनी अभिवंदना को दर्शा रहे थे।
आज भी ब्रह्म मुहूर्त से जो अभिवंदना का क्रम प्रारम्भ हुआ, वह देर शाम तक मानों जारी रहा। उमड़ते श्रद्धालुओं की अपार भीड़ के कारण जैन विश्व भारती परिसर किसी मेला स्थल के रूप में परिवर्तित दिखाई दे रहा था। आचार्यश्री ने आज अपने पट्टोत्सव के अवसर पर वर्ष 2028 का चतुर्मास हरियाणा राज्य के हिसार में करने की घोषणा कर श्रद्धालुओं पर विशेष कृपा भी बरसाई। विशाल सुधर्मा सभा में उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ के मध्य जब तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान देदीप्यमान महासूर्य, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी विराजमान हुए तो श्रद्धालुओं के बुलंद जयघोष से पूरा वातावरण महाश्रमणमय बन गया। आचार्यश्री के महामंत्रोच्चार के साथ 17वें पदाभिषेक समारोह का शुभारम्भ हुआ। योगक्षेम वर्ष के अंतर्गत नित्य की भांति साध्वीवृंद ने प्रज्ञा गीत का संगान किया।
तदुपरान्त संतवृंद ने तेरापंथ धर्मसंघ के महासूर्य, वर्तमान अधिशास्ता के 17वें पट्टोत्सव समारोह के संदर्भ में आचार्य वंदना को प्रस्तुति दी। शासन गौरव साध्वी कल्पलताजी ने अपनी श्रद्धाभिव्यक्ति दी। बहिर्विहारी अग्रणी साध्वी समुदाय ने गीत को प्रस्तुति दी। मुनि विजयकुमारजी, साध्वी बसंतप्रभाजी, साध्वी कनकरेखाजी, साध्वी साधनाश्रीजी, साध्वी विमलप्रभाजी, समणी नियोजिका मधुरप्रज्ञाजी, मुनि कमलकुमारजी, साध्वी संगीतश्रीजी ने आचार्यश्री की अभिवंदना में अपनी अभिव्यक्ति दी।
साध्वी तिलकश्रीजी, साध्वी शशिरेखाजी, साध्वी कुंथुश्रीजी, साध्वी सूरजप्रभाजी आदि साध्वियों ने सामूहिक रूप में गीत को प्रस्तुति दी। समणी कुसुमप्रज्ञाजी, साध्वी कीर्तिलताजी, साध्वी संघप्रभाजी ने भी अपनी अभिव्यक्ति साध्वीवृंद के एक और समूह ने गीत का संगान किया। आचार्यश्री के संसारपक्षीय भ्राता श्री सूरजकरण दूगड़ ने अपनी अभिव्यक्ति दी। मुनि राजकुमारजी ने गीत का संगान किया। मुनिवृंद ने भी गीत का सामूहिक संगान किया।
तेरापंथ धर्मसंघ की नवमी साध्वीप्रमुखा साध्वी विश्रुतविभाजी ने आज के अवसर पर अपने उद्बोधन में आचार्यश्री की अभिवंदना में अपनी श्रद्धाभिव्यक्ति दी। मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी ने भी अपने सुगुरु के चरणों की अभिवंदना करते हुए अपनी श्रद्धाप्रणति में गीत का भी संगान किया। तेरापंथाधिशास्ता युगप्रधान अनुशास्तास आचार्यश्री महाश्रमणजी ने सम्पूर्ण धर्मसंघ को पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि परमात्मा, परम वंदनीय भगवान महावीर का आज कैवल्य कल्याणक दिवस है। भगवान महावीर जो वर्धमान नाम से भी जाने जाते हैं।
उन्होंने युवावस्था में साधुत्व स्वीकार किया। साढे बारह वर्षों तक साधना करते-करते आज के दिन उन्होंने केवल ज्ञान को प्राप्त कर लिया। दुनिया में परम विशिष्ट पुरुष आते हैं, जो दुनिया में राह दिखाने के लिए आते हैं, कइयों में चाह पैदा हो जाता है तो कई में उत्साह का जागरण भी हो जाता है। राह दिख जाना, चाह पैदा हो जाना और उत्साह का जाग जाना- ये तीनों चीजें प्राप्त हो जाती हैं तो आदमी पुरुषार्थ कर कोई उपलब्धि भी प्राप्त कर सकता है।
आज का दिन किसी रूप में मुझसे भी जुड़ गया है। किसी रूप में मैं भी भगवान महावीर के इस दिन से जुड़ गया हूं। योग ऐसा बना है कि वैशाख शुक्लपक्ष से मेरे कई प्रसंग जुड़े हुए हैं तो भगवान महावीर का भी यह दिन वैशाख महीने के शुक्लपक्ष से जुड़ा हुआ है। दुनिया में अनेक धर्म हैं। हम सभी जैन धर्म में साधना कर रहे हैं। जैन धर्म में दिगम्बर और श्वेताम्बर रूप की दो धाराएं बह रही हैं। हम लोग श्वेताम्बर धारा के अमूर्तिपूजक धारा के तेरापंथ के पथिक हैं। इस संप्रदाय के प्रथम अनुशास्ता, जनक आचार्यश्री भिक्षु हुए। आज से करीब 266 वर्ष पूर्व इसका प्रारम्भ हुआ। आचार्यश्री भिक्षु स्वामी द्वारा बनाई गई मर्यादाओं व नियमों के आधार पर यह शासन चल रहा है।
मुझे दीक्षा लेने के बाद आचार्यश्री तुलसी पास बचपन से ही रहने का अवसर मिला। उन्होंने मुझे कितना आगे बढ़ाया। युवाचार्यश्री महाप्रज्ञजी के पास भी रहा। संघीय कार्य से भी जुड़ने का सुअवसर मिला। आचार्यश्री तुलसी के महाप्रयाण के बाद आचार्यश्री महाप्रज्ञजी ने मुझे युवाचार्य घोषित कर दिया और मुझे लगभग तेरह वर्षों तक उनकी साया में रहने का अवसर मिला। कितनी वत्सलता प्राप्त हुई। मुझे वर्षों तक उनके पास बैठकर आहार करने का मौका मिलता। उनके पास विद्यार्थी के रूप में कृपा मिला। इस प्रकार मुझे गुरुदेवश्री तुलसी व आचार्यश्री महाप्रज्ञजी की कृपा प्राप्त हुई।
परम पूज्य आचार्यश्री महाप्रज्ञजी के सरदारशहर में महाप्रयाण के बाद धर्मसंघ ने मुझे आज के दिन दायित्व की चद्दर ओढाई थी। सोलह-सतरह वर्षों में इतना बड़ा साधु-साध्वी तो आज तक उपस्थित नहीं हुआ था। एक दृष्टि से देखूं तो पट्टोत्सव तो मानों आज ही हो रहा है। यह पहली बार अभूतपूर्व दिन आया है, जब इतनी संख्या में साधु-साध्वियां व समणियां आदि उपस्थित हैं। आचार्यश्री ने साध्वीप्रमुखाजी, साध्वीवर्याजी व मुख्यमुनिश्री सहित चारित्रात्माओं व श्रावक-श्राविकाओं को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।
हरियाणा के हिसार में वर्ष 2028 के चतुर्मास की महातपस्वी महाश्रमण ने की घोषणा आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में आज हरियाण से बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित थे। साथ ही हरियाणा के हिसार की विधायक, जैन विश्व भारती मान्य विश्वविद्यालय की पूर्व कुलाधिपति श्रीमती सावित्री जिन्दल भी उपस्थित थीं। उन्होंने आचार्यश्री की अभिंवदना में अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि आज का अवसर मेरे लिए परम सौभाग्यशाली है, जो आपके पट्टोत्सव के अवसर पर उपस्थित होकर अपनी भावनाओं को व्यक्त कर पा रही हूं। आपका सम्पूर्ण जीवन त्याग, तपस्या, संयम और मानवता के उत्थान का दिव्य उदाहरण है। समाज को आप जैसे महापुरुष ही मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने अपने अभिभाषण के दौरान आचार्यश्री से हिसार में चतुर्मास करने की पुरजोर प्रार्थना की। आचार्यश्री ने उन्हें मंगल आशीर्वाद कर…

