बेंगलुरु। कुमारपार्क स्थित श्री सुराणा साधना संकुल में आगामी रजत अनुग्रह उत्सव की तैयारियों के अंतर्गत ऐतिहासिक रजत अनुग्रह उत्सव के आलंबन में “पत्रिका लेखन समारोह” अत्यंत उत्साह, भक्ति और भव्यता के साथ सम्पन्न हुआ। इस आयोजन ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा और गुरु भक्ति से ओत-प्रोत कर दिया। यह विशेष आयोजन बेंगलुरु उद्यान सिटी को जिनालय सिटी बनाने वाले परमोपकारी गुरुवर दक्षिण केसरी पूज्य गुरुदेव श्री स्थूलभद्रसूरीश्वरजी म.सा. के उपकार संस्मरण वर्ष (36वें वर्ष) एवं शिल्पकलामनीषी पूज्य गुरुदेव श्री चन्द्रयशसूरीश्वरजी म.सा. के दक्षिण भारत धर्म प्रभावक विचरण के 25वें वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता निभाते हुए गुरु उपकार के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की। समारोह स्थल श्री सुराणा साधना संकुल को विषयानुसार अत्यंत आकर्षक एवं भव्य रूप से सजाया गया था। साज-सज्जा की सुंदरता और बारीकी ने सभी का मन मोह लिया। प्रत्येक व्यवस्था में… आध्यात्मिक भावनाओं की झलक स्पष्ट दिखाई दी, जिससे आयोजन की गरिमा और भी बढ़ गई।
कार्यक्रम के प्रारंभ में रजत अनुग्रह उत्सव समिति के सर्वपदाधिकारी एवं बेंगलोर संघ व गुरूभक्तों, अन्य पदाधिकारी गणों ने पूज्य गुरु भगवंतों से आयोजन में पधारने की विनम्र विनती करते हुए प्रसन्नचित भाव से स्वागत किया। तत्पश्चात पूज्य गुरु भगवंत के मुखारविंद से नमस्कार महामंत्र का उच्चारण मंगलमय संगीत के साथ हुआ, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। इस अवसर पर पूज्य गुरुदेव आचार्यश्री चन्द्रयशसूरीश्वरजी म.सा. ने अपने प्रेरक प्रवचनों में जीवन के वास्तविक उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जन्म लेना महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि जीवन को सही दिशा में जीना ही सच्चा सार है। उन्होंने ज्ञानी और अज्ञानी के भेद को स्पष्ट करते हुए बताया कि जो व्यक्ति माया के मोह में नहीं फंसता और आत्मकल्याण की ओर अग्रसर रहता है, वही सच्चा ज्ञानी है।
उन्होंने यह भी कहा कि सच्चा गुरु वही है, जो जीवन को ज्ञान और सन्मार्ग की ओर अग्रसर करे। पूज्य मुनिराज हेमचन्द्रविजयजी म.सा. ने आचार्यश्री के अनंत उपकारों का स्मरण करते हुए कहा कि गुरु का उपकार कभी चुकाया नहीं जा सकता। उनके पुण्य प्रताप की कृपा सदैव सभी पर बनी रहती है। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु के श्रद्धालु अत्यंत सौभाग्यशाली हैं कि…यह रहा आपके द्वारा अपलोड की गई तीसरी इमेज का टेक्स्ट: उन्हें गुरु-शिष्य की अनुपम जोड़ी का सान्निध्य प्राप्त हुआ है, जिसने पिछले चार दशकों से आध्यात्मिक वातावरण का निर्माण कर समाज के पुण्य संचय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह आयोजन गुरु के प्रति अनन्य भक्ति का सजीव उदाहरण है। कुमारापार्क संघ के अध्यक्ष व उत्सव के कुमारापार्क शाखा के चेयरमैन श्रीमान प्रकाशचंदजी राठौड़ ने सभी का स्वागत करते हुए पूज्य गुरु भगवंत के दक्षिणभारत में किये गये उपकारों की श्रृंखला में तीर्थों 45 उपरांत जिनालयों आदि अनेक शासनप्रभावक कार्यों की अनुमोदना की और उनके श्रीचरणों में विनम्र नमन किया। उन्होंने गुरु की सरलता, विशालता एवं अनगिनत उपकारों का स्मरण करते हुए कृतज्ञता व्यक्त की और गुरु-शिष्य की अनुपम जोड़ी के अद्भुत कार्यों की सराहना की और कहा हमारे बैंगलोर का 1990 में भाग्य खुला और सौभाग्य से गुरूद्वय का आगमन आज समस्त भारत वर्ष में हमारा दक्षिण का इतिहास अनोखा रचा गया, गुरू भगवंत ने कार्यशक्ति, समझशक्ति के साथ, सहनशक्ति का अनोखा संगम आज 25 वर्ष उपरांत हमारे दक्षिणभारत और बैंगलोर में विशेष उपकार किया। इनका उपकार हम हमारा संघ पूरा दक्षिणभारत सदियों तक याद रखेगा। श्री सिद्धाचल स्थूलभद्र धाम के अध्यक्ष महोदय एवं अनुग्रह उत्सव के मुख्य श्रीमान् शा इन्दरचंदजी बोहरा ने उत्सव की माहिति देते हुये कहा कि आप जान सकते है कि 25-25 वर्षों तक एक क्षेत्र में अवग्रह करके जिनशासन के बेजोड़ तीर्थों, जिनालयों, मंदिरों का निर्माण करके गुरूदेव…ने हमको क्या नहीं दिया है? हमारी आत्मकल्याण की बहुत बड़ी मुड़ी दी है।
जन्म-जन्मान्तरों तक हम हमारे दोनों गुरू भगवंतों का अनंत उपकार कभी नहीं भूल सकते है। आज मैं आपको क्या बताऊं? हमारे मुनि श्री संयमयशविजय जी, मुनि श्री मोक्षयशविजयजी, मुनि श्री हेमचन्द्रविजयजी महाराज साहेब ने मुझे बुलाया और हम लोगों बैठे थे तो बात चली थी कि गुरूदेव के दक्षिणभारत विचरण वर्ष 25 हो रहे है और हमारे गुरूदेव का उपकार संस्मरण है।
1990 में पधारे थे और 36 वर्ष उपकार संस्मरण हो रहे है तो श्री स्थूलभद्रसूरीश्वरजी महाराजा का 36वाँ वर्ष और गुरूदेव के विचरण रजत उत्सव के लिये जो मुनियों ने भाव दिखाये वो तो मेरे लिये प्रेरणा बन गई मैं तो धन्य बन गया पूरे ट्रस्ट मंडल, गुरू भक्तों की मीटिंग की, श्री सिद्धाचल स्थूलभद्र धाम ट्रस्ट की मीटिंग की, सारे बेंगलोर जैन संघ की मीटिंग कराई जो मेरे कर्मठ कार्यकर्ताओं, युवा कार्यकर्ताओं एवं महिला मंडल के कार्यकर्ताओं ने जो उत्साह दिखाया वही फलस्वरूप आज यह महाउत्सव का आयोजन हो रहा हें पूरे विश्व में बेंगलोर का यशस्वी उत्सव बने यही मंगल कामना। इस महाउत्सव का प्रारम्भ दिनांक 03 मई को गुरूदेव का भव्य मंगल प्रवेश वीवीपुरम् भंडारी जैन विद्यालय के वहां से होगा। पत्रिका लेखन समारोह में जय जिनेन्द्र लाभार्थी परिवार श्रीमान् शा प्रकाशचन्दजी, नवीनकुमारजी, दक्षराजजी कोठारी (यलहंका परिवार) द्वारा गुरु भगवंत के चरणों में वंदन किया गया। इस अवसर पर श्रीमान शा प्रकाशचंदजी कोठारी (यलहंका) ने अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा कि समस्त बेंगलुरु पर गुरु का अनंत उपकार है और इस प्रकार की सच्ची भक्ति एवं श्रद्धा का अवसर मिलना अत्यंत सौभाग्य की बात है। उन्होंने सभी से अधिकाधिक सेवा एवं भक्ति में सहभागी बनने की अपील की तथा गुरु के प्रति गहन कृतज्ञता व्यक्त की।
चिकपेट के अध्यक्ष व उत्सव के सीटी जोन के चेयरमैन श्रीमान गौतमजी सोलंकी ने अपने उद्बोधन में कहा कि पूज्य गुरु भगवंत के प्रत्येक कार्य में शिष्य के रूप में चन्द्रयशविजयजी ने अपनी अद्वितीय कार्यक्षमता और असीम कल्पनाशक्ति का परिचय दिया है। उनके प्रयासों से समाज में नवचेतना का संचार हुआ है और यह भव्य आयोजन सभी के लिए प्रेरणादायक है। इस आयोजन को समस्त दक्षिण भारत जैन संघ द्वारा अनुमोदन, समस्त बेंगलोर जैन संघ द्वारा निर्देशन एवं रजत अनुग्रह उत्सव समिति द्वारा संयोजन प्राप्त हुआ। इस स्वर्णिम अवसर पर पत्रिका लेखन का कार्य समस्त बेंगलुरु समाज के पदाधिकारियों द्वारा विधिवत रूप से अपने कर-कमलों से संपन्न किया गया, जो गुरु भक्ति का अनुपम उदाहरण बना। इस पावन क्षण में उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ साक्षी बना।
बेंगलोर के प्रमुख संघों में उपस्थित
श्री आदिनाथ जिनालय – चिकपेट
श्री वासुपूज्य मुनि सुव्रत स्वामी जिनालय – माधवनगर, कुमारापार्क श्री चिंतामणी पार्श्वनाथ श्री सुराणा साधना संकुल, कुमारापार्क
श्री अजितनाथ जिनालय – नगरथपेट
श्री महावीर स्वामी जिनालय – त्यागराजनगर
श्री अजितनाथ जिनालय – टेनेरी रोड़
श्री चंद्रप्रभु स्वामी जिनालय – ओकलीपुरम्
श्री शांतिनाथ जिनालय – श्रीरामपुरम्
श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ जिनालय – गांधीनगर
श्री सिमंधर शांतिसूरी – वी.वी.पुरम
श्री महावीर स्वामी जिनालय – चामराजपेट
श्री चंद्रप्रभु स्वामी जिनालय – ओसबन रोड़
श्री इन्द्रचंदजी बोहरा
श्री प्रकाशजी राठौड़, श्री प्रकाशजी कोठारी, श्री रमेशजी बोहरा, श्री राजुभाई एस.के
श्री गौतमजी सोलंकी, श्री गौतमजी बंदामुथा, श्री नरेन्द्रजी आच्छ, श्री मनुभाई वेदमुथा, श्री सरदारमलजी सुराणा, श्री प्रकाशजी पीरगल, श्री हेमराजजी जियाणी, श्री चन्दुलालजी भंडारी, श्री शांतिलालजी खिंवेसरा, श्री जयचंदजी चुत्तर, श्री मनोहरजी श्रीश्रीमाल, श्री गिरीशभाई वोरा, श्री अंबालालालजी भिरलोसा, श्री सुनीलजी धारीवाल, श्री योगेषजी शाह, श्री राकेशजी चुत्तर, श्री सचीनजी पोरवाल, श्री दिनेशजी खिंवेसरा, राजेश साकरिया
श्री जैलेश शाह, श्री जीतु नागोरी,
श्री प्रसन्न पगारिया,
श्री अखिल भारतीय जैन युवक महासंघ बैंगलोर शाखा
श्री दक्षिण केशरी महिला मंडल श्री मातृछाया महिला संगठन, वीवीपुरम् साथ में अनेक श्रद्धालुओं का जैन सैलाब कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
कार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं ने आगामी रजत अनुग्रह उत्सव को भव्य, ऐतिहासिक एवं अविस्मरणीय बनाने का सामूहिक संकल्प लिया। समारोह का प्रभावी एवं सुचारु संचालन श्रीमान गौतम बंदामुथा द्वारा किया गया, जिससे पूरा आयोजन गरिमामय एवं सुव्यवस्थित रूप से सम्पन्न हुआ साथ ही अहमदाबाद से संगीतकार श्री त्रिलोक मोदी ने सुन्दर संगीत रमझट जमाई
कार्यक्रम में पुष्पा बेन राठौड़ द्वारा प्रस्तुत भक्ति गीत “धन्य धरती जिस पर चले मेरे गुरुदेव…” ने वातावरण को भाव-विभोर कर दिया। उनकी भावपूर्ण प्रस्तुति ने सभी श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। कल पूज्य गुरूदेव श्री चिकपेट जिनालय में शासन स्थापना दिवस के कार्यक्रम में निश्रा प्रदान करेंगे।

