नई दिल्ली: दिल्ली के प्रदूषण पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने मंगलवार को सुनवाई की। एनजीटी ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा कि कूड़ा जलाने के मामलों को रोकने के लिए वह क्या कर रही है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि जब भी प्रदूषण बढ़ता है तो हमें बताया जाता है कि निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी गई है। इससे मजदूरों को परेशानी होती है। उनका रोजगार छिन जाता है। इस पर दिल्ली के मुख्य सचिव विजय कुमार देव ने माना कि प्रदूषण रोकने की उनकी कोशिशें अधूरी हैं। उन्होंने कहा कि हम कूड़ा जलाने की समस्या से सख्ती से निपटेंगे। अगर कोई भी कूड़ा जलते देखे तो हमें बताए। इसके लिए जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
एनजीटी ने केंद्र सरकार से भी प्रदूषण रोकने के कदमों के बारे में पूछा। इस पर केंद्र ने कहा कि प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए सचिव स्तर की बैठकें जारी हैं। हमने राज्यों को इस समस्या से निपटने के लिए 1150 करोड़ रुपए दिए हैं। इस साल प्रदूषण रोकने के लिए 50 हजार मशीनें मुहैया कराई गई हैं। पिछले साल 14 हजार मशीनें दी थीं।
एनजीटी में मंगलवार को अफसर पेश हुए
एनजीटी प्रमुख जस्टिस एके गोयल की बेंच ने सोमवार को दिल्ली में फैले प्रदूषण पर स्वत: संज्ञान लेते हुए दिल्ली के मुख्य सचिव, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति और पर्यावरण और वन मंत्रालय के अफसरों को मंगलवार को पेश होेने का आदेश दिया था। ट्रिब्यूनल ने कहा था कि मौजूदा स्थिति एक दिन की नहीं बल्कि लंबे समय से जारी पर्यावरण की उपेक्षा का नतीजा है। दिल्ली-एनसीआर में खराब एयर क्वालिटी पर एनजीटी ने कहा था कि स्थितियों को ठीक करने के लिए बेहतर योजनाएं होनी चाहिए, ताकि पहले की समस्याओं को भी ठीक किया जा सके।

