मुंबई। आ. रविशेखरसूरीश्वरजी म. सा. की निश्रा में नेमानी वाड़ी, ठाकुरद्वार के प्रांगण में आज ललितशेखरविजयजी म. सा. ने ‘तीसरी साधु भगवंतों की शरण’ और आज श्रावण सुदि 5 गिरनार मंडन 22वें श्री नेमिनाथ भगवान के जन्म कल्याणक के बारे बताया।
दुनिया की आपत्ति की सलाह, मोक्ष मार्ग की आराधना, भगवान की पहचान, आदि के लिए साधुओं के पास जाते हैं। मनुष्य भव, संयम के लिए पराक्रम, जिन वचन, चारित्र अंगीकार, भगवान के प्रति श्रद्धा, विरति का पालन, सर्व विरति, आदि मोक्ष प्राप्ती के रास्ते हैं। जो आत्मा का विकास रोके वो ग्रंथि (बाह्य 9 प्रकार और अभ्यंतर 14 प्रकार की ग्रंथि)।
जब तीर्थंकर परमात्मा के कल्याणक होते हैं तब नरक में भी क्षण भर के लिए प्रकाश होता हैं और तब नरक के जीवों के अलावा तीनों गति के जीवों को भी खुशी मिलती हैं और उस खुशी में अगर आयुष्य बंध होता हैं तब नरक के जीव मनुष्य गति, तिर्यंच के जीव मनुष्य या देव गति, मनुष्य के जीव देव गति और देवों के जीव मनुष्य गति का आयुष्य बांधते हैं।
तीर्थंकर परमात्मा का जन्म अर्ध रात्रि को होता हैं और उस वक़्त 56 दिग्कुमारियों के आसन और बाद में इंद्र का आसन कम्पायमान होता हैं, फिर देवताओं द्वारा भगवान को 1 लाख योजन ऊंचे मेरु पर्वत पे ले जाकर जन्म महोत्सव मनाया जाता हैं और 1 करोड़ 60 लाख कलशों से भगवान का अभिषेक किया जाता हैं और सूर्योदय से पहले महोत्सव खत्म करके भगवान को माता के पास लाया जाता हैं।
वहीं आज ‘ऋषभ महा-विद्या तप’ के सोलवे दिन निवि का आयोजन अच्छे से हुआ।
किशन सिंघवी और कुणाल शाह के अनुसार श्री आदेश्वर जैन श्वे. संघ, सेलम, तमिलनाडु के पदाधिकारी अध्यक्ष नेमीचंद सिंघवी, उपाध्यक्ष विजयराज ओबानी, मंत्री तेजराज ओस्तवाल, पू. अ. संघवी शांतिलाल तलावट, सुमेरमल रांका, विजयराज फोलामुथा, बाबूलाल ओबानी, उत्तम ओबानी और लेखेंद्र ओबानी मंदिरजी की रजत जयंती समारोह के लिए विनंती करने पधारे और ठाकुरद्वार संघ के पदाधिकारी और समर्पण ग्रुप के कार्यकर्ताओं के अलावा सैकड़ों श्रावक-श्राविकाएं मौजूद रहे।
ठाकुरद्वार में ललितशेखर विजय माहराज ने किया ‘तीसरी साधु भगवंतों की शरण’ की महिमा का बखान

