नीरज राज/बस्ती। बस्ती में मनरेगा के कार्यों में वित्तीय अनियमितता का बड़ा मामला सामने आया है। हर्रैया ब्लॉक की मुइली ग्राम पंचायत में नहर और नालों की खोदाई व सफाई के नाम पर कराए गए सात कार्य जांच के घेरे में आ गए हैं। जांच समिति ने 26.57 लाख रुपये के खर्च को वित्तीय अनियमितता माना है। इसके बाद जिलाधिकारी कृतिका ज्योत्स्ना ने ग्राम प्रधान हृदयलाल से 8,85,823 रुपये वसूलने का आदेश जारी किया है। खास बात यह है कि प्रधान से यह रकम भू-राजस्व के बकाये की तरह वसूली जाएगी।
बिना एनओसी नहर-नालों की खोदाई, शिकायत पर खुली पोल
मामले की शिकायत मुइली निवासी रामकिशुन पुत्र सत्तई ने की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सरयू नहर खंड-चार से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) लिए बिना ही नहर और नालों की खोदाई व सफाई के नाम पर मनरेगा से कार्य कराए गए। आरोप यह भी था कि ग्राम पंचायत ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम कराया और सरकारी धनराशि खर्च कर दी।
सात परियोजनाओं की जांच में 26.57 लाख का अनियमित खर्च
शिकायत के बाद उपजिलाधिकारी (न्यायिक) हर्रैया, वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी बस्ती, जिला लेखा परीक्षा अधिकारी और पंचायत राज विभाग के अधिकारियों की संयुक्त जांच समिति गठित की गई। समिति ने मुइली, मुइली मिश्रारी, मुइली बहरेची, मुइली राम प्रसाद, मुइली रामभवन, मुइली गोला और मुइली धोबीघाट से जुड़ी सात परियोजनाओं की जांच की।
जांच में सामने आया कि संबंधित विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त किए बिना ही नहर और नालों की खोदाई व सफाई के कार्य कराए गए। समिति ने कुल 26,57,469 रुपये के व्यय को वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में रखा।
प्रधान का जवाब भी नहीं आया काम, अब होगी वसूली
इस मामले में नौ अक्टूबर 2025 को ग्राम प्रधान हृदयलाल से स्पष्टीकरण मांगा गया था। हालांकि, प्रधान की ओर से दिया गया जवाब जांच समिति को संतोषजनक नहीं लगा। इसके बाद जिलाधिकारी ने कुल अनियमित व्यय की एक तिहाई रकम यानी 8,85,823 रुपये ग्राम प्रधान से वसूलने का आदेश दिया।
भू-राजस्व बकाये की तरह वसूली के निर्देश
डीएम ने अपर जिलाधिकारी समेत संबंधित अधिकारियों को आदेश के अनुपालन में जरूरी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। अब देखना होगा कि ग्राम पंचायत में सामने आई इस वित्तीय अनियमितता के मामले में वसूली की कार्रवाई कितनी तेजी से पूरी होती है।
