By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
सुरभि सलोनीसुरभि सलोनीसुरभि सलोनी
  • National
  • State
  • Social
  • Entertainment
  • Mumbai / Maharashtra
  • Video
  • E-Magazine
Reading: तेरापंथ के आद्य प्रणेता आचार्यश्री भिक्षु की महाप्रयाण स्थली में 11 वें पट्टधर का पावन पदार्पण
Share
Font ResizerAa
सुरभि सलोनीसुरभि सलोनी
Font ResizerAa
  • National
  • State
  • Social
  • Entertainment
  • Mumbai / Maharashtra
  • Video
  • E-Magazine
Search
  • Business
  • entertainment
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Advertise
© 2022 Surabhi Sloni All Rights Reserved.
social

तेरापंथ के आद्य प्रणेता आचार्यश्री भिक्षु की महाप्रयाण स्थली में 11 वें पट्टधर का पावन पदार्पण

Last updated: December 12, 2025 7:27 pm
Surabhi Saloni
Share
5 Min Read
SHARE
Highlights
  • द्विदिवसीय प्रवास हेतु आचार्यश्री भिक्षु समाधि स्थल में पधारे आचार्य श्री महाश्रमण
  • स्वागत में उमड़े जैन-अजैन समाज के लोग, आचार्यश्री की आशीषवृष्टि से हुए लाभान्वित
  • अनगार की भावनाओं से परिपुष्ट था गुरू भिक्षु का जीवन : युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण
  • श्रद्धालुओं ने की आराध्य की अभिवंदना

सिरियारी, पाली (राजस्थान)। जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान ग्यारहवें अनुशास्ता, अखण्ड परिव्राजक, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी धवल सेना के साथ तेरापंथ धर्मसंघ के ऐतिहासिक स्थानों की यात्रा करते-करते शुक्रवार को सिरियारी में तेरापंथ धर्मसंघ के प्रणेता, आद्य प्रवर्तक, महामना आचार्यश्री भिक्षु के समाधि स्थल में पधारे तो मानों हजारों श्रद्धालुओं के आस्था, विश्वास, उमंग व उत्साह को नवीन ऊर्जा का संचार हो गया। जिन नेत्रों ने इस अवसर को साक्षात् निहारने का सौभाग्य प्राप्त किया, वे मानों कृतार्थ हो गईं।
शुक्रवार को प्रातः विद्याभूमि राणावास से तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने मंगल प्रस्थान किया। आचार्यश्री का आज का विहार सिरियारी की ओर हो रहा था। सिरियारी तेरापंथ धर्मसंघ के प्रथम अनुशास्ता, आद्य प्रवर्तक आचार्यश्री भिक्षु की महाप्रयाण स्थली के रूप में विख्यात है। इसे अवसर का लाभ उठाने के न केवल पाली अथवा इसके आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालु सिरियारी पहुंच रहे थे, अपितु देश के कई अन्य हिस्सों से भी श्रद्धालु यहां पहुंच रहे थे। मार्ग में आचार्यश्री सुरसिंह के गुड़ा गांव में भी पधारे और वहां के लोगों को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। सिरियारी में न केवल तेरापंथी श्रद्धालु, अपितु अन्य जैन एवं जैनेतर श्रद्धालु भी महामानव के दर्शन को उत्सुक दिखाई दे रहे थे। लगभग दस किलोमीटर का विहार कर आचार्यश्री जैसे ही सिरियारी की सीमा में मंगल प्रवेश किया, श्रद्धालुओं ने बुलंद जयघोष से अपने आराध्य का अभिनंदन किया। रावले से राजपूत समाज के लोग भी आचार्यश्री के स्वागत को उपस्थित थे। विशाल जनमेदिनी पर अपने दोनों कर कमलों से आशीषवृष्टि करते हुए आचार्यश्री महामना आचार्यश्री भिक्षु समाधि स्थल संस्थान परिसर में पधारे।

आचार्यश्री सर्वप्रथम अपने आद्य अनुशास्ता को श्रद्धा प्रणति अर्पित करने आचार्यश्री भिक्षु के समाधि स्थल पर पधारे। आचार्यश्री ने समाधि स्थल पर कुछ समय के लिए ध्यानस्थ हुए मानों अपने आराध्य से मंगल आशीर्वाद प्राप्त कर रहे थे। कुछ समय उपरान्त आचार्यश्री प्रवास स्थल की ओर पधारे। सिरियारी में विराजमान संतों तथा बहर्विहार से पूज्य सन्निधि में पहुंची साध्वियों ने भी आचार्यश्री का भावभीना अभिनंदन किया।
दोदिवसीय प्रवास के लिए यहां पधारे शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने श्री भिक्षु समवसरण में उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ को पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ में 32 आगम मान्य हैं। अन्य संप्रदाय में और अन्य आगम भी माने जा सकते हैं, किन्तु तेरापंथ धर्मसंघ ने 32 आगमों को प्रमाण के रूप में मान्यता दी है। उन 32 आगमों में 11 अंग, 12 उपांग, चार मूल, चार छेद और एक आवश्यक आगम हैं। इनसे प्राप्त निर्देश या प्रेरणा सम्माननीय हो जाती है। इनमें जो भी सिद्धांत और आचार की बात मिलती है, उसको सम्मान दिया ही जाता है। दसवेंआलियं एक मूल आगम है। हमारे चारित्रात्माओं में दसवेआलियं को कंठस्थ करने का प्रयास किया जाता है। इसमें साधु समाज के लिए विभिन्न मार्गदर्शन प्राप्त होता है। हमारे धर्मसंघ के आद्य अनुशास्ता, प्रथम आचार्य आचार्यश्री भिक्षु स्वामी से जुड़े स्थान में आए हैं। राजनगर, केलवा आदि से होते हुए भिक्षु स्वामी के अंतिम जीवन से जुड़े इस सिरियारी नगर में आए हैं। भिक्षु स्वामी के जीवन को पढ़ें और मनन करें तो पता चल सकता है कि उनमें कैसे अनगार की भावना रही होगी। भगवान महावीर और आचार्यश्री भिक्षु में अनेक समानताएं मिलती हैं। उनके साधना का अपना जीवन था। युवावस्था में संत बनने वाले महात्मा थे। उनके ग्रंथों को देखें तो ज्ञानावरणीय कर्म का विशेष क्षयोपशम था।
उन्होंने चतुर्मास के दौरान अनशन किया और इस औदारिक शरीर से मुक्ति प्राप्त की थी। यहां आचार्यश्री महाप्रज्ञजी ने यहां चतुर्मास किया था। आचार्यश्री तुलसी और आचार्यश्री महाप्रज्ञजी के दर्शन करने का अवसर मिला था। आचार्यश्री ने ‘ज्योति का अवतार बाबा, ज्योति ले आया’ गीत का आंशिक संगान किया। इस प्रकार आचार्यश्री भिक्षु स्वामी की स्तवना में अनेक गीतों का आंशिक संगान किया। तीन वर्षों के अंतराल के बाद यहां आना हो गया है। मुनि मुनिव्रतजी और मुनि धर्मेशकुमारजी यहां इस समय उपस्थित हैं। अनेक साध्वियां भी यहां पहुंच गई हैं। सभी में अच्छा विकास होता रहे। आचार्यश्री के स्वागत में तेरापंथी सभा-सिरियारी के अध्यक्ष श्री नवीन छाजेड़ ने अपनी अभिव्यक्ति दी। तेरापंथ समाज ने आचार्यश्री के स्वागत में गीत का संगान किया। आचार्यश्री भिक्षु समाधि स्थल संस्थान के स्वागताध्यक्ष श्री धर्मेन्द्र महनोत ने अपनी अभिव्यक्ति दी। आचार्यश्री भिक्षु समाधि स्थल संस्थान के अध्यक्ष श्री निर्मल श्रीश्रीमाल ने अपनी अभिव्यक्ति दी। सिरियारी संस्थान की ओर से भिक्षु जैन पंचाग कैलेण्डर को आचार्यश्री के समक्ष लोकार्पित किया गया।

Sign Up For Daily Newsletter

Be keep up! Get the latest breaking news delivered straight to your inbox.

By signing up, you agree to our Terms of Use and acknowledge the data practices in our Privacy Policy. You may unsubscribe at any time.
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Copy Link Print
Share
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0
Previous Article भावना शेखर की दो पुस्तकों ‘सात यशस्वी बालक’ और ‘ मोह मोह के धागे’ के लोकार्पण का गवाह बना पटना पुस्तक मेला
Next Article रुक्मिणी वसंत की बर्थडे पोस्ट दिल को छू गई, उन्होंने फूलों, किताबों और शांत खुशियों के साथ बर्थडे मनाया

आज का AQI

Live Cricket Scores

Latest News

तेरापंथाधिशास्ता महाश्रमण के 17वें पट्टोत्सव में उमड़ा आस्था का ज्वार
social
April 26, 2026
रितेश देशमुख–जिनिलीया देशमुख ने ‘राजा शिवाजी’ रिलीज़ से पहले मंदिर में लिया आशीर्वाद
entertainment
April 26, 2026
“बेंगलुरु में गुरूभक्ति और समर्पण का संगम:
social
April 26, 2026
आचार्य महाश्रमण का 65वां जन्मोत्सव, दीक्षोत्सव व 17वां पदाभिषेक उल्लासपूर्वक संपन्न
social
April 26, 2026

Sign Up for Our Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

Follow US
© 2026 Surabhi Saloni All Rights Reserved. Disgen by AjayGupta
  • About Us
  • Privacy
  • Disclaimer
  • Terms and Conditions
  • Contact
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?