नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम अपना संबोधन देते हुए कहा कि फिलहाल देश एक निर्णायक दौर से गुजर रहा है और युवाओं को ध्यान भटकाने वाले मुद्दों में नहीं उलझना चाहिए। इस संबोधन में राष्ट्रपति ने अहिंसा, महिला सशक्तिकरण, किसानों, युवाओं और सैनिकों पर बात की।
राष्ट्रपति ने कहा, “आज हम एक निर्णायक दौर से गुजर रहे हैं. ऐसे में हमें इस बात पर जोर देना है कि हम ध्यान भटकाने वाले मुद्दों में न उलझें और न ही निरर्थक विवादों में पड़कर अपने लक्ष्यों से हटें।” कोविंद ने कहा, “आज हम अपने इतिहास के एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जो अपने आप में बहुत अलग है। आज हम कई ऐसे लक्ष्यों के काफी क़रीब हैं, जिनके लिए हम वर्षों से प्रयास करते आ रहे हैं। सबके लिए बिजली, खुले में शौच से मुक्ति, सभी बेघरों को घर और अति-निर्धनता को दूर करने के लक्ष्य अब हमारी पहुंच में हैं।”
राष्ट्रपति ने कहा कि अपना काम निष्ठा व लगन से करने वाला हर नागरिक स्वाधीनता के आदर्शों का पालन करता है। फिर चाहे वह डॉक्टर हो, नर्स हो, शिक्षक हो, लोक सेवक हो, फैक्ट्री वर्कर हो, व्यापारी हो, बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करने वाली संतान हो. हमारे जो देशवासी क़तार में खड़े रहकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं, और अपने से आगे खड़े लोगों के अधिकारों का सम्मान करते हैं, वे भी हमारे स्वाधीनता सेनानियों के सपनों का भारत बनाते हैं।
स्वतंत्रता दिवस की पूर्वसंध्या पर राष्ट्रपति ने कहा, निर्णायक दौर से गुजर रहा है देश

