विकास धाकड़/सूरत {गुजरात}। तेरापंथ भवन, सिटीलाइट में आयोजित मासखमण-तप अभिनन्दन रामारोह में उपस्थित विशाल धर्म परिषद को सम्बोधित करते हुए साध्वी प्रोफेसर डॉ मंगलप्रज्ञा जी ने कहा- भगवान महावीर का उपदेश है- आत्मनिर्जरा के लिए तप करना चाहिए। तपस्या आत्मशुद्धि का प्रवर साधन है। तप के द्वारा आत्म प्रभावना, संघ प्रभावना होती है संघ की नींवें मजबूत बनती है। यश कीर्ति और प्रशंसा के लिए तप की आराधना न हो। चातुर्मास का समय ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप की आराधना के लिए श्रेष्ठ है। हर सदस्य सामर्थ्यानुसार खुद को तप में नियोजित करे ।
प्रो. साध्वी श्री मंगलप्रज्ञा जी की प्रेरणा से हर्ष भोगर ने 30, सोहनी देवी डोसी ने 29, गीता बम्ब ने 29 और श्री रणजीत जी माली ने 31 दिवसीय मासखमण की साधना की एवं गुलाब भंसाली ने धर्मचक्र तप सम्पन्न किया। तपस्वियो के अभिनन्दन में पारिवारिक जन ने अलग- अलग गीत का संगान कर तप वर्धापन किया। रणजीत भंसाली का परिचय तेरापंथ सभा मंत्री महेन्द्र जी गांधी मेहता, हर्ष भोगर का परिचय महिला मंडल पूर्व अध्यक्षा चन्दा भोगर, गीता बम्ब का परिचय तेयुप उपाध्यक्ष मुकेश दुधोड़िया एवं सोहनी देवी डोसी का परिचय महिला मंडल उपाध्यक्षा सीमा भोगर ने प्रस्तुत किया । साध्वी प्रमुखा श्री द्वारा प्राप्त संदेश का वाचन तेरापंथ सभा अध्यक्ष हजारीमल भोगर एवं अभिनंदन पत्र का वाचन मेनेजिंग ट्रस्टी बाबुषाल जी भोगर ने किया। धर्मचक्र तप अभिनन्दन पत्र का वाचन सभा के निवर्तमान अध्यक्ष मुकेश बेद ने किया।
तपस्वियों के वर्धापन क्रम में हर्ष के दादा भीखमचन्द भोगर ,भाई भाविन, मां निर्मला एवं भाभी रुतवी ने शुभकामनाएं दीं। गीता बम्ब के पुत्र दक्ष एवं नेहा सिसोदिया ने गीत एवं अभिनंदन- स्वर प्रस्तुत किए। गुलाब भंसाली ने मंगलभावना व्यक्त की। महिला मंडल की बहनो द्वारा “कार्टून शो” की शानदार प्रस्तुति ने परिषद् का मन मोहा। साध्वी सुदर्शन प्रभा, साध्वी अतुलयशा, साध्वी डॉ राजुल प्रभा, साध्वी डॉ चैतन्य प्रभा एवं साध्वी डॉ शोर्य प्रभा ने “सिटी लाइट में तप की लाइमलाइट” की प्रस्तुति दी। तेरापंथ सभा एवं सभी संस्थाओं ने साहित्यादि द्वारा तपस्वियों का सम्मान किया। तप द्वारा तप अभिनंदन आहाँन पर अनेक भाई-बहनों ने तेले का संकल्प लिया।संचालन साध्वी सुदर्शन प्रभा ने किया।
सूरत में चार मासखमण साधक साधिकाओं का अभिनन्दन समारोह संपन्न
Highlights
- आत्मा प्रभावना और आत्मोत्कर्ष के लिए हो तप साधना: प्रोफेसर साध्वी मंगलप्रज्ञा

