महेश प्रताप/बस्ती (उत्तर प्रदेश)। बारिश के मौसम में तेज खिलखिलाती धूप जहां किसानों को नुकसान पहुंचा रही है, वहीं आम लोग उमस भरी तेज गर्मी से परेशान हैं। सावन में तेज बारिश हो रही थी वह भी गायब हो गई है और किसानों में बेचैनी व तपती धूप से लोग परेशान हैं। खेतों में धान सूखने लगे हैं जिससे किसान परेशान हैं तो बिजली की सहायता से अपने खेतों की सिंचाई कर रहे हैं, बावजूद इसके फसल अच्छी हो, ऐसी संभावना बहुत कम है। सुबह होते ही आसमान में खिल रही धूप जहां किसानों के छाती पर हथौड़े की तरह चोट पहुंचा रही है. वहीं आम लोग उमस भरी तेज गर्मी से परेशान हैं. आधा सावन महीना बीत चुका है लेकिन अभी तक बारिश मानसून की बेरुखी से अब जिले में धान की फसल पर असर पड़ता दिखने लगा है. धान अब सूखने के कगार पर आ गए हैं। धूप से बचने के लिए पेड़ के नीचे सुस्ता रहे हैं लोग, फसल का ठिकाना नहीं, यह देखा जा सकता है कि सुबह से देर रात्रि तक किसान व उनके परिवार आसमान को निहार रहे हैं।तापमान दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, ऐसे में कुछ दिन और बारिश नहीं हुई तो किसानों के धान सूख जाएंगे। किसान चाहकर भी धान की उपज नहीं कर सकेंगे, वहीं किसानों की गन्ने की फसल सूख रही है।
उल्लेखनीय है कि किसानों की मुख्य फसल धान की खेती ही है एवं धान की खेती जिले में बारिश पर ही आधारित है, ऐसे में बारिश नहीं होने से किसान आसमान की ओर टकटकी लगाये हैं. कुछ संपन्न किसान पंप सेट के सहारे धान रोपनी में जुटे हैं, लेकिन अधिकांश किसान आज भी बारिश का इंतजार कर रहे हैं. जो रोपनी हुई भी है, वह बारिश नहीं होने से सूखने के कगार पर है। धान की खेती किसानों की जीविका का मुख्य आधार भी है, इसके अच्छे पैदावार से किसानों के परिवार का गुजर-बसर एवं बच्चों की पढ़ाई होती है। यदि बारिश नहीं हुई तो किसानों को काफी समस्या का सामना करना होगा।
सावन के महीने में गर्मी और कड़ाके की धूप होने के कारण हो रही धान की फसल चौपट

