भायंदर (मुंबई)। शासनश्री साध्वी श्री विद्यावतीजी ‘द्वितीय’ ठाणा 5 के सान्निध्य में आध्यात्मिक गंगा प्रवाहित हो रही है। ध्यान दिवस के उपलक्ष्य में प्रेक्षाध्यान की प्रशिक्षिकाओं ने प्रेक्षा गीत का संगान किया। साध्वी प्रेरणाश्रीजी ने ध्यान एंव अनुप्रेक्षा का प्रयोग करवाया।
साध्वी प्रियंवदाजी ने पर्युषण पर्व का महत्व बताते हुए कहा-पर्युषण पर्व आमोद प्रमोद व मनोरंजन का पर्व नहीं अपितु त्याग एवं संयमाराधना का पर्व है। पर्युषण साधना का एक उपक्रम ध्यान भी है। जैनाचार्य श्री भद्रबाहु ने महाप्राण ध्यान का उत्कृष्ट साधना की थी। ध्यान से अनेक सिद्धियां एवं लब्धियाँ प्राप्त हो सकती हैं।
साध्वी श्री विद्यावतीजी ने कहा-प्रेक्षाध्यान एक वैज्ञानिक पध्दति है। जिसमें श्वास प्रेक्षा,चैतन्य केंद्र प्रेक्षा, लेश्याध्यान आदि का प्रयोग करवाया जाता है। ध्यान अपने भीतर प्रवेश करने का द्वार है। साध्वीश्री जी ने भगवान महावीर के सत्ताईस भवों के क्रम को आगे बढ़ाया। पर्युषण पर्व एक आध्यात्मिक पर्व है। आत्मा के आस पास रहने का पर्व है। यानी भीतर झाँकने का पर्व है।
आज मीरा-भायंदर के विधायक नरेन्द्र मेहता ने साध्वी वृंद के दर्शन कर आहलाद प्रकट किया एंव उपस्थित जनसमूह को पर्युषण एवं संवत्सरी महापर्व की शुभकामनाएं प्रेषित की। मेहता के साथ नगरसेवक भगवतीलालजी शर्मा एवं ध्रुवकिशोर पाटिल भी उपस्थित थे। साध्वी श्री प्रियंवदाजी ने कार्यक्रम कुशल संचालन किया।
पर्युषण पर्व त्यागमय अलौकिक पर्व है: साध्वी श्री

