नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 26 जुलाई 2025 को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की फेज-13 परीक्षा रद्द होने को लेकर सरकार की नाकामी पर सवाल उठाए। गांधी ने इसे न केवल लापरवाही, बल्कि सरकार के “विफल और सड़े हुए सिस्टम” का परिणाम करार दिया। उनके इस बयान ने देशभर में पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर चल रही बहस को और हवा दी है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा, “SSC फेज़ 13 की परीक्षा में सामने आ रही गड़बड़ियां सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि मोदी सरकार के विफल और सड़े हुए सिस्टम का आईना हैं। 400–500 किलोमीटर दूर से परीक्षा देने पहुंचे युवाओं को केंद्र पर जाकर पता चलता है कि उनकी परीक्षा रद्द कर दी गई है। सिस्टम की खामियों के कारण लगातार पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने से युवाओं का भविष्य बर्बाद हो रहा है।”
उन्होंने आगे कहा कि पिछले 10 वर्षों में 80 से अधिक पेपर लीक के मामलों ने 85 लाख से ज्यादा छात्रों के सपनों को चकनाचूर किया है। गांधी ने इसे “संगठित अपराध” करार देते हुए कहा कि यह सरकार के निकम्मेपन, प्रशासनिक भ्रष्टाचार और परीक्षा माफियाओं के गठजोड़ का नतीजा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि युवाओं के सपनों के साथ यह विश्वासघात बंद होना चाहिए। पेपर लीक का इतिहास और हालिया घटनाएंपेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताएं भारत में लंबे समय से एक गंभीर समस्या रही हैं। हाल के वर्षों में, NEET-UG, UGC-NET, और विभिन्न राज्य-स्तरीय भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं। 2024 में NEET-UG पेपर लीक ने देशभर में व्यापक आक्रोश पैदा किया था, जिसमें लगभग 24 लाख छात्र प्रभावित हुए थे। राहुल गांधी ने उस समय भी सरकार की प्रतिक्रिया की आलोचना की थी, यह कहते हुए कि सरकार ने एक नए कानून के पीछे छिपकर इसे समाधान बताया, जो बाद में विफल साबित हुआ।
SSC फेज-13 परीक्षा का रद्द होना भी इसी कड़ी का हिस्सा है। इस परीक्षा में शामिल होने के लिए हजारों युवा सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा कर परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे, लेकिन उन्हें वहां जाकर पता चला कि परीक्षा रद्द कर दी गई है। इससे न केवल उनकी मेहनत और समय बर्बाद हुआ, बल्कि आर्थिक और मानसिक बोझ भी बढ़ा। राहुल गांधी ने पहले भी कई मौकों पर पेपर लीक के लिए मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। फरवरी 2024 में, उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा था कि सरकार ने छात्रों के सपनों को “ग्रहण” लगा दिया है।
SSC फेज़ 13 की परीक्षा में सामने आ रही गड़बड़ियां सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि मोदी सरकार के विफल और सड़े हुए सिस्टम का आईना हैं।
400–500 किलोमीटर दूर से परीक्षा देने पहुंचे युवाओं को केंद्र पर जाकर पता चलता है कि उनकी परीक्षा रद्द कर दी गई है। सिस्टम की खामियों के कारण लगातार… pic.twitter.com/hcxk0HQUYH
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) July 26, 2025
उन्होंने दावा किया कि पिछले सात वर्षों में 70 से अधिक पेपर लीक के मामलों ने 2 करोड़ से अधिक छात्रों का भविष्य प्रभावित किया है। जून 2024 में, NEET और UGC-NETपरीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर गांधी ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी “पेपर लीक को रोकने में असमर्थ हैं या रोकना नहीं चाहते।” उन्होंने इसे “राष्ट्रीय संकट” करार दिया और आरोप लगाया कि भाजपा और उसकी मूल संगठन RSS ने शैक्षणिक संस्थानों पर कब्जा कर लिया है, जिसके कारण पेपर लीक की घटनाएं रुक नहीं रही हैं। राहुल गांधी ने इस मुद्दे को संसद में उठाने का वादा किया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष सरकार को लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं देगा। इसके अलावा, कांग्रेस ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक “पुख्ता योजना” पेश करने की बात कही है। गांधी ने यह भी मांग की है कि पेपर लीक के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और सरकारी मशीनरी, भ्रष्ट अधिकारियों, और निजी प्रिंटिंग प्रेसों के “आपराधिक गठजोड़” को खत्म किया जाए।
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना की और कहा कि मोदी सरकार एक भी परीक्षा को ठीक ढंग से आयोजित नहीं कर पा रही है। उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में 15 राज्यों में 41 पेपर लीक की घटनाओं का हवाला देते हुए पूछा कि क्या पेपर लीक नौकरियां न देने का बहाना बन गया है। केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय ने पेपर लीक की घटनाओं पर कई बार सफाई दी है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जुलाई 2024 में संसद में दावा किया था कि पिछले सात वर्षों में पेपर लीक का कोई सबूत नहीं मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने 240 से अधिक परीक्षाएं आयोजित की हैं, जिनमें 5 करोड़ से अधिक छात्रों ने आवेदन किया और 4.5 करोड़ से अधिक ने भाग लिया। हालांकि, विपक्ष ने इसे “राजनीतिक हथकंडा” करार देते हुए कहा कि सरकार जमीनी हकीकत से दूर है। उत्तर प्रदेश में पुलिस भर्ती परीक्षा रद्द होने के बाद, योगी आदित्यनाथ सरकार ने दोबारा परीक्षा कराने का आदेश दिया और उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती और प्रोन्नति बोर्ड के अध्यक्ष को हटा दिया। फिर भी, विपक्ष का कहना है कि ये कदम पर्याप्त नहीं हैं और सिस्टम में व्यापक सुधार की जरूरत है।

