जयप्रकाश रंजन।।
Universal Basic Income, इस बात की चर्चा बेहद गर्म है कि तीन दिन बाद पेश होने वाले अंतरिम बजट में यूबीआई (UBI) योजना की घोषणा हो सकती है। इतिहास की बात करें तो मोदी सरकार ने दो वर्ष पहले आर्थिक सर्वे में एक तरह से यूबीआई का एक रोडमैप पेश कर दिया था। जानकार मानते हैं कि अगर वित्त मंत्री पीयूष गोयल इसकी घोषणा करते हैं तो यह उस रोडमैप के बहुत करीब होगा। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि इस योजना की घोषणा जितनी आसान हो सकती है, उसे भारत जैसे विशाल देश में लागू करना उतना ही चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
बड़ी सबसिडी हो सकती है खत्म
फिच समूह की भारतीय शाखा इंडिया रेटिंग्स के चीफ इकोनॉमिस्ट सुनील सिन्हा का कहना है कि यूबीआई को लागू करते हुए कई बड़ी सबसिडी को खत्म किया जा सकता है। अगर सिर्फ छोटे व सीमांत किसानों को 10 हजार रुपये प्रति फसल प्रति एकड़ हर साल दिया जाए, तो देश पर सालाना 1.50 लाख करोड़ रुपये का बोझ आएगा।
यूरोप के देशों में लागू
गांगुली उोग चेंबर सीआईआई (CIC) में चीफ इकोनॉमिस्ट बिदिशा गांगुली का कहना है कि तमाम सबसिडी की जगह इस तरह की स्कीम लागू करना एक बेहतर व किफायती विकल्प दिखता है, लेकिन इसमें आंकड़ों की दिक्कत भी आएगी और लक्षित समुदाय की पहचान करना भी एक बड़ी चुनौती होगी। अभी तक कुछ गिने-चुने देशों, जिनमें यूरोप के बेहद संपन्न देश शामिल हैं, में इस तरह की योजना है। भारत में किसानों के लिए यह योजना बढ़िया समाधान हो सकती है।
2016-17 के आर्थिक सर्वेक्षण में था जिक्र
आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 में यूबीआई का संकेत पहली बार केंद्र सरकार की तरफ से दिया गया था। इसमें आंकड़ों के आधार पर साबित किया गया था कि सबसिडी देने की मौजूदा स्कीमों की राह में आने वाली तमाम बाधाओं को यह दूर कर सकता है। सरकार कुल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का तकरीबन 5.2 फीसद हिस्सा कई तरह की सबसिडी में देती है। यूबीआई लागू करने के बाद इनमें से कई तरह की स्कीमों को लागू करने की जरूरत नहीं रहेगी। इसमें कहा गया था कि केंद्र की मुख्य व सहायक योजनाओं की संख्या 950 है। इनमें से 50 फीसद 25 साल से भी पुरानी हैं। यूबीआई के बाद इनमें से अधिकांश की जरूरत नहीं रहेगी।
जानिए क्या है यूबीआई?
यूबीआई एक निश्चित आय है जो देश के सभी नागरिकों को सरकार से मिलती है। इस आय के लिए किसी तरह का काम करने अथवा पात्रता होने की शर्त नहीं रहती और आदर्श स्थिति है कि समाज के प्रत्येक सदस्य को जीवन-यापन के लिए न्यूनतम आय का प्रावधान होना चाहिए।
क्यों होनी चाहिए लागू?
वैश्विक स्तर पर असमानता तेजी से बढ़ रही है। इसी के साथ बेरोजगारी भी बढ़ रही। कुछ विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि मौजूदा व्यवस्था को सहारा नहीं मिला तो असमानता और बेरोजगारी सबसे बड़ी चुनौती बन जाएगी।
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