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जॉर्ज फर्नांडिस: मजदूर नेता से रक्षा मंत्री तक का सफर

Last updated: January 29, 2019 11:28 am
Surabhi Saloni
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6 Min Read
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भारत के पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस का मंगलवार को निधन हो गया। वाजपेयी सरकार के दौरान जॉर्ज फर्नांडिस देश के रक्षामंत्री थे। जॉर्ज फर्नांडीस सत्ता में रहे या विपक्ष में, हमेशा बेझिझक अपनी बात कहते रहे। पूर्व ट्रेड यूनियन नेता, राजनेता, पत्रकार, कृषिविद फर्नांडीस जनता दल के प्रमुख सदस्य भी थे। उन्होंने ही समता पार्टी की स्थापना की थी। अपने राजनीतिक करियर में उन्होंने रेलवे, उद्योग, रक्षा, संचार जैसे अहम मंत्रालय संभाले। जॉर्ज फर्नांडीस ने 1967 से 2004 तक एक नहीं बल्कि 9 बार लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की।

यहां जानें उनके जीवन के बारे में विस्तार से- 

– जॉर्ज फर्नांडिस का जन्म 3 जून, 1930 को कर्नाटक के मंगलुरु में हुआ। मंगलुरु में पले-बढ़े फर्नांडिस जब 16 साल के हुए तो एक क्रिश्चियन मिशनरी में पादरी बनने की शिक्षा लेने भेजे गए। लेकिन यहां उनका मन नहीं लगा। इसके बाद वह 1949 में महज 19 साल की उम्र में रोजगार की तलाश में बंबई चले आए।

– इस दौरान वह लगातार सोशलिस्ट पार्टी और ट्रेड यूनियन आंदोलन के कार्यक्रमों में हिस्सा लेते थे। फर्नांडिस की शुरुआती छवि एक जबरदस्त विद्रोही की थी। उस वक्त फर्नांडिस समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया से प्रेरणा लिया करते थे।

– 50 और 60 के दशक में जॉर्ज फर्नांडिस ने कई मजदूर हड़तालों और आंदोलनों का नेतृत्व किया।

– रेलवे हड़ताल
लेकिन उन्हें पूरे देश ने 1970 के दशक में तब जाना जब उन्होंने रेल कर्मचारियों की ऐतिहासिक हड़ताल का नेतृत्व किया। वे ऑल इंडिया रेलवे मेन्स फ़ेडरेशन के अध्यक्ष थे और उनके आह्वान पर 1974 में रेलवे के 15 लाख कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। रेलवे की हड़ताल से पूरा देश थम सा गया। जब कई और यूनियनें भी इस हड़ताल में शामिल हो गईं तो सत्ता के खंभे हिलने लगे। इस वक्त तक वह बंबई के सैकड़ों-हजारों गरीबों के मसीहा बन चुके थे।

1967 में जीता लोकसभा चुनाव
– 1967 के लोकसभा चुनावों में वे उस समय के बड़े कांग्रेसी नेताओं में से एक एसके पाटिल के सामने मैदान में उतरे। बॉम्बे साउथ की इस सीट से जब उन्होंने पाटिल को हराया तो लोग उन्हें ‘जॉर्ज द जायंट किलर’ भी कहने लगे। इस समय तक जॉर्ज के युवा मज़दूर नेता के रूप में अपनी पहचान बना चुके थे। इसके बाद राजनीति के क्षेत्र में यह काफी तेजी से सीढ़ियां चढ़ने लगे थे।

– आखिरी बार वो अगस्त 2009 से जुलाई 2010 के बीच तक राज्यसभा सांसद रहे थे.

वैवाहिक जीवन
– 1971 में उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री हुमायूं कबीर की बेटी लीला कबीर से विवाह किया था।

– जॉर्ज फर्नांडिस ने 1994 में जनता दल छोड़कर समता पार्टी का गठन कर लिया था।

– 1999 में  फिर जनता दल का विभाजन
इसके बाद फिर 1999 में  एक बार और जनता दल का विभाजन हो गया। इस दौरान कुछ नेता जॉर्ज फर्नांडिस की समता पार्टी के साथ मिल गए और पार्टी का नाम जनता दल (यूनाइटेड) रखा। वहीं बाकी बचे नेताओं ने एचडी देवेगौड़ा के नेतृत्व में जनता दल (सेक्युलर) का गठन किया।

1998 से 2004 तक रक्षा मंत्री रहे
जॉर्ज फर्नांडिस ने एनडीए के शासन काल में 1998 से 2004 तक रक्षा मंत्री का पद संभाला था। पाकिस्तान के साथ कारगिल युद्ध और पोखरण में न्यूक्लियर टेस्ट के दौरान फर्नांडिस ही रक्षा मंत्री थे।

– जॉर्ज फ़र्नांडीस को तहलका मामले के सामने आने के बाद रक्षा मंत्री के पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था।

गिरफ्तारी
तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जून 1975 में इमरजेंसी की घोषणा कर दी तो जॉर्ज इंदिरा हटाओ लहर के एक नायक बनकर उभरे। इस दौरान वह अंडरग्राउंड हो गए थे। ठीक एक वर्ष बाद उन्हें मशहूर बड़ौदा डाइनामाइट केस के अभियुक्त के रूप में गिरफ्तार कर लिया गया।

संचार मंत्री और उद्योग मंत्री
– वे मोरारजी देसाई के मंत्रिमंडल में संचार मंत्री के तौर पर शामिल हुए और कुछ महीनों बाद उन्हें उद्योग मंत्री बना दिया गया। उद्योग मंत्री रहते उन्होंने निवेश नियमों के उल्लंघन के चलते आईबीएम और कोका कोला को भारत छोड़ने का आदेश दिया था।

रेल मंत्री
– इसके बाद 1990 में वीपी सिंह के मंत्रिमंडल में उन्हें रेल मंत्री बनाया गया। कोंकण रेलवे प्रोजेक्ट में उनकी प्रमुख भूमिका मानी जाती है।

– जॉर्ज फर्नांडीस ने 1994 में समता पार्टी का गठन किया।

– 1995 में भारतीय जनता पार्टी के साथ चुनावी गठबंधन किया।

– जॉर्ज फर्नांडिस हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, मराठी, कन्नड़, उर्दू, मलयाली, कोंकणी भाषाओं के जानकार थे।

– 2009 और 2010 के दौरान वह बिहार से राज्यसभा के सदस्य रहे।

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