नई दिल्ली:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नए कैबिनेट मंत्री बने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की टीम अगले पांच साल सरकार चलाएगी। इन दोनों नेताओं ने ही मिलकर बीते दो दिन में नई मंत्रिपरिषद के नाम तय किए। अरुण जेटली व सुषमा स्वराज जैसे वरिष्ठ नेताओं की गैर मौजूदगी में मोदी ने राज्यों के अनुभवी नेताओं व युवाओं को मौका देने के साथ क्षेत्रीय, जातीय व सामाजिक समीकरणों को पूरी तवज्जो दी है।
पदोन्नति में भी साधे गए समीकरण
गिरिराज सिंह, गजेंद्र सिंह शेखावत, महेंद्रनाथ पांडे को अपने अपने राज्य के राजनीतिक व सामाजिक समीकरणों से पदोन्नत होने का इनाम मिला। हालांकि अश्विनी कुमार चौबे, जनरल वी के सिंह, अर्जुन राम मेघवाल, कृष्णपाल गुर्जर, पुरुषोत्तम रूपाला, संजीव बालियान, बाबुल सुप्रियो, साध्वी निरंजन ज्योति, रामदास आठवले, राव साहेब दानवे व फग्गन सिंह कुलस्ते को मोदी की दूसरी पारी में अपने क्षेत्रीय व सामाजिक समीकरणों के चलते सरकार में शामिल होने में तो सफल रहे, लेकिन पदोन्नति नहीं हुई।
उत्तर प्रदेश व कर्नाटक के जातीय समीकरण को साधा
उत्तर प्रदेश में महेंद्रनाथ पांडे को कैबिनेट दर्जा देकर राज्य में जातीय व सामाजिक संतुलन साधा गया है। अब राज्य में नए अध्यक्ष की नियुक्ति की जानी है। ऐसे में सरकार से बाहर रहे महेश शर्मा के नाम पर विचार हो सकता है। पूर्वी क्षेत्र से व राजपूत मुख्यमंत्री होने से प्रदेश अध्यक्ष पश्चिम व ब्राह्मण को मिल सकता है। कर्नाटक में सदानंद गौड़ा व प्रहलाद जोशी को मंत्री बनाकर राज्य के सामाजिक समीकरण साधे गए हैं।
हरियाणा व उत्तराखंड में संतुलन की राजनीति
हरियाणा में मिली भारी जीत के बाद भाजपा ने गैर जाट गूर्जर, दलित व पिछड़ा समीकरण साधा है और जाट राजनीत को तवज्जो नहीं दी। उत्तराखंड में पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक व झारखंड में पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा को लाकर दोनों राज्यों के सामजिक समीकरण बनाए गए हैं। उत्तराखंड में राजपूत मुख्यमंत्री व झारखंड में गैर आदिवासी मुख्यमंत्री है। उमा भारती की जगह प्रहलाद पटेल को मंत्री बनाकर पिछड़ा (लोध) चेहरे को तव्जजो दी गई है। कुछ राज्यों में विकल्प सीमित होने से बड़ बदलाव नही हो सके हैं।
राजनाथ नंबर दो की भूमिका में
राष्ट्रपति भवन कोर्टयार्ड में अब तक के सबसे भव्य शपथ ग्रहण समारोह शुरू होने लगभग एक घंटे पहले अमित शाह के पहुंचने और तीसरे नंबर की कुर्सी पर बैठने के साथ ही तय हो गया था कि जेटली के बाद सुषमा स्वराज भी सरकार से बाहर रहेंगी। बाद में राजनाथ सिंह दूसरे नंबर की कुर्सी पर बैठे और समारोह में पहुंची सुषमा स्वराज विशिष्ट अतिथियों में मंच के नीचे। पहली पंक्ति की दूसरे कोने पर बैठे एस जयशंकर की उपस्थिति चौंकाने वाली थी। जो सरकार से बाहर हुए उनको छोड़कर नई सरकार में कुछ को पदोन्नति मिली और कुछ को जस का तस का दर्जा मिला।
17 नेता पहली बार केंद्र में मंत्री बने
भाजपा व राजग की भारी भरकम जीत का असर मोदी की दूसरी पारी में साफ दिखा। 58 सदस्यीय मंत्रिपरिषद में 17 तो पहली बार केंद्र में मंत्री बने। इनमें आठ तो पहली बार सांसद बने हैं। भाजपा के राज्यों में हुए विस्तार व चुनावी सफलता से भी कई नए चेहरे सरकार में दिखे हैं।

