लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस पर बहुजन समाज के प्रणेता और बी.एस.पी. के संस्थापक मान्यवर कांशीराम के प्रति घोर जातिवादी और द्वेषपूर्ण रवैये का आरोप लगाया है। अपने ट्विटर हैंडल पर एक तीखे बयान में मायावती ने सपा और कांग्रेस की कांशीराम के प्रति कथित दोहरी नीति और छलावे की कड़ी आलोचना की। मायावती ने कहा कि सपा और कांग्रेस ने हमेशा कांशीराम के मिशनरी आत्म-सम्मान और स्वाभिमान आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की।
उन्होंने विशेष रूप से सपा प्रमुख की ओर से कांशीराम के परिनिर्वाण दिवस (9 अक्टूबर) पर संगोष्ठी आयोजित करने की घोषणा को “मुंह में राम, बगल में छुरी” वाली कहावत का प्रतीक बताया। मायावती ने आरोप लगाया कि सपा ने न केवल कांशीराम के जीते-जी उनकी पार्टी के साथ धोखा किया, बल्कि बी.एस.पी. सरकार द्वारा स्थापित कांशीराम के नाम पर बने संस्थानों, जैसे कासगंज के कांशीराम नगर जिले, विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और अस्पतालों के नाम भी सपा सरकार ने अपनी “जातिवादी सोच और राजनीतिक द्वेष” के चलते बदल दिए।
मायावती ने आगे कहा कि कांशीराम के निधन पर उत्तर प्रदेश में सपा सरकार ने एक दिन का भी राजकीय शोक घोषित नहीं किया, जबकि पूरा देश और खासकर उत्तर प्रदेश शोक में डूबा था। इसी तरह, केंद्र में रही कांग्रेस सरकार ने भी राष्ट्रीय शोक की घोषणा नहीं की। उन्होंने सपा और कांग्रेस पर संकीर्ण राजनीति और वोटों के स्वार्थ के लिए कांशीराम को समय-समय पर स्मरण करने का दिखावा करने का आरोप लगाया। मायावती ने अपने बयान में लोगों से सपा और कांग्रेस जैसी “जातिवादी और संकीर्ण सोच” वाली पार्टियों से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि कांशीराम का मिशन दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्गों को शोषित से शासक वर्ग बनाने का था, जिसे बी.एस.पी. निरंतर आगे बढ़ा रही है।
मायावती का सपा-कांग्रेस पर तीखा हमला, कांशीराम के प्रति दिखावा और जातिवादी रवैये का आरोप

