लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने आज लखनऊ के कांशीराम स्मारक स्थल पर विशाल महारैली को संबोधित किया। यह रैली BSP संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि पर आयोजित की गई, जिसमें लाखों कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भीड़ उमड़ी। इस रैली को आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले BSP के लिए “शक्ति प्रदर्शन” और “राजनीतिक पुनरुत्थान की शुरुआत” माना जा रहा है।
अकेले मैदान में उतरेगी BSP
रैली के दौरान मायावती ने अपने राजनीतिक इरादे स्पष्ट करते हुए कहा कि “बहुजन समाज पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी, किसी गठबंधन पर निर्भर नहीं रहेगी।” उन्होंने कहा कि गठबंधन की राजनीति से दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्गों का भला नहीं हुआ, इसलिए BSP अब स्वतंत्र रूप से अपने बल पर सत्ता हासिल करेगी।
सपा और कांग्रेस पर तीखा वार
मायावती ने अपने भाषण में सपा (समाजवादी पार्टी) और कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। उन्होंने सपा को “दोगली पार्टी” बताते हुए आरोप लगाया कि सत्ता में आते ही सपा “दलित विरोधी रवैया” अपनाती है। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि “संविधान हाथ में लेकर नाटक करने वाली कांग्रेस ने कभी बाबा साहेब अंबेडकर के सिद्धांतों को दिल से नहीं अपनाया।” उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों पार्टियाँ केवल वोट बैंक की राजनीति करती हैं, लेकिन समाज के कमजोर वर्गों के विकास में उनकी कोई वास्तविक रुचि नहीं है।
योगी सरकार को आंशिक श्रेय
दिलचस्प रूप से मायावती ने अपने भाषण में योगी आदित्यनाथ सरकार की कुछ नीतियों की तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने कांशीराम स्मारक और अन्य दलित प्रतीक स्थलों के रखरखाव में “कहीं उपेक्षा नहीं दिखाई”, जबकि पिछली सरकारों में ऐसे स्थलों की अनदेखी की जाती थी।
भतीजे आकाश आनंद को दी अहम भूमिका
मायावती ने पहली बार अपने भतीजे आकाश आनंद के साथ मंच साझा किया और उन्हें पार्टी का भविष्य बताया। उन्होंने कहा कि “आकाश आनंद युवा वर्ग को जोड़ने में अहम भूमिका निभाएंगे।” रैली में आकाश आनंद ने भी भावनात्मक भाषण दिया और BSP कार्यकर्ताओं से “जनाधार बढ़ाने और संगठन को मजबूत करने” का आह्वान किया। दलित आरक्षण और सामाजिक न्याय पर जोर मायावती ने कहा कि देश की तीनों बड़ी पार्टियाँ – BJP, कांग्रेस और सपा – “आरक्षण के मुद्दे पर गंभीर नहीं हैं।” उन्होंने कहा कि दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों को उनका संवैधानिक हक दिलाने के लिए BSP ही सच्चे अर्थों में संघर्ष कर रही है।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा –
“अब वक्त आ गया है कि बहुजन समाज के लोग अपनी ताकत को पहचानें और सत्ता की चाबी अपने हाथ में लें।”
भारी भीड़ से उत्साहित BSP
पार्टी ने दावा किया कि रैली में 5 लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया। लखनऊ और आसपास के जिलों – सीतापुर, हरदोई, बाराबंकी, कानपुर, और अंबेडकरनगर -से बसों और ट्रेनों के माध्यम से हजारों कार्यकर्ता पहुंचे। रैली स्थल के आसपास लंबा ट्रैफिक जाम भी देखने को मिला। भीड़ के उत्साह से BSP नेताओं में नई ऊर्जा दिखी।
राजनीतिक संदेश और भविष्य की रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह रैली मायावती का “राजनीतिक पुनरुत्थान मिशन” है। सपा और कांग्रेस से दूरी बनाते हुए उन्होंने BJP के प्रति “मध्यम रुख” अपनाकर एक संतुलित रणनीति का संकेत दिया है। यह कदम उन दलित और पिछड़े वोटरों को वापस लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जो हाल के वर्षों में BSP से दूर हो गए थे।
लखनऊ में मायावती की शक्ति प्रदर्शन रैली: अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान, सपा-कांग्रेस पर तीखा हमला

