नई दिल्ली:दिल्ली में कोरोना के लगातार बढ़ते मामलों के मद्देनजर दिल्ली उच्च न्यायालय की तरफ से एक अहम फैसला लिया गया है। उच्च न्यायालय समेत दिल्ली की सातों जिला अदालतों में कागज के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इस बाबत दिल्ली उच्च न्यायालय की तरफ एक सर्कुलर जारी किया गया है।
उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार की तरफ से मंगलवार को जारी सर्कुलर में कहा गया है कि दिल्ली से संबंधित सभी अदालतों में नोटिस, समन और डाक पर बहरहाल पूरी तरह रोक लगाई जा रही है। दिल्ली में स्थिति सामान्य होने तक यह रोक जारी रहेगी। सभी अदालतें ये सभी कार्य ई-माध्यम से करें। सर्कुलर में कहा गया है कि सभी अदालतों को आदेश का सख्ती से पालन करना होगा। इससे अदालतों को कोरोना जैसे खतरे से बचाया जा सकता है। साथ ही इस मुश्किल समय में अन्य विभागों पर पड़ रहे अतिरिक्त भार को भी कम किए जाने का यह प्रयास है।
ई-मेल, व्हाट्सएप का करें इस्तेमाल : सर्कुलर में अदालतों के अधिकारियों को कहा गया है कि जैसे जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के लिए ई-मेल व व्हाट्सएप का प्रयोग हो रहा है, उसी तरह अन्य मामलों में भी इसे लागू किया जाए। ई-मेल पर आदेश, समन, नोटिस या डाक का आदान-प्रदान किया जाए।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस के संक्रमण की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। रोजाना कोविड-19 संक्रमण के औसतन 1250 नए मामले सामने आ रहे हैं। दिल्ली में एक जून से महज आठ दिन में 10 हजार नए मामले सामने आए हैं। जबकि पहले 10 हजार तक मामले पहुंचने में 79 दिन लगे थे। दिल्ली सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के विश्लेषण से यह बात सामने आई है।
दिल्ली में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले 13 दिनों में 10,000 से 20,000 हुए थे। दिल्ली में इस संक्रमण का पहला मामला एक मार्च को सामने आया था, जब पूर्वी दिल्ली का एक व्यापारी इटली से लौटने के बाद कोविड-19 संक्रमित पाया गया। दिल्ली सरकार के आंकड़े दर्शाते हैं कि 18 मई तक राष्ट्रीय राजधानी में रोजाना औसतन करीब 127 नए मरीज सामने आने के साथ कोविड-19 के कुल मामले 10054 हो गए थे। अगले 13 दिनों में यह आंकडा 19,844 हो गया। जिन मरीजों की इस महामारी से जान गई उनकी संख्या भी 18 मई के 160 से करीब तीन गुणा बढ़कर 31 मई को 473 हो गई।

