डोंबिवली। तेरापंथ धर्म संघ के सरताज आचार्य श्री महाश्रमण जी की विदुषी शिष्या शासन श्री साध्वी श्री सोमलता जी के सन्निध्य में गुरुधारणा का कार्यक्रम आयोजित हुआ। ग्यारह बजकर ग्यारह मिनट पर साध्वी श्री जी ने सभी को गुरुधारणा करवाई और उसकी उपयोगिता की जानकारी दी। इसी क्रम में चांदनी हिंगड़ के मासखमण तप की अनुमोदना की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ नमस्कार महामंत्र के जप से हुआ। युवक परिषद ने मंगल गीत का संगान किया। साध्वी श्री शकुन्तलाकुमारी जी ने महाश्रमणी साध्वी प्रमुखा श्री कनकप्रभाजी के संदेश का वाचन किया।
शासन श्री साध्वी श्री सोमलता जी ने ओजस्वी वाणी में कहा- खाओ, पियो मौज करो की संस्कृति में तप करना किसी-किसी को ही प्रिय लगता है। रतनलाल जी कोठारी, श्रीमती स्वीटी मेहता, श्रीमती शिल्पा कोठारी व सुश्री चांदनी हिंगड़ ने मासखमण तप कर शिवपुर का दरवाजा खटखटाया है। साध्वी श्री जी ने आगे कहा- जैन आगमों में तप को मंगल माना गया है। तप शरीर को निरोग बनाता। बुद्धि को शुद्ध बनाता है और आत्मा से परमात्मा बनाता है। डोंबिवली तेरापंथ समाज ने भी अपनी सोई शक्तियों को जगाने के लिए, कर्म जंजीरों को तोड़ने के लिए तप देवी की साधना आराधना की। आपने आगे कहा- मैंने इक्कावन चतुर्मास कर लिए, उसमें पहली बार देखा है कि तप अनुमोदना में प्रकृति ने अमृत वर्षा की तो डोंबिवली के भाई बहनों ने तेलो की वर्षा की। इतने छोटेसे समाज के द्वारा एक दिन में १०८ तेलों से अभिवंदना करना आश्चर्य लगता है। और जो भाई बहिन संवत्सरी का उपवास नहीं करते उनके द्वारा अठाई तप से अनुमोदना करना यह सब हुआ गुरुदेव की कृपा से। प्रसंगवश आपने कहा- जो व्यक्ति गुरु के चरणों में सब कुछ अर्पण कर देता है या “गुरुशरणमस्तु” इस मंत्र का जप कर लेता है उसका बेड़ा पार हो जाता है। मेरा जीवन नौका तो इसी से ही पार होती है।
साध्वी श्री संचितयशाजी ने कहा- इस भौतिकवादी युग में तप की साधना करना दुष्कर है। डोंबिवली तेरापंथ समाज ने शासन श्री साध्वी श्री सोमलता जी की अमृतमय वाणी का श्रवण करके ओर उनके द्वारा सहज मुखारविंद से निकले हुए शब्द- मैं डोंबिवली में आचार्य श्री महाप्रज्ञ जन्म शताब्दी वर्ष में सौ तपस्वियों को देखूं। उसी दिन से भाई बहिनो ने नव उत्साह, नव ऊर्जा से परिपूर्ण होकर इस दिशा में कदम बढ़ा दिये। आज डोंबिवली समाज ने साध्वी श्री जी को चार मासखमण तप, १०० अठाई से ऊपर के तप, ७०० से ऊपर तेले, लगभग १००० उपवास, सवा करोड़ का जप, द्रव्य सीमा व ३००० सामायिक का उपहार भेट कर उनके सजोये सपनों को साकार करके एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। साध्वी श्री जागृत प्रभाजी ने गीत के माध्यम से भाई बहिनों को तप से अनुराग बढ़ाने को प्रेरणा दी। साध्वी श्री रक्षितयशाजी ने कहा- जब जब तपसी भाई बहिन तप की नौका पर चढ़कर साध्वी श्री जी के पास आते है तब तब डोंबिवली तेरापंथ भवन की सुषमा शिखरो पर चढ़ जाती है।
मुंबई सभा अध्यक्ष नरेन्द्रजी तातेड ने कहा- शासन श्री साध्वी श्री सोमलता जी डोंबिवली के भाई बहिनों को सोमरस का पान करवा रही है। और तप का यह दुर्लभ नजारा मुंबई में केवल डोंबिवली में ही देखने को मिला है। सभा अध्यक्ष सुरेशजी सिंघवी ने स्वागत भाषण व चारित्र आत्माओं के संदेश का वाचन किया। सभा मंत्री कैलाश सिंयाल ने अभिनंदन पत्र का वाचन किया। तेयुप अध्यक्ष राकेश कोठारी, महिला मंडल संयोजिका मधु कोठारी, कन्या मंडल संयोजिका प्रेक्षा बड़ाला, सह संयोजिका रिंपल सिंघवी व आशी सिंघवी ने बधाई दी और तप का उपहार भेट किया। कार्यक्रम का आभार ज्ञापन ललित पुनमिया ने किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन साध्वी श्री रक्षितयशा जी ने किया।
जोड़ी तप से प्रीत पुनीत, लिखे तपस्या के सौ गीतः शासन श्री साध्वी श्री सोमलता जी

