राजकुमार गौतम, बस्ती (उ० प्र०)। गौर ब्लॉक की ग्राम पंचायतों में सफाई व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। गांवों में तैनात सफाईकर्मी न तो नालियां साफ कर रहे हैं और न ही सड़कों पर जमी गंदगी हटा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सफाईकर्मी महीनों से पंचायतों में दिखाई नहीं देते, जबकि हर महीने 48 से 50 हजार रुपये तक की सैलरी उठा रहे हैं।
गौर करने वाली बात यह है कि ग्राम पंचायतों के लिए नियुक्त अधिकांश सफाईकर्मी गांवों में सेवा देने के बजाय ब्लॉक दफ्तर, पंचायत सहायकों के कार्यालय और बड़े अधिकारियों के आवास पर काम कर रहे हैं। ऐसे में ग्राम पंचायतों की सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ी है और स्वच्छ भारत मिशन का सपना अधूरा रह गया है। सूत्रों के अनुसार,पंचायती राज विभाग के सहायक विकास अधिकारी (एडीओ पंचायत) ने माना कि सफाईकर्मियों का गलत उपयोग हो रहा है। उन्होंने कहा – “हमारी जिम्मेदारी हाजिरी सुनिश्चित करना है, लेकिन जब कर्मचारी ही अफसरों के बंगलों पर काम करेंगे तो गांवों की सफाई कौन करेगा?” एडीओ ने साफ कहा कि सफाईकर्मियों को तुरंत ब्लॉक दफ्तर और अफसरों के घरों से हटाकर उनकी मूल तैनाती स्थल यानी ग्राम पंचायतों में भेजा जाना चाहिए।
गांवों में नालियां जाम हैं, सड़कों पर कूड़े-कचरे का अंबार लगा है और गंदगी से बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार की योजनाएं कागजों पर ही चल रही हैं। एक ग्रामीण ने सवाल उठाया – “क्या सरकार घर बैठने और ब्लॉक दफ्तर में काम करने के लिए सैलरी देती है? अगर सफाईकर्मी गांवों में नहीं आएंगे तो हम सफाई के लिए किसके पास जाएंगे?” वहीं कई सालों से ब्लॉक कार्यालय में कार्य कर रहे सफाईकर्मियों के नाम और तैनाती विवरण जल्द उजागर किए जाएंगे। सवाल यह भी है कि जब ब्लॉक अधिकारी सब कुछ जानते हैं तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
गौर ब्लॉक की ग्राम पंचायतों में सफाई व्यवस्था ठप, सफाईकर्मी अफसरों के घर और ब्लॉक दफ्तर में तैनात

