स्टार कास्टः राहुल गणेश तुलसीराम, श्रीजिता डे, इशिता गांगुली, मेघा शर्मा, बिजेंद्र काला आदि
निर्देशकः नयन पचौरी
रेस्क्यू ऐसी फिल्म है जिसका पोस्टर देखने के बाद एक खास तरह के फिल्म प्रेमी थिएटर तक जरूर जाएंगे। यह अलग बात है कि उनके हाथ कुछ खास नहीं लगेगा। इस हफ्ते यह फिल्म रिलीज हो गई है सो, अपने खास मनोरंजन के लिए इस फिल्म को देख सकते हैं।
कहानीः फिल्म की कहानी तीन लड़कियों हनी (श्रीजिता डे), मीरा (इशिता गांगुली) एवं आयशा (मेघा शर्मा) तथा इस्टेट एजेंट जतिन (राहुल गणेश तुलसीराम) की कहानी है। सबकी अपनी-अपनी समस्याएं हैं। लड़कियां मनमर्जी की जिंदगी जीना चाहती हैं जबकि जतिन अपने इस्टेट एजेंट के काम को जमाने की कोशिश में है। जतिन हनी, मीरा एवं आयशा को फ्लैट दिलाने अंधेरी बुलाता है। वे आती हैं घर को देखकर एक लड़की जतिन पर खूब भड़कती है जबकि एक सिगरेट लिए उसे तिरछी नजरों से देखती है और तीसरी उससे बेहद कामुक अंदाज में बात करती है। इससे डरा और सकपकाया जतिन दूसरे दिन एग्रीमेंट लेकर आने व फ्लैट की कमियों को ठीक कराने की बात कहकर चला जाता है। इस बीच जतिन की पुरानी गर्लफ्रेंड का फोन आता है और कहती है मैंने अपने पति को छोड़ दिया क्योंकि वह मुझे मारता पीटता था, और अब तुम्हारे साथ रहना चाहती हूं। जतिन शॉक्ड होता है और कहता है तुम्हारी शादी कब हो गई। वह बताती है मां-बाप ने कर दी थी लेकिन अब उसके साथ नहीं रहूंगी। वह उसे लेकर आता है और अपने घर में रहने का इंतजाम कर देता है। जतिन दूसरे दिन उन लड़कियों को एग्रीमेंट देने जाता है, लेकिन वे लड़कियां उसे वहीं बंधक बना लेती हैं, और उसे परेशान करना, टार्चर करना शुरू कर देती हैं। अब लड़कियां उसे क्यों परेशान करती हैं, उसके साथ क्या-क्या करती हैं। जतिन उनके चंगुल से छूटता है कि नहीं। प्रेमिका क्या करती है, यह सब जानने की लिए एक बार थिएटर जाकर फिल्म को देखें, तभी पता चलेगा।
डायरेक्शनः डायरेक्शन नयन पचौरी ने किया है, जिन्होंने पूरी फिल्म को बिल्कुल भटका सा दिया है। फिल्म के बीच में ही आपके दिमाग में कई सवाल आएंगे, जिनके जवाब देने में फिल्म नाकाम रही है। फिल्म का अंत ढूढ़ते-ढूंढ़ते पूरी फिल्म देख तो लेंगे लेकिन समझ में नहीं आएगा कि आखिर मामला क्या था। वही हाल स्क्रीन प्ले, डायलॉग का भी है। फिल्म के गीत में भी कोई दम नहीं दिखा, जिनके भरोसे कई फिल्में चल जाती हैं।
एक्टिंगः फिल्म में तीनों श्रीजिता, इशिता और आयशा का किरदार सामान्य है। प्रभाव नहीं छोड़ पाती हैं। लीड रोल में राहुल गणेश तुलसीराम ने कोशिश तो बहुत की है काफी हद तक सफल भी रहे बावजूद इसके वे और भी बेहतर कर सकते थे। बिजेंद्र काला मराठी पुलिस अधिकारी के किरदार में बिल्कुल जम नहीं पाए हैं। बाकी के किरदारों का भी अभिनय कुछ खास गुल नहीं खिला पाया।
वैसे, खाली हैं तो देख आइए, ज्यादा क्या कहूं। सुरभि सलोनी की तरफ से फिल्म को 1.5 स्टार।
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