मुंबई। दक्षिण मुंबई में शासन श्री साध्वी कैलाशवतीजी के सानिध्य में प्रज्ञा जागरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस मौके पर साध्वी श्री जी ने कहा – संबोधी द्वारा देय, हैय , उपादेय को बहुत अच्छी तरह से जाना जा सकता है। संबोधी का अर्थ है – संबोध को प्राप्त करना सम्यग दर्शन, ज्ञान, चरित्र की आराधना करना। संबोधी से मेघ की आत्मा तो बुरू-तिरु बनी ही है – हमारी आत्मा भी सिद्ध बने ऐसा उपादेय ग्रहण करें। संबोधी का जन्म मेघ के माध्यम से हुआ। मेघ ने महावीर से सुना, समझा और श्रद्धा-पूर्वक इसका अनुशीलन किया। ठीक इसी प्रकार जाति स्मृति से मेघ ने पूर्व जन्म को जाना। जाति स्मृति मे मन एकाग्रता की साधना व साधन चाहिए तभी पूर्व भव को जाना जा सकता है।इसी प्रकार “प्रज्ञा जागरण” के लिए भी अनुप्रेक्षा, ध्यान एवं एकाग्रता एवं शुधलेश्या के रूपी साधन को अपनाएं। क्रोध एवं अहंकार, लोभ रूपी पदार्थों को हेय मानकर त्यागे एवं संबोधी को प्राप्त करें।
साध्वी पंकज श्री जी ने कहा प्रज्ञा जागरण कार्यशाला मैं वह व्यक्ति स्थिरता रख सकता है जो ज्ञानवान होता है वह सम्यगज्ञान, दर्शन , चारित्र की आराधना करता है इसी को संबोधि कहां जाता है। बहिनों और भाइयों का जीवन ओस की बूंद की तरह, कब गिर जाए यह पता नहीं है , इसलिए प्रमाद मत करो “यही संबोधि “का उदघोष है। प्रमोद भावना का विकास संबोधी प्राप्त करने का सुगम रास्ता है ।
साध्वी ललिता प्रभा जी ने कहां अप्रमक्ता कानाम संबोधि है ।भीतरी उर्जा ही संबोधि है । साध्वी शारदा प्रभा जी ने कहा – संबोधि यात्रा हम जेट विमान से भी कर सकते हैं और साइकिल रूपी अणुव्रत से भी कर सकते हैं अनासक्ति ।
साध्वी सम्यक्तवयशाजी ने कहा- संबोधि सहिष्णुता का दरिया बहाता है।
अणुव्रत समिति के अध्यक्ष रमेश जी चौधरी ने प्रज्ञा जागरण कार्यशाला में अपने विचार रखें। मुंबई महिला मंडल अध्यक्ष भाग्यश्री कच्छारा एवं चेंबूर संयोजिका अंजू भी उपस्थित थे । प्रज्ञा जागरण ज्ञानशाला के मोटिवेटर छतर सिंह खटेड ने कहा संबोधि का सार है आगे बढ़ो चलते रहो, जब तक संबोधि प्राप्त ना हो जाए ।छतर सिंह जी के भाषण ने सबको “प्रज्ञा जागरण ” ही संबोधि है विस्तार से बताया। 2023 पावस के अध्यक्ष मदन जी तातेड़ ने कहा संबोधी ज्ञान चेतना वर्ष मे संबोधि का स्वाध्याय करके ही हम गुरु पावस को सफल बनाएं। फाउंडेशन के अध्यक्ष किशन लाल जी डागलिया ने स्वागत करते हुए अपने विचार रखें।
कार्यक्रम को सफल बनाने में किशनलाल डागलिया,इंदरमल धाकड़,चंदनमल बैद,गणपतलाल डागलिया,पवन बोलिया, नितेश धाकड़, अशोक बरलोटा,राहुल मेहता,अशोक धींग, पुरण चपलोत, उत्सव धाकड़, रौनक धाकड़, रेणु डागलिया, उर्मिला कच्छारा, सुमन कावड़िया, रुकमण कच्छारा,नुतन सोनी, पुष्पा कच्छारा आदि का सहयोग रहा
आभार ज्ञापन पवन बोलिया ने किया कार्यक्रम का कुशल संचालन दिनेश धाकड़ ने किया। यह जानकारी तेयुप के उपाध्यक्ष नितेश धाकड़ ने दी।
दक्षिण मुंबई में प्रज्ञा जागरण कार्यशाला का आयोजन

