आत्म साक्षात्कार की अनमोल प्रक्रिया है प्रेक्षाध्यान – मुनिश्री जिनेश कुमारजी
पालघर। महातपस्वी अचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनिश्री जिनेश कुमार जी ठाणा 2 के सान्निध्य में त्रीदिवसीय प्रेक्षाध्यान कार्यशाला का आयोजन जैन श्वेतांबर तेरापंथी महासभा एवं प्रेक्षा फाउंडेशन के तत्वावधान में तेरापंथ सभा पालघर द्वारा तेरापंथ भवन में किया गया। प्रेक्षाध्यान का प्रशिक्षण कार्य प्रेक्षा प्रशिक्षिका मीना साबद्रा व रानी कोठारी ने किया।
कार्यशाला में संभागियों को संबोधित करते हुए मुनिश्री जिनेश कुमार जी ने कहा आत्म साक्षात्कार की अनमोल प्रक्रिया है प्रेक्षाध्यान। प्रेक्षाध्यान ज्योति की साधन है। प्रेक्षाध्यान कर्म शोधन व पाप पक्षालन की प्रक्रिया है। चित्त की एकाग्रता ही ध्यान है। ध्यान तनावमुक्ति का अमोध उपाय है। ध्यान तन की शुद्धि के लिए ही नही वचन और मन की शुद्धि के लिए करना चाहिए। जिसका मनोबल व धृति बल मजबूत होता है, वही व्यक्ति ध्यान साधना कर सकता है। मुनिश्री ने आगे कहा कि चित्त शुद्धि के दो उपाय है स्वाध्याय और ध्यान। ध्यान के पांच हेतु है वैराग्य, तत्व विज्ञान, निग्रन्थता, संचितता और परिषह जयी। प्रेक्षाचर्या के पांच सूत्र है भाव क्रिया, मति क्रिया, विरति, मैत्री, मित्ताहार व मित्तभाषण। वर्तमान में जीना जानते हुए करना और सतत अप्रमत्त रहना। भाव क्रिया के तीन अर्थ है। आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी ने परीक्षा प्रेक्षाध्यान पद्धति का आविष्कार कर जगत पर बहुत बड़ा उपकार किया है। जन्म शताब्दी वर्ष में उनके अवदान प्रेक्षाध्यान को घर घर पहुचाये।
इस अवसर पर प्रेक्षाध्यान प्रिशिक्षिक मीना सबद्रा ने कार्यशाला में कराए गए प्रयोगोको निरंतर करते रहने की प्रेरणा प्रदान। प्रशिक्षिका रानी कोठारी ने तनाव के युग में प्रेक्षाध्यान की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यशाला रिपोर्ट कार्यशाला संयोजिका संगीता बाफना ने प्रस्तुत की। तेरापंथ सभा के उपाध्यक्ष मिठालाल सिंघवी, संभागीय प्रवीण घाटावत ने अपने अनुभव प्रस्तुत किए। संचालन मुनिश्री परमानंद जी ने किया। प्रेक्षा गीत से कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। त्रिदिवसीय कार्यशाला में 68 भाई बहनोंने पंजीकरण कराया। कार्यशाला में मुनिश्री जिनेश कुमार जी का उदबोधन एवम प्रेक्षा प्रशिक्षिका मीना साबद्रा व रानी कोठारी द्वारा प्रेक्षाध्यान के प्रयोग यौगिक क्रियाए अर्हम मंत्र का महत्व आदि के बारे में बताया गया। यह जानकारी दिनेश राठौड़ ने दी।

