कोबा, गांधीनगर (गुजरात)। शनिवार को ‘वीर भिक्षु समवसरण’ में उपस्थित जनता को जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने आयारो आगम के माध्यम से पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि आदमी अनेक विषयों को जानने वाला हो सकता है। शिक्षा संस्थानों द्वारा अनेक विषयों का ज्ञान कराने का प्रयास कराया जाता है।
कितनी भाषाएं सीखाई जाती हैं। कितने-कितने विषय भी पढ़ाए जाते होंगे। वह भी ज्ञान है। ज्ञानावरणीय कर्म का क्षयोपशम होता है, तब ज्ञान प्राप्त होता है। कोई आदमी गलत कार्यों का ज्ञान कर लेता है। कोई चोरी की ट्रेनिंग ले ली, कोई डकैती की तो कोई आतंकी ट्रेनिंग ले ली और आगे वह चोरी, डकैती, और हिंसा करती है तो वे कार्य पाप का बंध कराने वाले हो सकते हैं। आदमी धर्म का ज्ञान कर ले, शास्त्रों का ज्ञान कर ले। इसके लिए कहा गया कि मेधावी को धर्म का ज्ञान भी करने का प्रयास करना चाहिए। यदि धर्म का ज्ञान प्राप्त कर लेगा तो वह कल्याण की दिशा में गति कर सकेगा। धर्मग्रन्थों में भी धर्म का ज्ञान है। अध्यात्म विद्या धर्म का ज्ञान कराने वाली होती है। आध्यात्मिक विज्ञान भी एक आवश्यक विद्या है। इसका भी आदमी को ज्ञान करने का प्रयास करना चाहिए।
जो आदमी अध्यात्म विद्या को जानता है, वह आत्मा, परमात्मा, नरक-स्वर्ग, पुण्य-पाप, हिंसा-अहिंसा आदि चीजों को भी जान सकता है। जिस आदमी के पास अध्यात्म विद्या का ज्ञान नहीं होता, वह जीव-अजीव को नहीं जानता, वह संयम को भला कैसे जान सकता है। जहां आत्मवाद, कर्मवाद, लोकवाद आदि के विषय में बताया जाए, नौ तत्त्वों का ज्ञान कराया जाए, वह अध्यात्म विद्या का क्षेत्र है। इनका ज्ञान कर आदमी आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ सकता है। साधु की पर्युपासना करने से आध्यात्मिक विद्या का लाभ मिल सकेगा। इनकी उपासना में रहने से साधुओं से अच्छी बातों को सुनने का अवसर मिलेगा, धर्म की बात को सुनने का अवसर मिलेगा। साधु के तो दर्शन का भी लाभ बताया गया है। प्रवचन सुनने का अवसर मिलता है।
पुस्तक पढ़ने से भी ज्ञान हो सकता है, लेकिन कोई गुरु अथवा अच्छा प्रशिक्षक प्राप्त हो जाए तो सारा ज्ञान अच्छी तरह प्राप्त हो सकता है। आदमी को अपने जीवन के कल्याण के लिए धर्म की बातों को जानने, सुनने व समझने का प्रयास करना चाहिए। फिर वह ज्ञान के अनुसार जीवन का क्रम बनता है तो जीवन का कल्याण हो सकता है। खाना-पीना, सोना-जागना आदि तो पशु भी करते हैं, आदमी के भीतर धार्मिकता का जो प्रभाव होता है, वह आदमी को विशेष बनाता है। आदमी धर्म के क्षेत्र में उत्कृष्ट स्थान तक जा सकता है। इसलिए आदमी को अपने जीवन में धार्मिकता को लाने का प्रयास करना चाहिए। इसलिए मेधावी धर्म को जाने और अपने जीवन के आचरण में जाने का प्रयास करे तो उसके जीवन का कल्याण हो सकता है। अहिंसा के रास्ते पर चलना, बेइमानी से बचना, धोखाधड़ी नहीं करना, जितना संभव हो सके, धार्मिक कार्य कर धर्म के पथ पर चलने का प्रयास करना चाहिए। मोटेरा-कोटेश्वर ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों ने अपनी प्रस्तुति दी। आचार्यश्री ने ज्ञानार्थियों को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। श्रीमती शीला संचेती ने अपनी कलाकृति आचार्यश्री के समक्ष प्रस्तुत करते हुए अपनी भावाभिव्यक्ति दी।
धर्म को जान मेधावी भी करे जीवन का कल्याण : शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमण
Highlights
- आचार्यश्री ने जनता को आध्यात्मिक ज्ञान के अर्जन की दी पावन प्रेरणा
- मोटेरा-कोटेश्वर ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों ने दी अपनी प्रस्तुति

