राघवेंद्र प्रताप सिंह, बहराइच/ कैसरगंज (उ.प्र.)। तहसील से नगर पंचायत का दर्जा पा चुके कैसरगंज में बुनियादी सुविधाओं का हाल हैरान करने वाला है। एक ओर जहां यह क्षेत्र तहसील और ब्लॉक मुख्यालय है, वहीं दूसरी ओर एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय मार्ग (दूसरे देश को जोड़ने वाली सड़क) भी यहीं से गुजरती है। अनुमान है कि इस मार्ग से रोजाना तकरीबन 2000 बसें गुजरती हैं, लेकिन विडंबना यह है कि इस व्यस्ततम पड़ाव पर यात्रियों के लिए एक अदद बस स्टॉप तक नहीं है।
बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं की सबसे बड़ी परेशानी
यात्री सुविधाओं की कमी का सबसे बड़ा खामियाजा यहां से लखनऊ या अन्य शहरों में इलाज के लिए जाने वाले गरीब, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को भुगतना पड़ रहा है। धूप, बारिश या कड़ाके की ठंड हो, इन यात्रियों को सड़क किनारे ही बसों का इंतजार करना पड़ता है। बैठने के लिए कोई जगह न होने के कारण अक्सर महिलाएं और बुजुर्ग घंटों ज़मीन पर बैठने को मजबूर होते हैं।
हादसों का डर, दौड़कर पकड़नी पड़ती है बस
कैसरगंज से बहराइच, लखनऊ, बाराबंकी, दिल्ली, और यहां तक कि नेपाल की ओर जाने वाली बसें यहां रुकती तो हैं, लेकिन उनका कोई निश्चित ठहराव स्थल नहीं है। बसें आती हैं और सड़क पर ही रुककर आगे बढ़ जाती हैं। इस वजह से यात्रियों को, खासकर बुजुर्गों को, चलती बस को पकड़ने के लिए दौड़ना पड़ता है, जिससे दुर्घटना का खतरा हमेशा बना रहता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, कई बार यात्री वाहनों की चपेट में आकर घायल हो चुके हैं। एक स्थानीय निवासी ने बताया, “लखनऊ इलाज के लिए जाने वाले मरीज़ और उनके तीमारदार सबसे ज्यादा परेशान हैं। न छाया है, न बैठने की जगह। नगर पंचायत बन गया, लेकिन यात्री सुविधा के नाम पर शून्य है।”
प्रशासन की अनदेखी पर सवाल
जनप्रतिनिधियों और स्थानीय प्रशासन की इस गंभीर समस्या पर अनदेखी कई सवाल खड़े करती है। जब यह मार्ग एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय मार्ग है और हजारों यात्री प्रतिदिन यहां से सफर करते हैं, तो क्यों अब तक एक व्यवस्थित बस स्टेशन या कम से कम एक सुविधायुक्त बस स्टॉप का निर्माण नहीं किया जा सका? कैसरगंज की जनता, खासकर बुजुर्ग और महिलाएं, अब जल्द से जल्द इस दिशा में ठोस कदम उठाने और एक सुरक्षित तथा सुविधायुक्त बस स्टॉप के निर्माण की मांग कर रही है।
देश को जोड़ने वाले कैसरगंज में बस स्टॉप तक नहीं, यात्री बेहाल!

