नीरज राज, बस्ती (उ.प्र.)। जनपद के मझियार गांव में उस दिन सुबह-सुबह सब कुछ सामान्य था। सूरज की किरणें खेतों में सोने-सी चमक रही थीं, और दुबौलिया थाना क्षेत्र के इस छोटे से गांव में लोग अपने रोजमर्रा के कामों में व्यस्त थे। लेकिन कौन जानता था कि एक साधारण-सी रसोई में बन रहा चावल पूरे गांव सहित जिले में हलचल मचा देगा!
मामला कुछ यूं था। गांव की रहने वाली शांति देवी रोज की तरह चावल बना रही थी। चूल्हे पर कड़ाही में चावल उबल रहे थे, और शांति देवी पास में बंधी अपनी भैंस को चारा डालने चली गईं। घर के बाकी लोग अपने-अपने काम पर निकल चुके थे। चारा डालकर जब शांति देवी वापस लौटीं, तो उनकी आंखें फटी की फटी रह गईं। कड़ाही में उबल रहे चावल, जो अभी कुछ देर पहले सफेद थे, अब रंग कुछ दूरी में हल्के नीले तब्दील हो चुके थे! और तो और, चावल के ऊपर कोई पाउडर-सा बिखरा हुआ दिख रहा था, मानो कोई जादूगर अपना करतब दिखा गया हो!
शांति देवी का दिल धक-धक करने लगा। “ये क्या अनहोनी हो गई?” उन्होंने सोचा। पहले तो उन्होंने सोचा कि शायद कोई गलती हो, लेकिन चावल का नीला रंग और उसमें बिखरा पाउडर कोई साधारण बात नहीं थी। आनन-फानन में उन्होंने पड़ोसियों को बुलाया। बात जंगल की आग की तरह पूरे गांव में फैल गई। शांति देवी ने बिना देर किए दुबौलिया थाने में फोन घुमा दिया। कुछ ही देर में पुलिस की जीप गांव में धूल उड़ाती हुई पहुंच गई। कड़ाही में नीले चावल देखकर उनकी भौंहें भी तन गईं। “ये क्या माजरा है?” उन्होंने शांति देवी से पूछा।
शांति देवी ने सारी कहानी एक सांस में सुना दी। पुलिस ने तुरंत कड़ाही को अपने कब्जे में लिया और उस रहस्यमयी पाउडर को जांच के लिए भेजने की तैयारी शुरू कर दी। गांव में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कोई कह रहा था कि शायद कोई पड़ोसी रंजिश में नीला रंग डाल गया हो, तो कोई इसे जहरीला केमिकल की मिलावट बता रहा था। कुछ बुजुर्गों ने तो ये भी कहा कि हो सकता है कोई पुराना खजाना खोजने वाला तांत्रिक चावल में नीला जादू डाल गया हो! पुलिस ने आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। पुलिस ने कहा चिंता न करें, हम इस नीले रहस्य का पर्दाफाश जरूर करेंगे।
बस्ती के मझियार में चावल का नीला रहस्य: शांति देवी की रसोई में बन रहा चावल जिले में मचा दिया हलचल, पुलिस जांच में जुटी

