विकास धाकड़/बोरीवली। तेरापंथ धर्मसंघ के यशस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी के विद्वान सुशिष्य मुनि श्री कुलदीप कुमार जी एवं मुनि श्री मुकुल कुमार जी के पावन सान्निध्य में दिनांक 5 जून 2025 की रात्रि को ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों द्वारा एक अत्यंत प्रेरणादायक लघु नाटिका का मंचन किया गया। इस नाटिका में यह संवेदनशील चित्रण प्रस्तुत किया गया कि मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग ने आज की नई पीढ़ी को पारंपरिक खेलों, पारिवारिक संवादों और सांस्कृतिक मूल्यों से किस प्रकार दूर कर दिया है। विद्यार्थियों ने नाटिका के माध्यम से यह संदेश दिया कि मोबाइल का केवल सदुपयोग करें, दुरुपयोग एवं अत्यधिक उपयोग से स्वयं को और अपने संबंधों को क्षतिग्रस्त होने से बचाएं। इस प्रस्तुति में बच्चों ने न केवल अभिनय के माध्यम से जीवन के यथार्थ को उजागर किया, बल्कि उपस्थित जनसमुदाय को गहराई से सोचने पर भी विवश किया।
नाटिका के उपरांत मुनि श्री मुकुल कुमार जी ने अपने गूढ़ और सहज प्रवचन में जैन परंपरा में वंदन पाठ की महत्ता को स्पष्ट करते हुए कहा, वंदन केवल शब्दों का विन्यास नहीं,अपितु आत्मा की विनम्रता और गुरु के प्रति श्रद्धा की सजीव अभिव्यक्ति है, उन्होंने वंदन विधि में निहित गूढ़ रहस्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जब विनय से जुड़ी प्रक्रियाएं भाव सहित की जाती हैं, तो साधक का आंतरिक विकास तीव्र गति से होता है।
प्रवचन का विशेष आकर्षण था–सुख साता शब्द का तात्त्विक विवेचन, जो कि जैन मुनियों की पारंपरिक सुख-प्रच्छा प्रक्रिया का अभिन्न अंग है। उन्होंने इसे केवल औपचारिक संवाद न मानकर, एक आध्यात्मिक संवाद का माध्यम बताया, जो एक संत के भीतर के सुख, समता और संतोष को अभिव्यक्त करता है।
इस आयोजन की सफलता में ज्ञानशाला प्रशिक्षिकायें एवं ज्ञानार्थी परिवार, बोरीवली सें श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, तेरापंथ युवक परिषद् तेरापंथ महिला मंडल,तेरापंथ किशोर मंडल,तेरापंथ कन्या मंडल बोरीवली आदि एवं सभी संस्थाओं के सम्माननीय पदाधिकारियों ने पूर्ण समर्पण और उत्साह से आयोजन को सफल बनाने हेतु कार्य किया। सभी के संयुक्त प्रयासों से न केवल नाटिका की प्रस्तुति प्रभावशाली रही, बल्कि मुनिश्री के प्रवचन की गरिमा भी सुरक्षित और सुव्यवस्थित रूप से सभी तक पहुँची।
यह संपूर्ण कार्यक्रम न केवल सांस्कृतिक चेतना का माध्यम बना, बल्कि धार्मिक अनुशासन,आत्मिक विकास और जैन परंपरा की गूढ़ अवधारणाओं को सरल भाषा में जनसामान्य तक पहुँचाने का एक श्रेष्ठ अवसर भी सिद्ध हुआ।
बोरीवली में मुनिश्री का विशेष प्रवचन एवं ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों द्वारा लघु नाटिका–आध्यात्मिकता और परंपरा का अनुपम संगम

