पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने 243 सदस्यीय सदन में 202 सीटें जीतकर ऐतिहासिक बहुमत हासिल किया, जो 2020 के 122 सीटों से दोगुना से अधिक है। यह जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकास-केंद्रित रणनीति, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की स्थानीय लोकप्रियता और महिलाओं के बीच कल्याण योजनाओं के प्रभाव को दर्शाती है। लेकिन इस प्रचंड विजय के बीच कुछ सीटों पर जीत-हार का अंतर इतना बारीक रहा कि वहां हर वोट की कीमत साफ नजर आई। आइए, जानते हैं इस चुनाव की पूरी कहानी।राजग का जलवा: सीटों और वोट शेयर का बंटवाराचुनाव आयोग के अंतिम आंकड़ों के अनुसार, राजग ने कुल 46.7% वोट हासिल किए, जबकि महागठबंधन (राजद-कांग्रेस-वाम दल) को 37.5% ही मिले। वोट शेयर में 10% का अंतर होने के बावजूद फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट सिस्टम ने राजग को भारी सीटें दिलाईं।
अन्य दलों में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने पहली बार 1 सीट जीती, जबकि प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी खाता खोलने में नाकाम रही। मतदान 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में हुआ, जिसमें 67.13% रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया।प्रचंड जीत के प्रमुख कारण: गठबंधन एकजुटता और महिला वोटविश्लेषकों के मुताबिक, राजग की जीत का राज महिलाओं के बीच ‘महिला रोजगार योजना’ में रहा, जिसमें 1.25 करोड़ महिलाओं को 10,000 रुपये की सहायता दी गई। एक सर्वे में महिलाओं के 48.5% वोट राजग को मिले। इसके अलावा, गठबंधन की एकजुटता ने वोटों का बंटवारा रोका, जबकि महागठबंधन में जातिगत समीकरणों में चूक हुई। प्रभात किशोर ने कहा, “महिलाओं को नकद हस्तांतरण ने राजग की जीत में बड़ी भूमिका निभाई।”प्रधानमंत्री मोदी ने बीजेपी मुख्यालय में कहा, “यह जीत लोकतंत्र की जीत है। चुनाव आयोग पर जनता का विश्वास बढ़ा है।” नीतीश कुमार दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे, और कैबिनेट विस्तार पर चर्चा तेज है।बारीक अंतर वाली सीटें: जहां हर वोट निर्णायक साबित हुआराजग की प्रचंड जीत के बावजूद 3 सीटों पर जीत का मार्जिन 100 वोटों से कम रहा, जो चुनाव की तीव्रता को दर्शाता है। यहां कुछ प्रमुख उदाहरण:ढाका सीट (राजद की जीत): राजद के फैसल रहमान ने बीजेपी के पवन कुमार जायसवाल को 178 वोटों से हराया। कुल वोट: 88,278 बनाम 88,100। यह सीट मुस्लिम-यादव बाहुल्य क्षेत्र में महागठबंधन की एकमात्र नैक-बाइटिंग जीत थी।
फोर्ब्सगंज सीट (कांग्रेस की जीत): कांग्रेस के मनोज विश्वास ने बीजेपी के विद्या सागर केशरी को 221 वोटों से मात दी। यह विपक्ष की दुर्लभ सफलता थी, जहां स्थानीय मुद्दों ने काम किया।
तीन सीटों पर 100 से कम मार्जिन: चुनाव आयोग के आंकड़ों से पता चलता है कि कुल 3 सीटों पर विजयी अंतर 100 वोटों से कम रहा, हालांकि विशिष्ट नामों का इंतजार है। इनमें से अधिकांश राजग की थीं, लेकिन विपक्ष ने भी कुछ पर कड़ा मुकाबला दिया।
अन्य प्रमुख बारीक अंतर वाली सीटें: रघुनाथपुर (राजद): ओसामा शहाब ने जदयू के विकास कुमार सिंह को 9,248 वोटों से हराया। कोचाधमान (एआईएमआईएम): मोहम्मद सरवर आलम की जीत 23,021 वोटों से हुई।
राघोपुर (राजद): तेजस्वी यादव ने बीजेपी के सतीश कुमार को 14,532 वोटों से हराया।
ये सीटें दर्शाती हैं कि बिहार की राजनीति में स्थानीय मुद्दे और जातिगत समीकरण कितने संवेदनशील हैं।
महागठबंधन की हार: ‘वोट चोरी’ का आरोप और आंतरिक कलह महागठबंधन को मिली करारी हार ने विपक्ष को हिलाकर रख दिया। तेजस्वी यादव ने अपनी राघोपुर सीट तो बचाई, लेकिन पार्टी 2020 की तुलना में आधी सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस ने हार का ठीकरा ‘वोटर लिस्ट रिवीजन’ और ‘वोट चोरी’ पर फोड़ा, दावा किया कि 128 सीटों पर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से वोटर डिलीशन ने राजग को फायदा पहुंचाया। राहुल गांधी ने कहा, “यह नतीजा चौंकाने वाला है। चुनाव निष्पक्ष नहीं था।”लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य ने राजनीति छोड़ने का ऐलान किया, जबकि प्रशांत किशोर की जन सुराज 0/243 पर सिमट गई। राजद नेता ने कहा, “हम गरीबों की पार्टी हैं। उतार-चढ़ाव तो आते रहते हैं।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025: राजग की प्रचंड जीत के बीच कुछ सीटों पर जीत-हार का अंतर रहा बेहद कम

