पटना। बिहार की दो-ढाई दशक की राजनीति में एक बड़े बदलाव के तहत भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पहली बार शासन में पायलट की सीट पर है। अब तक गैर-कांग्रेसी गठबंधन सरकारों में सहायक दल की भूमिका निभाती रही भाजपा ने राज्य की राजनीति में अब अपना कद इतना ऊंचा कर लिया है कि जनता दल (यूनाइटेड) और अन्य सहयोगी दलों की गठबंधन सरकार की बागडाेर पार्टी नेता सम्राट चौधरी के हाथ में है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन बुधवार को यहां लोकभवन में श्री चौधरी को प्रदेश के मुख्यमंत्री पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
पिछले तीन दशक से ज़्यादा समय तक बिहार की सियासत लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द घूमती आ रही थी और भाजपा कभी पक्ष और कभी विपक्ष में सहयोगी की भूमिका में थी। नवंबर, 2025 में हुए विधान सभा चुनाव में जदयू प्रमुख श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में सत्तारूढ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के विशाल बहुमत से सत्ता में लौटने पर श्री चौधरी को उप-मुख्यमंत्री बनाया गया था। बिहार की सियासत में पहली बार हुआ है,कि भाजपा इस बार राज्य में बड़े भाई की भूमिका में जबकि जदयू अब उसके सहयोगी की भूमिका में है।
नवंबर 2025 के इतिहास में भाजपा पहली बार सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है। वर्ष 2020 के चुनाव में भाजपा को 74 सीटें मिली थीं लेकिन उसने श्री कुमार को सरकार गठन के लिए समर्थन दिया था। इस बार के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल भाजपा को 89, जदयू को 85, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 19,, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) को पांच और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) को चार सीटें मिली। इस तरह राजग ने इस चुनाव में 202 सीटें जीतीं।
श्री कुमार के राज्यसभा में प्रवेश करने के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने पर आज श्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नयी सरकार ने शासन की बागडोर संभाल ली है।
श्री चौधरी 2017 में भाजपा में शामिल हुए थे और पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष बने और प्रदेश में पार्टी के तत्कालीन प्रमुख नेता सुशील मोदी के राज्यसभा जाने के बाद सम्राट चौधरी का कद तेजी से बढ़ा। वर्ष 2021 में वह नीतीश मंत्रिमंडल में पंचायती राज मंत्री बने और 2022 में भाजपा ने उन्हें विधान परिषद में विपक्ष का नेता बनाया। वर्ष 2023 में वह भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बनाये गये। वर्ष 2024 में उन्हें भाजपा विधायक दल का नेता और प्रदेश का उप मुख्यमंत्री बनाया गया था। वह पिछले चुनाव में तारापुर सीट पर प्रचंड जीत हसिल की और नई सरकार में उपमुख्यमंत्री के साथ गृहमंत्री बनाये गये।
बिहार में भाजपा के मिशन का आज एक ऐतिहासिक पड़ाव है। छह अप्रैल 1980 को पार्टी के गठन के बाद उसी वर्ष “बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 246 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे, जिनमें से 21 सीटों पर उसे जीत मिली।वर्ष 1985 में उसके 234 में से 16 उम्मीदवार ही विजयी हो सके थे। वर्ष 1990 में पार्टी ने 237 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किये,जिसमें 39 पर ‘भगवा’ लहराया और उसचुनाव में भाजपा के समर्थन से पहली बार लालू प्रसाद यादव मुख्यमंत्री बने थे।
वर्ष 1995 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 315 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए और 41 सीटें जीतीं जबकि श्री कुमार की समता पार्टी के 310 में से सात उम्मीदवार ही जीते थे। वर्ष 2000 में हुये चुनाव में भाजपा ने बिहार में अपना दम दिखाया। यह वह वक्त था जब भाजपा केंद्र की सत्ता में थी। भाजपा 168 सीटों पर लड़ कर 67 सीटें हासिल कर श्री लालू प्रसाद यादव की पार्टी के बाद दूसरा सबसे बड़ा दल बन कर उभरी थी। उस चुनाव में समता पार्टी के 120 में से 34 और कांग्रेस के 324 में से 23 उम्मीदवार जीते थे।
उस समय अविभाजित बिहार की 324 विधानसभा सीटों वाली बिहार में बहुमत के लिए 163 सीटें ज़रूरी थीं। किसी भी दल को सरकार बबनाने का जनादेश नहीं मिला। उस समय त्रिशंकु विधान सभा की स्थिति में भाजपा और सहयोगी दलों के गठबंधन ने समता पार्टी के नेता नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार बनाने का दावा किया। राज्यपाल विनोद चंद्र पांडे ने भाजपा के समर्थन से महज 34 सीटें जीतने वाले समता पार्टी के श्री कुमार को पहली बार तीन मार्च 2000 को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलायी थी लेकिन वह सरकार बहुमत का जुगाड़ ने होने के कारण केवल 7 दिन में चली गयी ।
वर्ष 2005 में फरवरी और अक्टूबर में दो बार हुए विघान सभा चुनाव में क्रमश: 37 सीटें और 55 सीटें मिली थीं। अक्टूबर के उस चुनाव में जदयू के 88 सदस्यों की जीत और भाजपा के समर्थन के साथ नेता नीतीश कुमार मुख्यमंत्री तथा भाजपा के श्री सुशील कुमार मोदी उप मुख्यमंत्री बने थे।
श्री कुमार के नेतृत्व में जब राजग ने 2010 का विधानसभा चुनाव लड़ा तो उसे दो-तिहाई बहुमत हासिल हुआ। जदयू को 115 और भाजपा को 91 सीटे मिली थीं।
बिहार में 2015 का विधानसभा चुनाव कई मायनों में थोड़ा अलग और दिलचस्प था। वर्षों के सहयोगी भाजपा और जदयू इस बार फिर जुदा हो गए थे और 20 साल बाद दो पुराने दोस्त लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार साथ आ गए थे। लालू और नीतीश के इस महागठबंधन में कांग्रेस भी शामिल थी। वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव चुनाव के नतीजे आने पर राजद 80 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। इसके बाद जदयू को 71 और कांग्रेस को 27 सीटें मिली थीं। इस चुनाव में महागठबंधन की सरकार बनी और नीतीश कुमार पांचवी बार मुख्यमंत्री बने। इस चुनाव में भाजपा की 53 सीटों पर जीत मिली। श्री कुमार ने राजद के सहयोग से सरकार बनायी।इस बार श्री कुमार की सरकार करीब 20 महीने ही चल पाई ।
सरकार के कार्यों में राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के बढ़ते हस्तक्षेप की वजह से पहले से ही असहज महसूस कर रहे श्री कुमार को राजद से नाता तोड़ने का बहाना मिल गया था। लालू परिवार के खिलाफ मंत्री पद और सरकारी नौकरी के बदले जमीन-फ्लैट लिखवाने का मामला भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने उजागर किया तथा रेलवे टेंडर घोटाला की जांच शुरू हुई।
श्री कुमार ने 26 जुलाई 2017 को महागठबंधन से नाता तोड़ते हुए मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा भी दे दिया । इसके बाद तुरंत भाजपा ने श्री कुमार को समर्थन देने की घोषणा कर दी और 24 घंटे के अंदर ही श्री कुमार ने छठी बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। श्री मोदी फिर से उप मुख्यमंत्री बने।
वर्ष 2020 में बिहार में हुये विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 74 सीटों पर जीत हासिल हुई, जदयू महज 43 सीटों पर सिमट गयी। इस चुनाव के बाद बिहार में भाजपा, जदयू से बड़ी पार्टी बन गई। कयास लगाए जा रहे थे कि नीतीश को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है लेकिन भाजपा ने साफ कर दिया था कि मुख्यमंत्री तो नीतीश कुमार ही होंगे। उस समय भाजपा से दो उप मुख्यमंत्री तार किशोर प्रसाद और रेणु देवी उप मुख्यमंत्री बनाये गये। हालांकि अगस्त 2022 में घटनाक्रम तेजी से बदले और नीतीश ने राजग से अलग होने का फैसला कर लिया। श्री कुमार एक बार फिर महागठबंधन में शामिल हो गए और उनके नेतृत्व में नई सरकार बनी।नीतीश महागठबंधन में गये लेकिन 17 माह में ही असहज महसूस करने लगे। जनवरी 2024 के आते-आते स्थितियां फिर से बदलने लगीं और नीतीश फिर से राजग में वापस लौट आए। भाजपा से सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा उप मुख्यमंत्री बनाये गये। बिहार शायद एकमात्र राज्य था, जहां भाजपा के मजबूत स्थिति में होने के बावजूद उसका मुख्यमंत्री नहीं बन पाया था।बिहार में भाजपा का सपना सकार हुआ और अब बिहार उन राज्यों में शामिल हो गया है, जहां उसकी पार्टी का मुख्यमंत्री है।
बिहार में पहली बार बड़े भाई की भूमिका में भाजपा, सम्राट चौधरी बने मुख्यमंत्री

