नयी दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर तीखा हमला बोला और सरकार पर जानबूझकर धोखा देने और संसदीय प्रतिनिधित्व पर पहले दिये गये आश्वासनों को कमजोर करने का आरोप लगाया। सोशल मीडिया साइट ‘एक्स’ पर लिखे एक तीखे पोस्ट में, श्री रमेश ने आरोप लगाया कि परिसीमन पर प्रधानमंत्री के दावों का आगामी संसद के विशेष सत्र के लिए प्रसारित विधेयकों में खंडन किया गया है।
उन्होंने कहा, “ प्रधानमंत्री एक तथाकथित नेता हैं, जिनकी एकमात्र विशिष्ट विशेषता उनकी बेजोड़ भ्रामक नेतृत्व क्षमता है। उन्होंने परिसीमन मुद्दे पर राष्ट्र के साथ जानबूझकर छल किया है।” प्रस्तावित परिवर्तनों के संभावित प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए, कांग्रेस नेता ने दावा किया कि कई क्षेत्रों के लोकसभा में सापेक्ष प्रतिनिधित्व में कमी आ सकती है।
उन्होंने कहा, “दक्षिणी राज्यों के सदस्यों की लोकसभा में संख्या कम हो जाएगी और इसी तरह की स्थिति उत्तर-पश्चिम भारत के छोटे राज्यों और पूर्वी राज्यों की भी है।” उन्होंने सरकार की विफलता पर सवाल उठाया, जो सभी राज्यों में सीटों में एक समान एवं आनुपातिक वृद्धि करने की अपनी पिछली प्रतिबद्धता का सम्मान करने में विफल रही।
⦿ सारी विपक्षी पार्टियां चाहती हैं कि महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण दिया जाए, इसे मौजूदा लोकसभा स्ट्रेंथ 543 के आधार पर लागू किया जाए
⦿ महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से ही लागू किया जाए
⦿ सारी विपक्षी पार्टियां परिसीमन के प्रावधानों के बिल्कुल खिलाफ हैं। हम लोकसभा और… pic.twitter.com/i0HkF2n8bC
— Congress (@INCIndia) April 15, 2026
श्री रमेश ने कहा, “ सभी राज्यों के लिए लोकसभा में समानुपातिक संख्या में वृद्धि का जो वादा प्रधानमंत्री और उनके कुछ सहयोगियों ने किया था, उसका क्या हुआ? ऐसा नहीं हुआ है।” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के आश्वासनों पर भरोसा नहीं किया जा सकता।” उन्होंने सरकार पर संवैधानिक सिद्धांतों के बजाय राजनीतिक लाभ को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। श्री रमेश ने कहा, “ वह सत्ता हथियाने की अपनी अशिष्ट प्रवृत्ति से ऊपर उठकर एक राजनेता बनने में असमर्थ हैं यहां तक कि परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी।”
कांग्रेस ने इस कदम के समय पर भी आपत्ति दर्ज की और कहा कि विधेयक की प्रतियां डॉ बी. आर. अंबेडकर की जयंती पर अपलोड किये गये थे। श्री रमेश ने परिसीमन प्रावधानों को बाबासाहेब की विरासत का अपमान करार दिया और 25 नवंबर, 1949 को संविधान सभा में डॉ अंबेडकर द्वारा संवैधानिक नैतिकता से मुक्त सरकार के खतरों के बारे में दी गयी चेतावनी का हवाला दिया।
जनसंख्या परिवर्तन के आधार पर संसद एवं विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को पुनर्निर्धारित करने की परिसीमन प्रक्रिया लंबे समय से एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा रही है। इसका हालांकि उद्देश्य समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है लेकिन कई विपक्षी दलों, विशेष रूप से दक्षिणी राज्यों के दलों ने चिंता व्यक्त की है कि जनसंख्या आधारित समायोजन से क्षेत्रों के बीच सत्ता संतुलन बिगड़ सकता है।
सरकार का हालांकि कहना है कि परिसीमन संबंधी कोई भी प्रक्रिया संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार ही की जाएगी, लेकिन संसद के विशेष सत्र से पहले यह मुद्दा विवाद का विषय बने रहने का अनुमान है।
The Prime Minister is a so-called Leader whose only distinguishing feature is his unmatched ability to be a Misleader.
He is a habitual liar who cannot speak the truth, even by mistake. He has engaged in deliberate deceit with the nation over the question of delimitation.
The…
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) April 15, 2026

