मुंबई। अखिल भारतीय साहित्य परिषद, सहरसा के द्वारा हाल में आई पुस्तक ‘चूम लो आसमान’ के लेखक, वरिष्ठ पत्रकार एवं गीतकार महेश कुमार झा को उनकी पुस्तक के लिए ‘साहित्य सृजन सम्मान’ से सम्मानित किया गया। प्रमंडलीय पुस्तकालय सहरसा के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में सम्मानित हुए महेश कुमार झा ने कहा कि वह जब-जब धरती पर आएंगे, एक लेखक-रचनाकार के रूप में ही जीवन बिताएंगे क्योंकि एक लेखक ही समाज की धड़कनों से जुड़ा होता है तथा समाज के सुख-दुख को अपना समझता है। सारी दुनिया सोती रहती है लेकिन लेखक रात-रात भर जागकर समाज की पीड़ाओं से उद्वेलित होकर अपनी कलम चलाता रहता है और एक बेहतर समाज की केवल परिकल्पना ही नहीं करता बल्कि समाज को बेहतर बनाने की दिशा में मोड़ने का प्रयास भी करता है।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए आनंद झा ने कहा कि ‘चूम लो आसमान’ एक ऐसी किताब है जो पूरे विश्व के युवा वर्ग के लिए अत्यंत जरूरी है क्योंकि यह किताब युवा मन की सारी उलझनों को दूर करते हुए उन्हें जीवन में शानदार कामयाबी हासिल करने को प्रेरित करती है। कॉलेज ऑफ कामर्स के प्रिंसिपल के.एस. ओझा ने कहा कि ‘चूम लो आसमान’ किताब की भारत भर में लोकप्रियता का राज यही है कि यह किताब एक सच्चे दोस्त की तरह युवा मन के दिल की गहराई में उतरकर उन्हें जबरदस्त कामयाबी की ओर ले चलती है। साथ ही एक बेहतरीन इंसान भी बनाती है। आरापट्टी के मुखिया शांति लक्ष्मी चौधरी ने कोसी क्षेत्र के सभी युवाओं से यह किताब पढ़ने की अपील की। अखिल भारतीय साहित्य परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष अवधेश कुमार झा ने कहा कि यह हमारे गौरव की बात कि देश भर में विख्यात पुस्तक ‘चूम लो आसमान’ के लेखक महेश कुमार झा रहते भले ही मुंबई में हैं लेकिन मूल रूप से सहरसा जिला के सोनवर्षा प्रखंड के खजुराहा गांव के निवासी हैं।
वरिष्ठ कवि एवं लेखक मुक्तेश्वर प्रसाद सिंह ने ‘चूम लो आसमान’ किताब के लिए बधाई देते हुए कहा कि लेखक की रचनाओं से पिछले तीस वर्षों से अच्छी तरह परिचित हैं और उम्मीद करते हैं कि आने वाले समय में भी अपनी पुस्तकों से समाज के दिशा देने का प्रयत्न करते रहेंगे। दिलीप कुमार झा दद्दी ने सभी निजी विद्यालयों के निदेशकों से अपील की कि वे अपने छात्रों को ‘चूम लो आसमान’ किताब अवश्य पढ़ने को प्रेरित करें, ताकि उनका आने वाला समय कामयाबियों से भरा हो। खजुराहा से पधारे लेखक के पिता कृष्ण कुमार जा ने कहा कि यह पुस्तक युवा वर्ग की दशा एवं दिशा को बेहतर बनाने के लिए एक बेमिसाल कृति है और यह पुस्तक कभी पुरानी नहीं होगी, क्योंकि प्रत्येक देशकाल में युवा वर्ग को इस पुस्तक की जरूरत होगी।
इस अवसर पर कवि सम्मेलन भी आयोजित किया गया। रामेश्वर ठाकुर, मुर्तजा नरियारवी, निखिल कुमार राही, रघुवंश जा आदि कवियों ने अपनी रचनाओं से वहां मौजूद दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। तमान कवियों को सम्मान के साथ-साथ एक एक पौधा देकर अखिल भारतीय साहित्य परिषद ने पर्यावरण के प्रति भी अपनी संवेदना का विस्तार किया। प्रगति क्लासेज के निदेशक कुमार आनंद ने भी ‘चूम लो आसमान’ पुस्तक पर परिचर्चा प्रदान करने के लिए अखिल भारतीय साहित्य परिषद को धन्यवाद दिया।
साहित्य सृजन सम्मान से नवाजे गए ‘चूम लो आसमान’ के लेखक महेश कुमार

