नई दिल्ली। देश में महंगाई को लेकर आम लोगों की चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। अगस्त 2026 में भारत की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.82 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 4.45 प्रतिशत थी। यह मौजूदा 2024-आधारित CPI श्रृंखला में अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है और पिछले करीब 20 महीनों में महंगाई का उच्चतम स्तर माना जा रहा है। महंगाई में यह तेजी मुख्य रूप से खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी और व्यापक उपभोक्ता खर्चों पर बढ़ते मूल्य दबाव के कारण आई है।
खाद्य महंगाई ने बढ़ाई चिंता
अगस्त में खाद्य महंगाई दर बढ़कर 5.95 प्रतिशत हो गई, जबकि जुलाई में यह 5.52 प्रतिशत थी। ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई 6.13 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 5.64 प्रतिशत रही। इसका सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ रहा है। सब्जियों और रोजमर्रा की खाद्य वस्तुओं में कीमतों का दबाव विशेष रूप से दिखाई दिया। अगस्त में प्याज की महंगाई 48.27 प्रतिशत, लहसुन की 43.60 प्रतिशत और अदरक की कीमतों में सालाना आधार पर 73.82 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि टमाटर और आलू की कीमतों में क्रमशः 31.09 प्रतिशत और 13.14 प्रतिशत की गिरावट रही।
ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बढ़ी महंगाई
महंगाई का दबाव केवल ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं रहा। अगस्त में ग्रामीण खुदरा महंगाई 5.23 प्रतिशत और शहरी महंगाई 4.31 प्रतिशत रही। जुलाई में ग्रामीण महंगाई 4.84 प्रतिशत और शहरी महंगाई 3.96 प्रतिशत थी। यानी दोनों क्षेत्रों में कीमतों का दबाव बढ़ा है। खाने-पीने के अलावा दूसरी सेवाओं और वस्तुओं की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली। रेस्तरां और आवास जैसी सेवाओं की महंगाई करीब 8.4 प्रतिशत रही, जबकि कपड़े, घरेलू सामान और शिक्षा जैसी श्रेणियों में भी कीमतों का दबाव व्यापक हुआ है।
कमजोर और असमान मानसून का असर
महंगाई बढ़ने के पीछे कमजोर और असमान मानसून को एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। बारिश की स्थिति का असर कृषि उत्पादन और खाद्य आपूर्ति पर पड़ा है। इससे चीनी, अनाज, दूध, अंडे, मांस और खाद्य तेल जैसी कई आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ा है। इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी भारत के लिए चिंता का विषय है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयातित तेल पर निर्भर है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का असर परिवहन और अन्य वस्तुओं की लागत पर पड़ सकता है।
RBI के सामने बढ़ी चुनौती
खुदरा महंगाई का 4 प्रतिशत का मध्यम अवधि लक्ष्य पार करना रिजर्व बैंक के लिए भी चुनौती है। हालांकि अगस्त की 4.82 प्रतिशत महंगाई अभी RBI की 2 से 6 प्रतिशत की सहनशीलता सीमा के भीतर है, लेकिन लगातार बढ़ती कीमतें भविष्य की मौद्रिक नीति को प्रभावित कर सकती हैं। RBI ने हालिया बैठक में रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखा था। लेकिन यदि खाद्य और ईंधन से जुड़ा दबाव अन्य क्षेत्रों में भी फैलता है, तो आने वाली मौद्रिक नीति बैठकों में ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख की संभावना बढ़ सकती है।
थोक महंगाई में भी तेजी
खुदरा महंगाई के साथ-साथ थोक कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज हुई है। अगस्त में भारत की थोक महंगाई दर 9.92 प्रतिशत रही, जो जुलाई के 9.78 प्रतिशत से अधिक है। थोक महंगाई में खाद्य वस्तुओं के साथ-साथ ईंधन, बिजली और विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी का योगदान रहा।
आम आदमी की जेब पर असर
महंगाई बढ़ने का सबसे सीधा असर आम परिवारों के मासिक बजट पर पड़ता है। खाद्य वस्तुओं, परिवहन, घरेलू सामान और सेवाओं की कीमतें बढ़ने से परिवारों को समान आय में पहले की तुलना में अधिक खर्च करना पड़ता है। यदि यह दबाव लंबे समय तक बना रहता है, तो लोगों की बचत और गैर-जरूरी खर्चों पर भी असर पड़ सकता है। अगस्त की 4.82 प्रतिशत खुदरा महंगाई फिलहाल RBI की सहनशीलता सीमा के अंदर है, लेकिन लगातार ऊपर जाती खाद्य महंगाई और वैश्विक तेल कीमतों के जोखिम के कारण आने वाले महीनों में महंगाई पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
देश में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82% पर पहुंची, 20 महीने के उच्चतम स्तर पर

