विकास धाकड़/गोरेगांव (मुंबई)। अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी के तत्वाधान में अणुव्रत समिति मुंबई क्षेत्र गोरेगांव में उद्बोधन सप्ताह के अंतर्गत आज दूसरे दिन अहिंसा दिन का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत नमस्कार महामंत्र के साथ अणुव्रत गीत के संगान के साथ उपासक महोदय प्रखर वक्ता श्री सुरेश जी ओस्तवाल ने की। पधारे सभी अतिथियों का एवं अणुव्रत परिवार और पुरे समाज का स्वागत अणुव्रत संयोजक शांतिलाल जी बाफना ने किया।
उन्होंने कहा कि अहिंसा दिवस अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का एक हिस्सा है, जिसे आमतौर पर 1 अक्टूबर से शुरू होने वाले सप्ताह में यह दिन मनाया जाता है. यह दिन अणुव्रत आंदोलन के माध्यम से आत्म-अनुशासन और आत्म-संयम को बढ़ावा देने पर केंद्रित होता है, जिसमें छोटे-छोटे नियमों का पालन करने पर जोर दिया जाता है, जैसे बच्चों को अणुव्रत के 11 नियमों की शपथ दिलाना. अणुव्रत अहिंसा दिवस का उद्देश्य: आत्म-संयम और आत्म-अनुशासन को बढ़ावा देना: यह दिवस लोगों को छोटी-छोटी प्रतिज्ञाएं लेने और जीवन में आत्म-नियंत्रण अपनाने के लिए प्रेरित करता है। अणुव्रत के सिद्धांतों का प्रचार: इस दिन के माध्यम से अणुव्रत आंदोलन के सिद्धांतों को आम जनता तक पहुँचाया जाता है, जिसमें अहिंसा, ब्रह्मचर्य, और उपभोक्तावाद से दूरी जैसे विषय शामिल है। सकारात्मक जीवन शैली को प्रोत्साहित करना। यह दिन लोगों को शांत, अहिंसक और समावेशी समाज के निर्माण में योगदान करने के लिए प्रेरित करता है।
इस अवसर पर सभा अध्यक्ष सुभाष जी सिंघवी मंत्री विनोद जी सिंघवी नें भी अपनी भावना व्यक्त की,मुख्य वक्ता के रूप में प्रवक्ता उपासक श्री सुरेश जी ओस्तवाल नें अहिंसा दिवस पर विस्तार सें प्रकाश डालते हुए अहिंसा के ऊपर लघु कहानी के द्वारा धर्म सभा कों सम्बोधित किया। बिशनदासजी गोयल {कलकत्ता} के जीवन का प्रेरणादायक घटनाक्रम सुनाकर सभी कों प्रेरित किया। अणुव्रत के बारे में कहा कि अणुव्रतों द्वारा अपने साथ जीवन की दिशा एवं दशा सुधरती है। अनुशासन तेरापंथ धर्म संघ का प्राण है हम अनुशासित जीवन अपनाकर जीवन को सफल बना सकतें है, उपस्थित धर्म परिवार कों अणुव्रत के 11 नियम के बारे में विस्तार सें प्रकाश डाला और नशा मुक्त रहने के लिए सभी कों शपथ दिलाई, असली आजादी के मापदंड को समझाया व चिंतन करने को कहा – क्या हमारी स्वतंत्रता दूसरों की स्वतंत्रता में बाधक तो नहीं, क्या हमारी स्वतंत्रता मानव को प्रमादी,अविवेकी दानव तो नहीं बना रही या क्या हमारी स्वतंत्रता मानव को विकास की तरह ले जा रही है या हास की तरफ़ ? असली आजादी के लिए अणुव्रत एक बहुत बड़ी राह है और इसके मूल बिंदु है – मानवीय मूल्यों की रक्षा, प्रमाणिकता, अहिंसा, संयम, सत्य, प्रमार्थ चेतना, नैतिकता, मैत्री व व्यसन मुक्त जीवन। हमारे शरीर मे जो अनंनत शक्ति का श्रोत है उसे जागृत कर असली आजादी का जश्न मनाए।
गुरूदेव तुलसी के अवदान को अपनाकर हम भी अपना जीवन को महान बना सकते है। एवं सभी कों अणुव्रत के 11 नियम कों आत्मसात करने के लिए प्रेरित किया, इस अवसर पर अणुव्रत परिवार मुंबई सें श्री राकेश बोहरा की विशेष उपस्थिति रही, इसको सफल बनाने में श्री शांतिलाली कोठारी, श्री विमलजी सांखला, श्री दिलीपजी बाफना आदि की सराहनीय उपस्थिति रही, कार्यक्रम का कुशल संचालन एवं आभार ज्ञापन ABTYP JTN प्रतिनिधि श्री विकास धाकड़ नें किया
गोरेगांव (मुंबई) अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी के तत्वाधान में अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के अंतर्गत गोरेगाँव में अहिंसा दिवस भव्य आगाज

