विकास धाकड़/मुंबई। युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी की विदुषी सुशिष्या साध्वी श्री राकेश कुमारी जी,मलय विभा जी, विपुल यशा जी, चेतस्वी प्रभा जी के सान्निध्य में गोयल भवन में अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का मंगल शुभारंभ हुआ। सप्ताह के प्रथम दिवस को ‘अणुव्रत प्रेरणा दिवस’ के रूप में मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं द्वारा सामूहिक अणुव्रत संगान से हुआ। क्षेत्र की अणुव्रत संयोजिका मोना जी नौलखा ने सभी का स्वागत करते हुए अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह की जानकारी दी। साध्वी श्री राकेश कुमारी जी ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि जब विश्व हिंसा, युद्ध और अशांति के दौर से गुजर रहा था तब गणाधिपति गुरुदेव तुलसी ने अणुव्रत आंदोलन का सूत्रपात कर मानवता को नैतिक जीवन की दिशा प्रदान की।
अणुव्रत आंदोलन गरीब की झोपड़ी से लेकर राष्ट्रपति भवन तक पहुँचा और राजनेताओं, साहित्यकारों, विद्वानों एवं वैज्ञानिकों सहित समाज के विभिन्न वर्गों को इससे जोड़ा। उन्होंने कहा कि अणुव्रत मानवीय मूल्यों की सुरक्षा, स्वस्थ आचार-संहिता एवं स्वस्थ समाज के निर्माण का आंदोलन है। इसका उद्देश्य व्यक्ति के जीवन में प्रामाणिकता, नैतिकता एवं चरित्र-शुद्धि स्थापित करना है। लाखों लोगों ने अणुव्रत के संकल्पों को स्वीकार कर नशामुक्त एवं संयमित जीवन की ओर कदम बढ़ाए हैं। विद्यालयों एवं विभिन्न संस्थानों तक भी अणुव्रत का संदेश पहुँचा है। साध्वीश्री जी ने अणुव्रत आंदोलन से जुड़े अपने कुछ संस्मरण भी साझा किए।
अणुव्रत के साथ अहिंसा के महत्व को बताते हुए साध्वीश्री जी ने कहा कि अहिंसा धर्म की आधारशिला और विश्व बंधुत्व का मार्ग है। अहिंसा केवल किसी को शारीरिक कष्ट न पहुँचाने तक सीमित नहीं, बल्कि हमारी वाणी और व्यवहार में भी होनी चाहिए। कठोर शब्द एवं कटु व्यवहार भी संबंधों को आहत करते हैं। अहिंसा को जीवन में उतारने से परिवार, समाज और राष्ट्र में शांति एवं सौहार्द की भावना मजबूत होती है। इस संदर्भ में उन्होंने आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के सूरत चातुर्मास तथा डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम से जुड़े प्रसंग का भी उल्लेख किया। इस अवसर पर दिलीप जी धींग ने 4 अक्टूबर को पर्यावरण दिवस के अंतर्गत आयोजित होने वाली मैराथॉन रैली की जानकारी दी। सीमा जी मेहता, रेखा जी कोठारी एवं मोना जी नौलखा ने अहिंसा पर अपने भावों की अभिव्यक्ति दी। अंत में रेखा जी कोठारी ने आभार ज्ञापन किया। साध्वीश्री जी के मंगलपाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
विलेपार्ले अणुव्रत संगान से हुआ अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का मंगल शुभारंभ

