विलेपार्ले {मुंबई} विकास धाकड़। विलेपार्ले स्थित गोयल भवन के प्रांगण में आज प्रज्ञा पुरुष आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी का 107वां जन्म दिवस अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ ‘प्रज्ञा दिवस’ के रूप में मनाया गया। यह भव्य एवं मांगलिक कार्यक्रम साध्वी श्री राकेश कुमारी जी आदि ठाणा-4 के पावन सानिध्य में गरिमापूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। इस अवसर पर संपूर्ण तेरापंथ समाज ने गुरुदेव के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की।मंगलाचरण और प्रेरणादायी जीवन-वृत्त प्रस्तुत किया गया,कार्यक्रम का शुभारंभ विलेपार्ले महिला मंडल द्वारा प्रस्तुत सुमधुर मंगलाचरण के साथ हुआ, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। इसके पश्चात वरिष्ठ उपासक श्री गंभीरमल जी ने आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के जीवन-वृत्त, उनके दर्शन और समाज के प्रति उनके महान अवदानों पर विस्तृत प्रकाश डाला।
सांताकृज महिला मंडल की बहनों ने भी सुमधुर गीतिका के माध्यम से अपनी अभिव्यक्ति प्रस्तुत की। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए साध्वी श्री मलयविभाजी ने आचार्य प्रवर के जीवन से जुड़े कई प्रेरक और रोचक प्रसंग साझा किए, जिन्होंने उपस्थित जनमेदिनी को गहराई से प्रेरित किया। ‘नथमल’ से ‘महाप्रज्ञ’ बनने की ऐतिहासिक यात्रा का मुख्य प्रवचन में पूज्य साध्वी श्री राकेश कुमारी जी ने आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी की प्रज्ञा, ध्यान साधना और अद्भुत अध्यात्म यात्रा को रेखांकित किया। सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “पूज्य गुरुदेव वास्तव में प्रज्ञा के अक्षय धनी थे। उन्होंने अपने महान गुरुओं-आचार्य श्री कालूगणी जी एवं आचार्य श्री तुलसी जी के सानिध्य में रहकर अपने जीवन को विकास के सर्वोच्च शिखरों तक पहुँचाया।
“साध्वी जी ने आगे कहा कि गुरुकृपा, समर्पण, विनम्रता, सरलता और अनवरत योग साधना के बल पर ही एक साधारण बालक ‘नत्थू’ (नथमल) से जैन शासन के महान ‘महाप्रज्ञ’ बनने की ऐतिहासिक यात्रा संभव हो सकी। उनका जीवन हर साधक के लिए एक जीवंत मार्गदर्शिका है। चातुर्मास को सफल बनाने का आह्वान साध्वी श्री राकेश कुमारी जी ने आगामी आध्यात्मिक साधना काल की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए श्रावक-श्राविकाओं को प्रेरित किया। उन्होंने आह्वान किया कि तप, जप, ध्यान और नियमित प्रवचनों के माध्यम से आत्म-कल्याण करते हुए चातुर्मास को सफल बनाना तथा मोक्ष रूपी अभिष्ट मंजिल को प्राप्त करना ही हर जैन श्रावक का मुख्य लक्ष्य होना चाहिए।
इस पूरे गरिमापूर्ण कार्यक्रम का कुशल और प्रभावी संचालन साध्वी विपुलयशा जी ने किया। समारोह में विलेपार्ले, सांताक्रुज, बान्द्रा, अंधेरी, बोरीवली सहित मुंबई के विभिन्न उपनगरों से आए श्रावक और श्राविकाओं की उपस्थिति अत्यंत सराहनीय रही।विलेपार्ले सभा के अध्यक्ष श्री महेंद्र जी बडाला द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस जन्मोत्सव ने पूरे समाज में नए उत्साह और धार्मिक चेतना का संचार किया है। कार्यक्रम के अंत में सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
विलेपार्ले में ‘प्रज्ञा दिवस’ के रूप में मनाया गया आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी का 107 वां जन्मोत्सव

