राघवेंद्र प्रताप सिंह, कैसरगंज (उ.प्र.)। तहसील, ब्लॉक और अब नगर पंचायत का दर्जा प्राप्त कर चुके कैसरगंज में खेल और खिलाड़ियों का भविष्य सुविधाओं के अभाव में अंधेरे में है। यहां एक भी व्यवस्थित स्टेडियम या खेल का मैदान न होने के कारण प्रतिभाशाली युवा बच्चों को अपनी प्रैक्टिस के लिए हर दिन लगभग 36 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय बहराइच तक का सफर तय करना पड़ता है।
प्रतिभा है, पर मंच नहीं:
कैसरगंज के कई युवा ऐसे हैं जिनमें खेल कूद और व्यायाम के क्षेत्र में बेहतरीन प्रतिभा है। लेकिन स्थानीय स्तर पर कोई खेल सुविधा न होने के कारण उनकी प्रतिभा दम तोड़ रही है। हर दिन इतनी लंबी यात्रा करना न केवल समय और पैसे की बर्बादी है, बल्कि यह उनकी ऊर्जा और पढ़ाई पर भी नकारात्मक असर डालता है। एक स्थानीय कोच (या खिलाड़ी) ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हमारे कई बच्चों में राष्ट्रीय स्तर पर खेलने की क्षमता है, लेकिन उन्हें सुबह-शाम 70 किलोमीटर से अधिक की यात्रा करनी पड़ती है। यह सफर उन्हें थका देता है और वे पूरी क्षमता से प्रैक्टिस नहीं कर पाते। यदि कैसरगंज में ही मिनी स्टेडियम बन जाए, तो हमारे क्षेत्र से कई चैंपियन निकलेंगे।”
जिला मुख्यालय का महंगा सफर:
युवाओं के लिए जिला मुख्यालय बहराइच तक का सफर महंगा भी साबित होता है। गरीब परिवारों के बच्चे इस दैनिक खर्च को उठाने में असमर्थ होते हैं, जिससे कई खिलाड़ी बीच में ही अपना अभ्यास छोड़ देते हैं। यह केवल एक खेल का मुद्दा नहीं है, बल्कि ग्रामीण प्रतिभाओं को मुख्यधारा से जोड़ने का भी सवाल है।
युवा कल्याण के दावों पर सवाल:
एक ओर राज्य सरकारें ग्रामीण क्षेत्रों में खेल सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए मिनी स्टेडियम बनाने की घोषणाएं कर रही हैं, वहीं कैसरगंज जैसे महत्वपूर्ण केंद्र पर एक भी व्यवस्थित खेल मैदान का न होना स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के दावों पर सवाल खड़ा करता है। युवा खिलाड़ियों और स्थानीय निवासियों ने अब एक स्वर में तहसील मुख्यालय पर जल्द से जल्द एक मिनी स्टेडियम या एक व्यवस्थित खेल मैदान के निर्माण की मांग की है। उनकी मांग है कि सरकार और प्रशासन इस ओर ध्यान दे ताकि कैसरगंज की खेल प्रतिभाओं को ‘पंख कटे’ हालत में 36 किलोमीटर दूर जाने को मजबूर न होना पड़े।

