विकास धाकड़/विलेपार्ले। साध्वी श्री राकेश कुमारी जी ठाणा-4 के पावन सान्निध्य में गणाधिपति गुरुदेव तुलसी के 30वें महाप्रयाण दिवस का श्रद्धा एवं भावपूर्ण वातावरण में आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ साध्वी श्री जी के नवकार मंत्र के सामूहिक उच्चारण से हुआ। इसके पश्चात साध्वी श्री विपुलयशा जी ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया।
तेयूप विलेपार्ले से भूपेन्द्र जी डागलिया ने कविता के माध्यम से अपने भाव व्यक्त किए। इसके उपरांत सुशील जी खटेड़ ने अपनी श्रद्धाभिव्यक्ति प्रस्तुत की। सांताक्रूज महिला मंडल ने गीतिका के माध्यम से अपनी मनोहारी प्रस्तुति दी। विलेपार्ले महिला मंडल ने गुरुदेव तुलसी के विविध अवदानों को प्रभावशाली प्रस्तुति के माध्यम से प्रस्तुत करते हुए उनके व्यक्तित्व एवं कर्तृत्व पर प्रकाश डाला। साध्वी श्री विपुलयशा जी ने गुरुदेव तुलसी के व्यक्तित्व के पाँच बिंदु बताए—प्रज्ञा, वात्सल्य, पराक्रम, प्रोत्साहन एवं प्रबंधन—पर विस्तार से प्रकाश डाला। आपने कहा कि गुरुदेव की आंतरिक प्रज्ञा सदैव जागृत रहती थी। वे वात्सल्य से परिपूर्ण थे तथा जिस कार्य का संकल्प कर लेते, अनेक बाधाओं के आने पर भी उससे पीछे नहीं हटते और उसे पूर्ण करके ही दम लेते थे। वे प्रत्येक व्यक्ति को निरंतर प्रोत्साहित करते थे तथा उनकी प्रबंधन शैली भी अत्यंत अनूठी एवं प्रेरणादायी थी।
साध्वी श्री मलयविभा जी ने कविता के माध्यम से गुरुदेव तुलसी की दूरदर्शी सोच, उच्च दृष्टि, महान भावों एवं अनुपम गुणों का भावपूर्ण गुणगान किया। आपने यह भी कहा कि आचार्य महाप्रज्ञ एवं आचार्य महाश्रमण जैसे दो अनमोल रत्न इस तेरापंथ संघ को गुरुदेव तुलसी की ही अमूल्य देन हैं। अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में साध्वी श्री राकेश कुमारी जी ने कहा कि उनके दीक्षा प्रदाता आचार्य तुलसी उनके जीवन की रक्तधारा एवं कण-कण में समाए हुए हैं। आपने कहा कि गुरुदेव की दृष्टि से जहाँ वात्सल्य की वर्षा होती थी, वहीं उसी दृष्टि में अनुशासन का अद्भुत संतुलन भी विद्यमान रहता था।
साध्वी श्री जी ने गुरुदेव तुलसी को एक शलाका पुरुष बताते हुए कहा कि उनका जीवन तेजस्वी, ओजस्वी एवं वर्चस्वी रहा। उनका चिंतन साहित्यकारों, वैज्ञानिकों एवं समाज के विभिन्न क्षेत्रों के प्रबुद्धजनों के साथ निरंतर होता था। गरीब की झोपड़ी से लेकर राष्ट्र के सर्वोच्च नेतृत्व तक उनका आत्मीय संपर्क था और वे सभी की समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करते थे। ऐसा कोई विषय नहीं था, जिस पर गुरुदेव तुलसी ने मार्गदर्शन न दिया हो। उनकी दृष्टि में सभी समान थे; कोई बड़ा या छोटा नहीं था। सभी साध्वी श्री जी के गीतिका से कार्यक्रम का संपन्न हुआ। कार्यक्रम का कुशल एवं प्रभावी संचालन साध्वी श्री चेतस्वी प्रभा जी ने किया। पुरे समाज सें सराहनीय उपस्थिति रही।
विलेपार्ले में गणाधिपति गुरुदेव श्री तुलसी के 30वें महाप्रयाण दिवस का श्रद्धापूर्वक आयोजन

