वाशी। आचार्य श्री महाश्रमण जी की विदुषी साध्वी श्री शासन श्री जिनरेखा जी एवं सवर्तिनी साध्वी वृन्द के सानिध्य में पर्युषण पर्व का दूसरा दिवस स्वाध्याय दिवस मनाया ।कार्यक्रम का शुभारंभ सुमित श्रीमाल ने मंगलाचरण से किया। साध्वी धवालप्रभाजी ने कहा अपने आपको जानता है पहचानता है और अपने भाग्य को सवार्ता है, चरित्र निर्माण में स्वाध्याय में महत्व पूर्ण भूमिका रहती है। स्वाध्याय का अर्थ है स्वस्थ अध्यन इति स्वाध्याय है। आला के अंदर अनंत जन्मों के संस्कार भरे है,उसको जाग्रत करने का माध्यम है स्वाध्याय। शाशन श्री जिनरेखाजी अपने प्रेरक उध्बोधन में कहा, भगवान महावीर ने 27 भाव किये है। प्रत्येक आत्मा कर्मानुसार परीभ्रमण करती है। कभी नरक में कभी स्वर्ग में कभी मनुष्य में कभी तिर्यंच में। एक भाव महावीर की आत्मा भी इसमें अपवाद नही रही। कालचक्र के दो विभाग बन जाते है। उत्सर्पिणिकाल,अवसर्पिणीकाल सीधी भाषा मे विकासकाल ओर हास काल कहा जा सकता है। दोनों काल खड़ो में 6-6विभाग होते है। पंचमआरा 21000वर्ष होते है।आयु 100वर्ष से कुछ अधिक शरीर प्रमाण सात हाथ होती है। चतुर्थ आचार्य श्री जितमलजी स्वामी कम उम्र 10वर्ष की उम्र में दीक्षा ली। भगवती के सूत्र का सुदमता से अध्यन और अनुवाद किया।उनकी एकाग्रता बड़ी विलक्षण थी।
कार्यक्रम में मुख्य उपस्तिथि तेरापंथ सभा अध्यक्ष सम्पतजी वागरेचा, मंत्री दिनेशजी हिरण, अणुव्रत ट्र्स्ट से लादुलालजी श्रीश्रीमाल, उत्तमजी छाजेड़, तेयुप अध्यक्ष रंजीतजी खाटेड, मंत्री अर्जुनजी सोनी,कोषाध्यक्ष जीतुजी बाफना, महिला मण्डल ससयोजिक रेखाजी कोठारी, कमलेशजी बोहरा, बलवंतजी चोरडिया, अमृतजी खाटेड,पवनजी परमार,पंकजजी चंडालिया,सुशीलजी मेडतवाल, प्रवीणजी चोरडिया, गणपतिजी गुंदेचा, मुकेशजी डूंगरवाल, पंकजजी भटेवरा,चिरागजी आच्छा, दिलीपजी सिंघवी, महावीरजी आच्छा, सुरेशजी भंसाली, शांतिलालजी धोका, हस्तीमलजी चंडालिया, अजितजी कच्छारा, सुनीलजी सोनी, अशोकजी धर्मावत, अरविंदजी सुकलेचा, भगवतीलालजी गुंदेचा राजेश चौधरी , सुरेश मादरेचा, हिम्मत कोठारी, दिलीप सिंघवी आदि गन्मानयो की उपस्तिथि रही।
कार्यक्रम का कुशल संचालन तेयुप निवर्तमान अध्यक्ष पवन परमार ने किया। यह जानकारी राजू कावड़िया ने दी।
वाशी में स्वाध्याय दिवस मनाया

