मुंबई। भारतीय जनता पार्टी को महिला आरक्षण पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है। भाजपा की विचारधारा गोलवलकर के ‘बंच ऑफ थॉट’ और ‘मनुस्मृति’ पर आधारित है, जिसमें महिलाओं को अत्यंत निम्न दर्जे का माना गया है। चातुर्वर्ण्य व्यवस्था को स्वीकार करने वाली इस मनुवादी सोच वाली पार्टी को पहले ‘बंच ऑफ थॉट’ और ‘मनुस्मृति’ की होली जलानी चाहिए, और उसके बाद ही महिला आरक्षण पर बोलना चाहिए। साथ ही, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक पद पर महिला की नियुक्ति करके दिखाएं, ऐसा चुनौती महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने दी है।
तिलक भवन में मीडिया से बातचीत करते हुए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने आगे कहा कि महिला आरक्षण पर बोलते समय भाजपा को महिलाओं के प्रति अपना दृष्टिकोण स्पष्ट करना चाहिए। सावित्रीबाई फुले ने जब लड़कियों के लिए पहली स्कूल शुरू की थी, तब उन पर गोबर फेंकने वाले कौन थे, यह भाजपा को बताना चाहिए। सावित्रीबाई का इन तथाकथित धर्मरक्षकों ने उत्पीड़न किया था, इसलिए महिलाओं के प्रति भाजपा का दिखावटी प्रेम सबको मालूम है। संसद में महिला आरक्षण विधेयक 2023 में सभी दलों के समर्थन से पारित हो चुका है। 16 अप्रैल को लोकसभा में जो विधेयक पेश किया गया था, वह डिलिमिटेशन से जुड़ा था। इस विधेयक के जरिए भाजपा देश को बांटना चाहती थी और मुंबई तथा महाराष्ट्र को ‘गायपट्टा’ में बदलने की साजिश थी। भाजपा नेता डिलिमिटेशन पर कुछ भी नहीं बोल रहे हैं। भाजपा के इस मंसूबे को इंडिया गठबंधन ने समझा और उस विधेयक का विरोध किया। भाजपा विपक्षी दलों को महिला विरोधी बताने की कोशिश कर रही है। महिलाओं को सबसे पहले कांग्रेस पार्टी ने स्थानीय स्वराज संस्थाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण दिया और बाद में इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया। महिला आरक्षण के नाम पर राजनीति करना भाजपा को बंद करना चाहिए, ऐसा भी सपकाल ने कहा।
भाजपा की धमकियों से न डरें…
महिला आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा द्वारा वर्ली में निकाले गए मोर्चे के दौरान एक स्थानीय महिला ने नाराजगी जताते हुए मंत्री गिरीश महाजन को खरी-खरी सुनाई। इस महिला ने मोर्चे से हुई परेशानी को लेकर गुस्सा जाहिर किया और यह वीडियो पूरे देश में वायरल हो गया। अपनी किरकिरी होने के बाद अब भाजपा के लोग इस मोर्चे की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को ही धमका रहे हैं। यह वीडियो कांग्रेस के ट्विटर हैंडल से भी पोस्ट किया गया था और यह कांग्रेस तक कैसे पहुंचा, इसकी पूछताछ की जा रही है। लेकिन कांग्रेस ऐसी धमकियों से डरने वाली नहीं है और पत्रकारों को भी भाजपा की धमकियों से डरना नहीं चाहिए, ऐसा भी सपकाल ने कहा।
खरगे जी के बयान का गलत अर्थ निकाला जा रहा है…
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। उनके बयान का गलत अर्थ निकाला जा रहा है। नरेंद्र मोदी ईडी और सीबीआई के माध्यम से डर और दबाव की राजनीति कर रहे हैं। भाजपा ने इस बयान को लेकर चुनाव आयोग में शिकायत की है, लेकिन चुनाव आयोग को तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और असम में चुनावों के दौरान भाजपा द्वारा किए गए कृत्यों पर भी ध्यान देना चाहिए, ऐसा भी हर्षवर्धन सपकाल ने कहा।

