वाशी। पर्युषण महापर्व के द्वितीय दिवस स्वाध्याय दिवस के रूप में कार्यक्रम तेरापंथ समाज वाशी द्वारा भिक्षु महाश्रमण फाउंडेशन वाशी नवी मुंबई में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ नमस्कार महामंत्र से किया गया, मंगलाचरण तेरापंथ महिला मंडल नेरुल नवी मुंबई द्वारा किया गया।
युग प्रधान महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी के आध्यात्मिक निर्देशन में मुमुक्षु श्रेणी से पर्युषण महापर्व के महान अवसर पर धर्म आराधना कराने के लिए मुमुक्षु प्रेक्षाजी ने प्रेक्षा ध्यान करवाया।
मुमुक्षु भावनाजी ने मंगल उद्बोधन द्वारा, स्वाध्याय दिवस के बारे में वर्णन किया। उत्तराध्ययन और दशवैकालिक आगमों के आधार पर बताया कि स्वाध्याय से ज्ञानावरणीय कर्मों का क्षय होता है। पहले ज्ञान प्राप्त करके फिर ही दया धर्म का पालन किया जा सकता है।
ज्ञान प्राप्त होगा तो हेय, उपादेय की जानकारी होगी। हेय को छोड़ेगा तो त्याग, त्याग से संयम, संयम से अनाश्रव, अनाश्रव से तप, तप से निर्जरा और निर्जरा से मुक्ति मिलेगी। फिर भाव और लेश्याओं का दो उदाहरणों के द्वारा विस्तृत विवेचन किया और राजा अरिदमन तथा मुनिश्री कीर्तिधर जी की कहानी की शुरुआत की।
मुमुक्षु शेफालीजी ने स्वाध्याय दिवस के बारे में उद्बोधन देते हुए बताया कि स्वाध्याय के पाँच प्रकार हैं-वाचना, प्रति-पृच्छना, परावर्तना, अनुप्रेक्षा. धर्मकथा। उन्होंने समझाया कि स्वाध्याय से ज्ञानावरणीय कर्मों का क्षय होता है।
मुमुक्षु अर्चनाजी ने बताया कि स्वाध्याय से ज्ञान प्राप्त होता है। कहानी के माध्यम से बताया। श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा वाशी अध्यक्ष पंकजजी चंडालिया ने सबका स्वागत किया एवं सूचनाएँ दी गई।
तेरापंथ सभा,युवक परिषद, महिला मंडल,भिक्षु महाश्रमण फाउंडेशन, अणुव्रत ट्रस्ट, किशोर मंडल,कन्या मंडल,ज्ञानशाला परिवार, तेरापंथ वाशी श्रावक समाज, वाशी नवी मुंबई के सभी कार्यकर्ताओं की विशेष उपस्थिति रही। कार्यक्रम का कुशल संचालन तेरापंथ सभा वाशी प्रवीणजी चौरडिया ने किया। यह जानकारी मीडिया प्रभारी राकेश राठौड ने दी।
वाशी मे पर्युषण महापर्व पर द्वितीय स्वाध्याय दिवस मनाया

