नई दिल्ली:देश में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, आवास, रोजगार पर बढ़ते दबाव को देखते हुए दो बच्चों की नीति अनिवार्य करने की मांग तेज हो गई है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को चीन से सबक लेकर ही इस मुद्दे पर कोई निर्णय लेना चाहिए।
जेएनयू प्रोफेसर अनुपमा रॉय ने कहा, जनसंख्या को लेकर कोई नीति बने या न बने, इस पर राष्ट्रव्यापी बहस की जरूरत है। केंद्र, राज्यों और अन्य संबंधित संस्थाओं को मिलकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए। इंस्टीट्यूट ऑफ चाइनीज स्टडीज की उपाध्यक्ष श्रीमती चक्रवर्ती के मुताबिक, चीन का सबक यही कहता है कि भारत को ऐसा कोई अनिवार्य कानून नहीं बनाना चाहिए। सस्ती-सुलभ शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के यह अपनेआप कम हो जाएगी।
चीन का उदाहरण देते हुए चक्रवर्ती ने कहा कि वहां एक बच्चे की नीति के कारण भ्रूणहत्या, गर्भपात के मामले कई गुना बढ़ गए। यूरोप में ऐसी कभी कोई नीति नहीं आई, जबकि जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश तो आबादी बढ़ाने को प्रोत्साहन दे रहे हैं।
जनसंख्या नियंत्रित करने की वकालत
13 अगस्त 2018 दो बच्चों से संबंधित राष्ट्र नीति को जल्द लागू कराने के लिए 125 सांसदों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को एक याचिका सौंपी।
15 अगस्त 2019 को स्वतंत्रता दिवस पर संबोधन में पीएम मोदी ने जनसंख्या विस्फोट पर चिंता जताई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि छोटा परिवार रखने वाले देशभक्त की तरह हैं।
10 जनवरी 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की मांग पर केंद्र को जारी किया नोटिस 18 जनवरी 2020 को आरएसएस के सर संघचालक मोहन भागवत ने जनसंख्या नियंत्रण का मुद्दा उठाया। असदुद्दीन ओवैसी समेत कई विपक्षी नेताओं ने विरोध जताया।
देश में बुजुर्गों की तादाद भी बढ़ेगी
आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 के मुताबिक, 2040 तक भारत में बुजुर्गों की आबादी 16 फीसदी तक पहुंच जाएगी वह वर्ष 2050 तक यह संख्या 33 करोड़ पार कर जाने का अनुमान है।
सात साल बाद सबसे बड़ी आबादी भारत की होगी
भारत 2027 तक दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश होगा। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की आबादी 2027 तक 158 करोड़ हो जाएगी, जो अभी 131 करोड़ है। वहीं चीन की जनसंख्या 2027 में 153 करोड़ तक रहेगी।
चीन ने खत्म की एक बच्चे की नीति
चीन ने वर्ष 1979 में ही एक बच्चे की नीति लागू कर दी थी। उस वक्त आबादी 97 करोड़ थी जो 2019 में 139 करोड़ रही। सरकार का दावा है कि इस नीति से 40 करोड़ कम बच्चे पैदा हुए। लेकिन कामगार आबादी में तेज गिरावट से चीन ने 2016 में इसे वापस ले लिया और दो बच्चों की इजाजत दे दी।

