राजकुमार गौतम, बस्ती (उ० प्र०)। सरयू नदी पर बने टांडा पुल की मरम्मत कार्य की धीमी रफ्तार अब लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। बस्ती, अकबरपुर, आज़मगढ़ और बनारस को जोड़ने वाला यह पुल क्षेत्र की प्रमुख आर्थिक व परिवहन धुरी है। लगभग 2.32 किलोमीटर लंबा यह पुल कलवारी-माझा सरयू (घाघरा) नदी पर बना है और पिछले एक दशक में कई बार मरम्मत के लिए बंद किया जा चुका है। 11 सितम्बर से पुल पर बड़े और चार पहिया वाहनों का आवागमन पूरी तरह रोक दिया गया है।
वर्तमान में केवल दोपहिया वाहनों को सीमित दायरे में गुजरने की अनुमति है। मरम्मत कार्य शुरू तो कर दिया गया है, लेकिन रफ्तार बेहद सुस्त है। तीन माह में पूरा होने का दावा किया गया काम अब छह माह तक खिंचने की संभावना जताई जा रही है। इस पुल का शिलान्यास मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्रीत्व काल में तत्कालीन लोक निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने किया था और लगभग 10 साल बाद अखिलेश सरकार में शिवपाल सिंह यादव ने ही इसका उद्घाटन किया। लेकिन उद्घाटन के कुछ समय बाद ही पुल में निर्माण संबंधी खामियां उजागर हो गईं। सूत्रों के अनुसार निर्माण के समय घटिया सामग्री का इस्तेमाल और कमीशनखोरी की वजह से पुल की संरचना कमजोर पड़ गई। पुल बंद होने से व्यापारिक गतिविधियों पर गहरा असर पड़ा है। बस्ती व आसपास के जिलों के व्यापारी बनारस से माल ढुलाई के लिए इसी मार्ग को प्राथमिकता देते थे क्योंकि यह सबसे छोटा व सुविधाजनक रास्ता था।
अब उन्हें लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है, जिससे समय और परिवहन लागत दोनों बढ़ गई हैं। वहीं स्कूली बच्चों, मरीजों और आम यात्रियों को भी लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। एक व्यापारी ने बताया, “पहले बस्ती से बनारस माल भेजने में आधा दिन लगता था, अब एक दिन से ज्यादा लग रहा है। खर्च भी दोगुना हो गया है।” मरम्मत कार्य की धीमी रफ्तार से लोगों में गुस्सा बढ़ रहा है। नागरिकों का कहना है कि काम जिस सुस्ती से चल रहा है, उसे पूरा होने में साल भर से ज्यादा भी लग सकता है। लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर काम में तेजी नहीं लाई गई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। टांडा पुल की मरम्मत कार्य की रफ्तार बढ़ाना प्रशासन और निर्माण एजेंसी के लिए अब बड़ी चुनौती बन गया है। यह पुल न केवल आवागमन का अहम जरिया है बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था की धड़कन भी है। मरम्मत में देरी ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
टांडा पुल बना सिरदर्द, मरम्मत की सुस्त रफ्तार से यात्रियों व व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ीं

