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सुप्रीम कोर्ट ने कहा- केंद्र और दिल्ली सरकार एक-दूसरे पर आरोप लगाने की बजाय कदम उठाएं

Last updated: November 4, 2019 3:56 pm
Surabhi Saloni
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6 Min Read
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नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में सोमवार को भी हवा की गुणवत्ता में कोई सुधार नजर नहीं आया। गुड़गांव में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 800 से ज्यादा दर्ज हुआ, जो सीजन में सबसे अधिक है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के प्रदूषण पर कहा कि केंद्र और दिल्ली सरकार एक-दूसरे पर आरोप लगाने की बजाय कदम उठाएं।
दिल्ली में रविवार को एक्यूआई 700 से ज्यादा पहुंचा था। एक सर्वे में दिल्ली-एनसीआर के 40% लोगों ने कहा कि वे शहर छोड़कर कहीं और जाकर बसना चाहते हैं। सर्वे में 17 हजार लोग शामिल थे।
इस स्थिति के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- यह चीजें हर साल हमारी नाक के नीचे हो रही हैं। लोगों से कहा जा रहा है कि आप दिल्ली मत आइए या इस जगह को छोड़ दीजिए। राज्य सरकार इसके लिए जिम्मेदार है। लोग उनके शासन में मर रहे हैं। पड़ोसी राज्य के लोग भी यह भोग रहे हैं। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम हर चीज का मजाक बना रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा- स्थिति गंभीर है। केंद्र और दिल्ली की सरकार होने के तौर पर आपका रूख क्या है? आप प्रदूषण कम करने के लिए क्या करना चाहते हैं? पंजाब और हरियाणा से पराली जलाने की मात्रा को कम किए जाने को कहा है।
लोग घरों में भी सुरक्षित नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हम इस तरह से तो नहीं रह सकते हैं। केंद्र को कुछ करना चाहिए। राज्य को कुछ करना चाहिए। यह बहुत ज्यादा है। इस शहर में रहने के लिए कोई कमरा सुरक्षित नहीं है। लोग घरों में भी सुरक्षित नहीं है। हम इसके चलते अपने जीवन के बहुमूल्य साल खो रहे हैं।
रविवार को ज्यादातर इलाकों में विजिबिलिटी (दृश्यता) काफी कम थी
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक, सोमवार को लोधी रोड में प्रदूषण कारण कण पीएम 2.5 का स्तर 703, दिल्ली विश्वविद्यालय में 695 और धीरपुर में 676 रहा। वहीं, एक्यूआई आनंद विहार में 491 और आईटीओ में 434 रिकॉर्ड हुआ, जो प्रदूषण की गंभीर स्थिति है। रविवार को ज्यादातर इलाकों में विजिबिलिटी (दृश्यता) काफी कम थी। दिल्ली एयरपोर्ट पर खराब मौसम और लो विजिबिलिटी के कारण विमान सेवाओं पर असर पड़ा। टर्मिनल-3 से 37 फ्लाइट्स को जयपुर, अमृतसर और लखनऊ डायवर्ट करना पड़ा था।
प्रदूषण को लेकर उच्चस्तरीय बैठक हुई
प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा और कैबिनेट सचिव राजीव गाबा ने दिल्ली-एनसीआर में बढ़े प्रदूषण को देखते हुए रविवार शाम को उच्चस्तरीय बैठक की थी। बैठक में दिल्ली के अलावा पंजाब और हरियाणा सरकार के प्रतिनिधि भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए। इससे पहले, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र से प्रदूषण के रोकथाम के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया था और कहा था कि वे इस पर कोई राजनीति नहीं चाहते। यदि केंद्र इस पर कोई पहल करता है, तो वे इसका समर्थन करेंगे।
लंदन में प्रदूषण से निपटने के लिए कानून बनाना पड़ा
दिल्ली जैसा स्मॉग जब लंदन में हुआ को इसे द ग्रेट स्मॉग कहा गया, इससे निपटने को कानून बनाना पड़ा। कारखानों और वाहनों से निकले धुएं ने लंदन को स्मॉग की एक गहरी चादर में ढंक दिया, इसे द ग्रेट स्मॉग कहा गया। एक रिपोर्ट के अनुसार, इसकी वजह से सैकड़ों सांस के मरीजों की मौत हुई और सरकार को क्लीन एयर एक्ट 1956 लाना पड़ा। इससे लंदन के प्रशासन को वायु प्रदूषण से निपटने के लिए खास अधिकार दिए।
एयर क्वालिटी इंडेक्स के मानक
एक्यूआई को 0-50 के बीच ‘बेहतर’, 51-100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 से 200 के बीच ‘सामान्य’, 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 से 400 के बीच ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच ‘गंभीर’ माना जाता है। वहीं, हवा में पीएम 10 का स्तर 100 और पीएम 2.5 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
दिल्ली में हेल्थ इमरजेंसी, 50 लाख मास्क बांटे गए
केजरीवाल ने शुक्रवार को पड़ोसी राज्यों में पराली जलाए जाने से बढ़े प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली-एनसीआर के सभी स्कूल 5 नवंबर तक बंद रखने के आदेश दिए। वहीं, सुप्रीम कोर्ट के पैनल ने प्रदूषण का स्तर अति गंभीर होने पर दिल्ली-एनसीआर में पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित की। साथ ही 5 नवंबर तक सभी तरह के निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध लगाया गया। सर्दी के मौसम में पटाखे जलाने पर पूरी तरह रोक रहेगी। केजरी सरकार ने 4 से 15 नवंबर तक ऑड-ईवन लागू किया है। निजी और सरकारी स्कूलों में 50 लाख से ज्यादा मास्क बांटे गए।

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