सूरत {गुजरात}विकास धाकड़/ तेरापंथ भवन, सिटीलाइट में आचार्य भिक्षु के 223 वें चरमोत्सव पर उद्गार में प्रोफेसर साध्वी मंगल प्रज्ञाजी ने कहा आचार्य भिक्षु वो महासुर्य थे जिसने अंधियारी रातों में प्रकाश का सूर्योदय किया, कुमत की आंधियों में विशिष्ट तत्त्व दर्शन दिया । सतहत्तर वर्ष की ढलती उम्र में भी उनकी स्वस्थता, परिश्रम और पराक्रम प्रेरणास्पद और आदर्श है। सुविधावाद कभी उनके नजदीक नहीं आया। उन्होंने ता उम्र जागृति का जीवन जीया। जीवनभर जागृति का संदेश देते रहे आज वह नहीं हैं पर उनके विचार सिद्धान्त जन-जन को दिशा प्रदान कर रहे हैं। वे कीर्तिधर आचार्य थे।
संघर्षो के कंटीले मार्ग पर निरंतर गतिमान रहे। तेरापंथ संघ की दीर्घजीविता के पीछे महामना आचार्य भिक्षु की क्रान्तिकारी चेतना, सुचिन्तित विचारधारा का महनीय योगभूत योगदान है। उन्होंने सत्यशोध की नव दिशा दी उनके द्वारा प्राप्त मर्यादा, अनुशासन और व्यवस्था संघविकास का आधार है । प्रो.साध्वी मंगलप्रज्ञा जी ने कहा- संघविकास के लिए उन्होंने अंतिम समय में अनेक शिक्षाएं दीं। उन्होंने कहा- आज्ञा, अनुशासन संघ के हर सदस्य की जीवन प्राण है।
गलती खोजने की वृत्ति से दूर रहकर पास्परिक प्रेम भाव का साथ संवर्धन हो। परिषद को प्रेरणा प्रदान करते हुए साध्वी श्री जी ने कहा- आचार्य भिक्षु की शिक्षाएं घर परिवार में अनुकरणीय है। तेरापंथ महिला मंडल ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। साध्वी डॉ शौर्यप्रभाजी ने व आचार्य भिक्षु और भगवान महावीर जीवन की तुलनात्मक एक प्रसंग सुनाए।
तेरापंथ सभा सूरत के सदस्यों ने प्रो. साध्वी मंगलप्रज्ञा जी द्वारा रचित गीत का संगान किया। बाल मुमुक्षु जहान बेताला ने भिक्षु के प्रति काव्यांजलि प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन साध्वी राजुलप्रभा जी ने किया। श्री मिठालाल जी मोगर ने 31 वीं अढाई का प्रत्याख्यान किया। तेरापंथ सभा द्वारा उनका सम्मान किया गया।
अखिल भारतीय महिला मंडल द्वारा निर्देशित ‘भिक्षु जप अनुष्ठान” का तेरापंथ महिला मंडल द्वारा आयोजित किया गया। रात्रि कालीन अभ्यर्थना एक कान्ति की ” विषयक भिक्षु भजन संध्या आयोजित हुई जिसमें सूरत प्रवासी अलग -अलग पारिवारिक सदस्यों द्वारा भिक्षु श्रद्धा संगीत प्रस्तुत किए गए। ज्ञानशाला परिवार ने आचार्य भिक्षु जीवन दर्शन पर लघु नाटिका का मंचन किया।
सूरत {गुजरात} आचार्य भिक्षु चरमोत्सव मनाया,महाकीर्तिधर और पराक्रम के पुरोधा थे आचार्य भिक्षु- प्रोफेसर साध्वी मंगलप्रज्ञा.!

