स्वाध्याय शिविर का हुआ समापन
रवि जैन/ ख़मनोर। श्रमण संघीय महामंत्री सौभाग्य मुनि ” कुमुद ” ने कहा कि भगवान महावीर का जीवन सदैव प्रेरणास्त्रोत रहा है। उन्होंने सांसारिक बंधनो को तोड़कर मुक्ति मार्ग की और अपने पावन कदम बढ़ाये। अहंकार, क्रोध, राग, परिग्रह सहित अनेक विकारों पर उन्होंने विजय प्राप्त करी तभी महावीर कहलाये। हमे भी शरीर मिला है उस शरीर मे जिव्हा भी मिली है। जिव्हा में गुण और अवगुण दोनों होते है। जिव्हा अगर अच्छा बोलती है तो सम्मान मिलता है और गलत बोल जाती है तो लड़ाई – झगड़े पैदा करवा देती है इसलिए सदैव ये प्रयास करे कि जिव्हा का गुण के रूप में ही उपयोग हो ताकि आपसी प्रेम – स्नेह बना रहे।
वे रविवार को कस्बे के गुरु अम्बेश सौभाग्य मदन दरबार मे वर्षावास के दौरान आयोजित धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे। मुनि कुमुद ने पाप और पुण्य पर भी प्रकाश डालते हुये कहा कि धर्म सदैव हमे सदमार्ग की और ले जाने हेतु प्रेरित करता है इसलिए धर्म पथ की और अपने जीवन को मोड़े।
इस अवसर पर मेवाड़ प्रवर्तक महाश्रमण मदन मुनि पथिक ने भी धर्मसभा को संबोधित करते हुये कहा कि आत्मा को परमात्मा बनाने के लिये हमें अपने जीवन मे धर्म का आचरण करना चाहिये। जिसके जीवन मे धर्म का आचरण नही है उसके जीवन का कभी भी कल्याण नही हो सकता । इस अवसर पर युवा मनीषी कोमल मुनि महाराज ने कहा कि युवा समाज की अनमोल धरोहर है, युवाओं के हाथों में धर्म को सर्वत्र फैलाने की क्षमता होती है इसलिए युवा पीढ़ी धर्म क्षेत्र में आगे आकर अपने जीवन को आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ाये। धर्म सभा मे सम्भव मुनि महाराज, उप प्रवर्तनी महासती डॉ रवि रश्मि श्री महाराज ने भी धर्म सभा को संबोधित किया। कार्यक्रम के दौरान ही श्री महावीर स्वाध्याय केंद्र कुंवारिया की और से श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ ख़मनोर के तत्वाधान में आयोजित पांच दिवसीय स्वाध्याय शिविर का भी समापन हुवा। धर्म सभा के बाद तपस्वियों एवं आगन्तुक अतिथियों का स्वागत किया गया। वर्षावास के दौरान प्रतिदिन प्रार्थना सहित धर्मसभा, सामूहिक जाप, प्रतिकमन, धर्म – चर्चा का आयोजन हो रहा है जिसमे समाजजन बढ़ – चढ़ कर भाग ले रहे है।
बच्चो में संस्कार हेतु प्रतियोगिता का आयोजन – युवा मनीषी कोमल मुनि महाराज की प्रेरणा से बच्चो में संस्कार के बीजारोपण के तहत प्रत्येक रविवार को विविध धार्मिक प्रतियोगिताओं का आयोजन हो रहा है जिसमे नन्हे – मुन्हे बालक – बालिकाओ सहित समाज की प्रतिभाए बढ़ – चढ़ कर भाग ले कर अपनी प्रतिभा का विकास कर रही है।

