सुरभि सलोनीसुरभि सलोनीसुरभि सलोनी
  • National
  • State
  • Social
  • Entertainment
  • Mumbai / Maharashtra
  • Video
  • E-Magazine
Reading: संसार के मोह से निकल कर्मों की निर्जरा और वैर-मुक्ति की ओर बढ़ें : डॉ. श्री पदमचन्द्रजी म.सा.
Share
Font ResizerAa
सुरभि सलोनीसुरभि सलोनी
Font ResizerAa
  • National
  • State
  • Social
  • Entertainment
  • Mumbai / Maharashtra
  • Video
  • E-Magazine
Search
  • Business
  • entertainment
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Advertise
© 2022 Surabhi Sloni All Rights Reserved.
social

संसार के मोह से निकल कर्मों की निर्जरा और वैर-मुक्ति की ओर बढ़ें : डॉ. श्री पदमचन्द्रजी म.सा.

Last updated: August 16, 2026 8:23 pm
Surabhi Saloni
Share
4 Min Read
SHARE

बेंगलुरु। श्री श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन श्रावक संघ ट्रस्ट एवं चातुर्मास समिति, हलसुरु के तत्वावधान में आचार्य श्री पार्श्वचन्दजी म.सा. के सानिध्य में सुब्रह्मण्यम स्वामी कल्याण मंडप में आयोजित विशेष प्रवचन में पूज्य गुरुदेव डॉ. श्री पदमचन्द्रजी म.सा. ने संसार के मोह-माया, कर्म सिद्धांत, क्षमा, संयम और आत्मकल्याण पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मनुष्य संसार छोड़ने का विचार करता है, लेकिन मोह-ममता के कारण बार-बार उसी में उलझ जाता है। जैसे मकड़ी स्वयं जाला बनाकर उसी में फंस जाती है, वैसे ही जीव अपने कर्मों का जाल स्वयं तैयार करता है। कर्म बांधते समय सुखद लगते हैं, लेकिन उदय आने पर उन्हीं का फल भोगना पड़ता है।
गुरुदेव ने कहा कि जीव ही अपने कर्मों का कर्ता और भोक्ता है। जीवन में सुख-दुःख या विपरीत परिस्थिति आने पर दूसरों को दोष देने के बजाय अपने कर्मों को समझना चाहिए। कर्म किसी के साथ पक्षपात नहीं करता। इसलिए कठिन परिस्थितियों में भी समता रखना जैन जीवन की पहचान है। राजा शांतनु और गंगा के प्रसंग के माध्यम से उन्होंने मोह की शक्ति तथा वैराग्य का महत्व समझाया। गंगा ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने पुत्र के मन में पिता के प्रति द्वेष नहीं पैदा किया। उन्होंने कहा कि दम्पतियों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन बच्चों के मन में माता-पिता के प्रति नफरत पैदा करना संस्कारों के विपरीत है।
उन्होंने कहा कि वैर और बदले की भावना जीव को संसार में बांधे रखती है। इसलिए संवत्सरी से पहले पुराने मनमुटाव और वैर के खाते बंद करने चाहिए। माता-पिता, पति-पत्नी, भाई-बहन, सास-बहू, मित्र और संबंधियों से क्षमा मांगकर मन को निर्मल बनाना चाहिए। गुरुदेव ने भाव-सामायिक की व्याख्या करते हुए कहा कि केवल निर्धारित समय तक सामायिक करना ही पर्याप्त नहीं है। विकट परिस्थितियों में भी राग-द्वेष से मुक्त रहकर मन को समता में रखना सच्ची भाव-सामायिक है। परिवार में सामंजस्य पर उन्होंने कहा कि मां और पत्नी दोनों का सम्मान करते हुए परिवार को जोड़कर रखना चाहिए। बहू को घर की जिम्मेदार सदस्य का सम्मान मिले तथा सास भी अधिकार की खींचतान से ऊपर उठे। गुरु-सान्निध्य की महत्ता बताते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं सहित परिवार को समय-समय पर साधु-साध्वियों के सान्निध्य में रहना चाहिए। गुरु के संस्कार जीवन को सही दिशा देते हैं उन्होंने लोभ और अनैतिक कमाई से बचने की सीख देते हुए कहा कि सट्टा अथवा गलत मार्ग से कमाया धन सुख नहीं देता। जैन व्यक्ति को पुरुषार्थ, बुद्धि और नीति से धन अर्जित करना चाहिए। साथ ही साधु-साध्वी एवं चतुर्विध संघ की ज्ञातना से बचना चाहिए, क्योंकि इससे पुण्य का क्षय होता है।
गुरुदेव ने कहा कि जीवन में संकट कितना भी बड़ा हो, नकारात्मकता और आत्मघात का विचार नहीं करना चाहिए। धर्म, सामायिक,नवकार मंत्र और गुरु-सान्निध्य के माध्यम से मन को स्थिर रखते हुए कर्मों की निर्जरा का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसार के रिश्ते, धन और वैभव नश्वर हैं। मनुष्य जीवन को केवल मोह-माया में गंवाने के बजाय संयम, गुरु-भक्ति और आत्मचिंतन में लगाना चाहिए। कर्मों को स्वीकार कर समता धारण करना, वैर के खाते बंद करना और धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ना ही आत्मकल्याण एवं मोक्ष की दिशा है। सुश्री निधि कोठारी को 9 उपवास की पूर्णाहुति पार बहुमान किया गया। मध्यान्ह 1 बजे से 4 बजे तक आयोजित जैन संस्कार शिविर में अनेक बालक-बालिकाओं ने ज्ञानजर्न किया एवं अलसुरु के सभी युवा संघ के युवको ने अपनी सेवाये प्रदान की। अध्यक्ष किशनलाल कोठारी ने सभी का स्वागत किया और कार्याध्यक्ष सुनील गादिया ने संचालन किया।

Sign Up For Daily Newsletter

Be keep up! Get the latest breaking news delivered straight to your inbox.

By signing up, you agree to our Terms of Use and acknowledge the data practices in our Privacy Policy. You may unsubscribe at any time.
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Copy Link Print
Share
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0
Previous Article सामायिक से सावद्य योग की होती है विरति : युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण
Next Article कन्या सुरक्षा स्तंभ पर तेरापंथ महिला मंडल कांदिवली ने मनाया 80वां स्वतंत्रता दिवस

आज का AQI

Live Cricket Scores

Latest News

गोरेगांव (मुंबई) अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी के तत्वाधान में अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के अंतर्गत गोरेगाँव में अहिंसा दिवस भव्य आगाज
social
October 2, 2026
विलेपार्ले अणुव्रत संगान से हुआ अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का मंगल शुभारंभ
social
October 2, 2026
‘कांतारा’ के 4 साल पूरे, ऋषभ शेट्टी और होम्बले फिल्म्स ने मनाया ब्लॉकबस्टर फिल्म का जश्न
entertainment
October 1, 2026
एक्ट्रेस श्वेता महारा, दिग्गज अभिनेता संजय पांडेय, एक्ट्रेस श्वेता वर्मा, सिंगर रत्नेश सिंह रुद्र और शालिनी दूबे का देवी गीत ‘चुनरिया मइया के’ वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स ने किया रिलीज
entertainment
October 1, 2026

Sign Up for Our Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

Follow US
© 2026 Surabhi Saloni All Rights Reserved. Disgen by AjayGupta
  • About Us
  • Privacy
  • Disclaimer
  • Terms and Conditions
  • Contact
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?