मुंबई। साध्वी श्री आणिमाश्रीजी एवं साध्वी श्री मंगलप्रज्ञा जी ठाणा 6 का महाप्रज्ञ पब्लिक स्कूल में सफलतम चातुर्मास की परिसनपन्नता के पश्चात एक दिवसीय विहार नानालाल , सुरेश अशोक डागलिया के यहां पर हुआ। राजा परदेशी का रोचक व्याख्यान श्रवण कर सैकड़ों भाई बहन साध्वी वृन्द के साथ विहार यात्रा में संभागी बने ।
श्रावक श्राविकाओं की विशाल उपस्थिति भव्य जुलुस के रूप में तब्दीली हो गई। आगे आगे जैन ध्वज लिए सुरेश डॉगलिया नितेश धाकड़, जुलूस का नेतृत्व कर रहे थे। उसके पश्चात ज्ञानशाला के बच्चो , कन्यामण्डल , महिला मण्डल बीच मे साध्वी वृन्द तत्पश्चात युवक परिषद एवं सभा के सदस्यों से शोभायमान भव्य जुलूस जयनारो से धरा अम्बर को को गुंजायमान करते हुए शहर के मुख्य मार्गो से गुजर रहा था। राह चलता हर राहगीर इस अनुशासित व व्यवस्थित जुलूस को देखकर मंत्रमुग्ध हो रहा था एव त्याग की सूरत साध्वी वृंद को श्रद्धा नमन कर कृत पूण्य हो रहा था।
साध्वी श्री आणिमाश्रीजी ने अपने प्रेरणादायी उदबोधन में कहा दक्षिण मुंबई वासियो को पूज्य श्री की कृपा से चातुर्मास प्राप्त हुआ। गुरुदेव की कृपा से जिस कार्य को जिस ढंग से सम्पादित करने का चिंतन एवं निर्णय लिया क्रियान्वित भी उसी ढंग से होती गई ।
आचार्य महाप्रज्ञ विधानिधि फाउंडेशन , तेयुप व महिला मण्डल ने जागरूकता के साथ अपने दायित्व का निर्वहन किया है। अब पाक्स की परिसनपन्नता के पश्चात जैन साधुओं के विहार का क्रम प्रारंभ हो जाता है। विहारचर्या जैन साधु की प्रशस्त चर्या रही है। एक दिवसीय विहार के पश्चात पुनः हमारा यही आगमन होगा। पूज्य श्री के निर्देशानुसार साध्वी कार्णिक के स्वास्थ्य अनुकूलता न होने के कारण कुछ दिनों के लिए आगमी प्रवास हमारा स्कूल में ही रहेगा। श्रावक समाज शेषकाल के प्रवास का अच्छा लाभ ले एवं जीवन को अध्यात्मय बनाए। साध्वी श्री मंगलप्रज्ञा जी ने मंगल पाथेय प्रदान करते हुए कहा पूज्य श्री के असीम अनुग्रह से चातुर्मास के तुरंत बाद आपको प्रवास का लाभ मिल रहा है। अल्प समय मे सृजन के स्वास्तिक उकेरने है। अधिकांश लोग धर्मकर्णी कल करने की बात कहते है। किन्तु सच मानिए जीवन मे कल कभी नही आता जो कुछ करना है। वह अभी इसी क्षण करना है । जो कल कल करते है वे रीते ही रह जाते है। उनकेअधुरे सपने कभी पूरे नही होते । आप लोगो को समय रहते समय का लाभ उठाना है। जो समय का सदुपयोग करता है वही समझदार कहलाता है। हम सही मायने में समझदार बने एवं जीवन को उध्रवारोहि बनाए।
साध्वी कार्णिका श्रीजी , साध्वी सुधाप्रभाजी, साध्वी स्मतव्यशाजी , साध्वी मैत्रीप्रभाजी ने मंगलभाव व्यक्त किए।
फाउंडेशन के अध्यक्ष किशनलाल डागलिया ने कहा साध्वी श्रीजी के चातुर्मास से दक्षिण मुंबई में अध्यात्म की नई लहर पैदा हुई। पूज्योदय से हमे फिर दुर्लभ अवसर प्राप्त हुआ है। सवाया लाभ लेकर जीवन को ऊर्जामय बनाए। सुरेश डागलिया ने अपने निवास पर प्रदार्पण के लिए साध्वी वृन्द का अभिनंदन किया। डागलय परिवार की बहनो ने सुंदर स्वागत गीत की प्रस्तुति दी। संचालन दिनेश धाकड़ ने किया। यह जानकारी तेयुप के मीडिया प्रभारी नितेश धाकड़ ने दी।

