विलेपार्ले {मुंबई} विकास धाकड़/ युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी की विदुषी शिष्या साध्वी श्री राकेश कुमारी जी आदि साध्वीvवृंद ठाणा-4 का रविवार, 19 जुलाई 2026 को विलेपार्ले स्थित गोयल जी के निवास पर भव्य मंगल प्रवेश हुआ। प्रातःसोहनलाल जी धाकड़ के निवास स्थान से प्रारंभ हुई विशाल प्रवेश रैली जय घोषों एवं धर्ममय वातावरण के बीच गोयल जी के निवास तक पहुँची। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने श्रद्धा एवं उत्साह के साथ साध्वीवृंद का भावभीना स्वागत किया।
रैली के उपरांत आयोजित स्वागत कार्यक्रम में श्री तुलसी महाप्रज्ञ फाउंडेशन के अध्यक्ष मेघराज जी धाकड़, मुंबई सभा के अध्यक्ष सुरेंद्र जी कोठारी, पूर्व अध्यक्ष माणक जी धींग तथा भारत जैन महामंडल युवा इकाई के अध्यक्ष भूपेश जी कोठारी ने अपने विचार व्यक्त किए। नरेंद्र जी तातेड ने गीतिका के माध्यम से अपनी भावनाओं की सुंदर अभिव्यक्ति दी। इस अवसर पर मुंबई सभा के मंत्री गौतम जी डांगी, कोषाध्यक्ष रिंकूजी बाफना, उपाध्यक्ष नवरत्न जी गन्ना एवं विष्णु जी बाफना, पूर्व मंत्री दिनेश जी सुतारिया आदि गणमान्यजन उपस्थित रहे। आयोजित समारोह का शुभारंभ साध्वी श्री राकेश कुमारी जी के नवकार मंत्र से हुआ। रेणु जी कोठारी नें मधुर संगान सें मंगलाचरण प्रस्तुत किया। तेयुप विलेपार्ले के अध्यक्ष महेंद्र जी वडाला एवं तेरापंथ महिला मंडल की अध्यक्षा कुसुम जी कोठारी ने स्वागत उद्बोधन दिया। टीपीएफ मुंबई वेस्टर्न जोन के अध्यक्ष प्रशांत जी परमार ने भी अपने विचार व्यक्त किए। तेरापंथ महिला मंडल विलेपार्ले द्वारा स्वागत गीतिका प्रस्तुत की गई।
सांताक्रूज के अध्यक्ष ओमप्रकाश जी चोरड़िया एवं अनिल जी बाफना आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। सांताक्रूज ज्ञानशाला एवं महिला मंडल ने अपनी गीतिका के माध्यम से प्रस्तुति दी। विलेपार्ले महिला मंडल ने प्रेरक एवं प्रभावशाली प्रस्तुति देकर उपस्थित जन समुदाय को आध्यात्मिक संदेश प्रदान किया। सांताक्रूज से कंचन जी कोठारी ने गीतिका की सुंदर प्रस्तुति दी। साध्वीश्री मलय विभा जी, साध्वीश्री विपुलयशा जी एवं साध्वीश्री चेतस्वी प्रभा जी ने अष्टमंगल के आध्यात्मिक महत्व पर प्रेरक प्रस्तुति देते हुए त्याग एवं तप की भावना को जीवन में अपनाने का संदेश दिया। अपने प्रेरणास्पद उद्बोधन में साध्वी श्री राकेश कुमारी जी ने कहा कि चातुर्मास आध्यात्मिक खेती का समय है। इस अवधि में आत्मा के विकास हेतु साधना, स्वाध्याय एवं धर्माराधना के माध्यम से आध्यात्म रूपी खेती का सिंचन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विलेपार्ले में इस चातुर्मास के दौरान अध्यात्म की गंगा प्रवाहित होगी, जिसका लाभ लेकर प्रत्येक श्रावक-श्राविका अपने पाप, ताप एवं संताप को दूर कर सकता है। साध्वी श्री जी ने विलेपार्ले को एक छोटे से आध्यात्मिक टापू की संज्ञा देते हुए कहा कि यह क्षेत्र सेवा, जागरूकता एवं धर्मनिष्ठा के लिए सदैव अग्रणी रहा है। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं के समर्पण एवं सक्रियता की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि इस चातुर्मास का अधिकतम आध्यात्मिक लाभ सभी को प्राप्त होगा। साथ ही आचार्य भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी वर्ष की सम्पन्नता के उपलक्ष्य में सभी श्रावक-श्राविकाओं को ‘तेले’ के अनुष्ठान करने की प्रेरणा भी प्रदान की। कार्यक्रम के अंत में मुकेश जी वडाला ने आभार ज्ञापित किया तथा कार्यक्रम का कुशल संचालन दीपक जी डागलिया ने किया। टीपीएफ मुंबई वेस्टर्न जोन कोषाध्यक्ष विकास जी हिरण, सांताक्रूज़ सभा मंत्री ख्यालीलाल जी कोठारी,किरण जी परमार,निलेश जी कोठारी, महेश जी परमार,प्रकाश जी सिंघवी आदि की सराहनीय उपस्थिति रही। इस संपूर्ण प्रवेश आयोजन को सफल बनाने में तेरापंथ युवक परिषद विलेपार्ले से चेतनजी सिंघवी, सुनील जी वडाला, रॉकी जी कोठारी,अरविंद जी कोठारी एवं मुकेश जी कोठारी का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम में विलेपार्ले के साथ-साथ सांताक्रूज, बांद्रा, खार, अंधेरी एवं जोगेश्वरी सहित विभिन्न क्षेत्रों से श्रावक-श्राविकाओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।
साध्वी श्री राकेश कुमारीजी आदि साध्वी वृंद का चातुर्मासिक मंगल प्रवेश

