24 जून को बेहतरीन साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म ‘रमन राघव 2.0’ की रिलीज के पूरे दस साल हो रहे हैं। यह फिल्म आज भी मॉडर्न इंडियन सिनेमा के इतिहास में सबसे ज्यादा झकझोर देने वाले और कभी न भूलने वाले क्राइम ड्रामा में से एक मानी जाती है। अनुराग कश्यप के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने बेरहम सीरियल किलर ‘रमन’ का एक ऐसा किरदार निभाया था, जिसने उनके करियर को एक नई ऊंचाई दी। इस कैरेक्टर की खौफनाक सोच एक दशक बाद भी दर्शकों के रोंगटे खड़े कर देती है।
फिल्म को इसकी डार्क स्टोरीटेलिंग और कमाल की मेकिंग के लिए खूब तारीफें मिलीं, लेकिन इसका सबसे बड़ा इम्पैक्ट नवाजुद्दीन सिद्दीकी की बेखौफ एक्टिंग से आया, जिन्होंने एक ऐसे आदमी का रोल निभाया जो बिना किसी पछतावे या वजह के मर्डर करता था। इस रोल की तैयारी के लिए एक्टर ने एक बेहद अलग और अनोखा तरीका अपनाया था, जिसने उन्हें इस किरदार की मानसिक स्थिति को पूरी तरह समझने में मदद की।
अपनी तैयारी के दिनों को याद करते हुए नवाजुद्दीन ने खुलासा किया कि शूटिंग शुरू होने से कुछ दिन पहले उन्होंने खुद को लोनावला में सबसे अलग (आइसोलेट) कर लिया था। उन्होंने बताया, “शूटिंग शुरू होने से तीन दिन पहले, मैं फिल्म की स्क्रिप्ट लेकर किरदार की गहराई में उतरने के लिए लोनावला चला गया था। मैं एक सुनसान इलाके के एक साधारण से होटल में रुका था, जहाँ आस-पास ज्यादा लोग नहीं थे। मैंने सारे डायलॉग्स याद कर लिए थे, लेकिन फिर भी मैं इस कैरेक्टर में कुछ खास जोड़ना चाहता था। मैं खुद से लगातार पूछता रहता था कि मैं इसे दूसरों से अलग कैसे बना सकता हूँ?”
नवाजुद्दीन के लिए सिर्फ लाइन्स याद करना काफी नहीं था। असली चुनौती उस आदमी की मानसिकता को समझना था, जिसके अंदर कोई मोरल कंपास (नेतिकता) बचा ही नहीं था। बदला, लालच या किसी खास विचारधारा के लिए मर्डर करने वाले आम विलेन्स से अलग, रमन के लिए हत्या करना रोजमर्रा के काम जैसा था।
एक्टर ने याद करते हुए बताया, “उस किरदार की अपनी एक फिलॉसफी (सोच) थी-जहाँ दूसरे लोग समाज, धर्म या किसी और चीज के नाम पर मारते हैं, वहीं वो सिर्फ अपने मजे के लिए मारता था। उसके लिए यह एक डेली रूटीन जैसा था।”
इस मानसिक उलझन को अपने अंदर उतारना बेहद मुश्किल था। नवाजुद्दीन ने माना कि इस किरदार की क्रूर ईमानदारी को स्वीकार करना एक एक्टर के तौर पर उनके लिए सबसे कठिन काम था। उन्होंने कहा, “वह जैसा था और जो करता था, उसे लेकर बहुत ईमानदार था, और एक एक्टर के रूप में उस सच्चाई को अपनाना मेरे लिए बहुत मुश्किल था। मुझे खुद को यह समझाने में तीन दिन लग गए कि हाँ, मैं यह कर सकता हूँ।”
उनकी यह मेहनत रंग लाई। साल 2016 में रिलीज होने पर ‘रमन राघव 2.0’ को इसकी बेबाक कहानी और नवाजुद्दीन सिद्दीकी व विक्की कौशल की दमदार एक्टिंग के लिए हर तरफ सराहा गया। पिछले कुछ सालों में इस फिल्म की अपनी एक तगड़ी कल्ट फैन फॉलोइंग बन गई है, और कई सिनेमा प्रेमी व क्रिटिक्स आज भी इसे हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की सबसे बेहतरीन साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्मों में से एक मानते हैं।
एक दशक बाद भी, रमन के रूप में नवाजुद्दीन की एक्टिंग किसी भी कैरेक्टर में पूरी तरह डूब जाने की एक बेहतरीन मिसाल है। खुद को सबसे अलग कर लेने, किरदार की टेढ़ी सोच को समझने और खुद को एक मुश्किल इमोशनल जोन में धकेलने के उनके फैसले ने एक ऐसा परफॉर्मेंस तैयार किया जो आज भी समकालीन भारतीय सिनेमा के सबसे डरावने और यादगार किरदारों में गिना जाता है।
अब जब ‘रमन राघव 2.0’ अपने दस साल पूरे कर रही है, तो यह याद दिलाती है कि जटिल किरदारों को पर्दे पर जिंदा करने के लिए एक्टर्स को कभी-कभी कितने बड़े रिस्क लेने पड़ते हैं, और कैसे नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने अपनी इसी तैयारी को अपने करियर के सबसे बड़े परफॉर्मेंस में बदल दिया। वर्क फ्रंट की बात करें, तो नवाज़ जल्द ही ‘तुंबाड 2’ और ‘थामा 2’ जैसी फिल्मों में नजर आने वाले हैं।
‘रमन राघव 2.0’ के 10 साल: नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने जानें अपने किरदार में उतरने के लिए कि थी कैसी तैयारी?

