नवी मुंबई। नवी मुंबई महानगरपालिका के कुशल नेतृत्व, जन-साधारण के आधारस्तंभ और नवनिर्वाचित उपमहापौर श्री दशरथ (नाना) भगत ने अपने पद की व्यस्तताओं को किनारे रखकर रिश्तों की आत्मीयता को प्राथमिकता दी और एक आदर्श उदाहरण पेश किया। अवसर था डॉ. बलवंत चोरडिया एवं श्रीमती चोरडिया की 26वीं शादी की वर्षगांठ का। जहां, पहुंचकर उन्होंने इस दंपत्ति को अपनी शुभकामनाएं दी।
उल्लेखनीय है कि भूमिराज रेजीडेंसी के गेट पर श्री अमोल काले और श्री उन्नी नायर ने भव्य स्वागत के साथ उपमहापौर की लाल बत्ती वाली गाड़ी का अभिवादन किया, तो वहाँ उपस्थित सभी निवासियों में एक अलग ही उत्साह भर गया। चोरडिया परिवार के लिए यह क्षण किसी सपने जैसा था, क्योंकि राजनीति की एक दिग्गज शख्सियत उनके खुशी के पलों में स्वयं शामिल होने पहुँची थी। इस कार्यक्रम के अवसर पर जैन समाज के प्रमुख प्रतिनिधी एवं महावीर इंटरनॅशनल के प्रतिनिधि टी. पी. एफ. सीए. डॉ एवं एमपीसीटी हॉस्पिटल के चेअरमन सुराणाजी एवं उनके टीम ने भी उनको सन्मानित किया।
यह केवल उत्सव नहीं, बल्कि वास्तविक सम्मान है
इस अवसर पर नाना ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि “आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में 26 वर्षों तक एक-दूसरे को समझते हुए और कठिनाइयों का डटकर सामना करते हुए सुखद वैवाहिक जीवन बिताना किसी चुनौती से कम नहीं है। इसीलिए चोरडिया दंपति का यह केवल विवाह वर्षगांठ का उत्सव नहीं है, बल्कि उनकी एकजुटता और प्रेम का सच्चा सम्मान है।”
नाना ने इस दौरान आईटी (IT) क्षेत्र में काम करने वाली और नवविवाहित युवा पीढ़ी को भी अनमोल सलाह दी। बढ़ते तलाक और टूटते रिश्तों पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि, “आज की युवा पीढ़ी को चोरडिया परिवार से यह सीखना चाहिए कि संसार की गाड़ी एकजुट होकर कैसे चलाई जाती है।”
शाही स्वागत और सम्मान
चोरडिया परिवार की ओर से नाना का स्वागत पुणेरी पगड़ी, शाल और पुष्पगुच्छ भेंट कर अत्यंत सम्मान के साथ किया गया।
भूमिराज निवासियों की ओर से श्री और श्रीमती चोरडिया के साथ डॉ. अजय उपाध्याय, डॉ. जे. जे. कदम, श्री अमोल काले साहब और श्री नायर ने नाना का भव्य स्वागत कर उनके प्रति अपना आदर व्यक्त किया।
उपमहापौर बनने के बाद काम की व्यस्तता के बावजूद, नाना ने अपने मित्र और कार्यकर्ताओं की खुशी में शामिल होकर यह सिद्ध कर दिया कि “मानवता का रिश्ता” सबसे श्रेष्ठ है। चोरडिया दंपति के जीवन में आया यह दुर्लभ योग नाना की उपस्थिति के कारण अविस्मरणीय बन गया।
रिश्तों का सम्मान और कर्तव्य की मिसाल: उपमहापौर श्री दशरथ (नाना) भगत स्नेहपूर्ण उपस्थिति

